negative marking will be implemented for the first time in mppsc examinations 27 recruitment notifications released | MPPSC परीक्षाओं में पहली बार लागू होगी नेगेटिव मार्किंग: आयोग ने 27 भर्ती नोटिफिकेशन जारी किए; कुल 1,737 पदों पर होगी भर्ती

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33 मिनट पहले

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मध्यप्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन यानी MPPSC की प्रीलिम्स परीक्षा में पहली बार नेगेटिव मार्किंग होगी। आयोग ने 30 और 31 दिसंबर, 2025 को 27 नोटिफिकेशन जारी किए। इसमें नेगेटिव मार्किंग की जानकारी दी गई है। कैंडिडेट्स ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाकर नोटिफिकेशन देख सकते हैं।

इस साल MPPSC ने प्रोविंशियल सिविल सर्विस यानी PCS के लिए के विभिन्न पदों के लिए कुल 155 वैकेंसी की घोषणा की है। इसके लिए ऑनलाइन एप्लिकेशन की प्रक्रिया 10 जनवरी, 2026 से शुरू होगी। वहीं, आवेदन करने की लास्ट डेट 9 फरवरी, 2026 तय की गई है।

MPPSC ने 1,737 पदों पर भर्ती के लिए 27 नोटिफिकेशन जारी किए

पद का नाम

पदों की संख्या

1. प्रोविंशियल सिविल सर्विस

155

2.

फॉरेस्ट सर्विस

36

3.

इंजीनियरिंग सर्विस

32

4.

आयुर्वेद मेडिकल ऑफिसर

130

5.

होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर

34

6.

यूनानी मेडिकल ऑफिसर

30

7.

असिस्टेंट रजिस्ट्रार

12

8.

असिस्टेंट डायरेक्टर (फार्मर वेलफेयर एंड एग्रीकल्चर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट)

71

9.

असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी

57

10.

असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश

56

11.

असिस्टेंट प्रोफेसर संस्कृत

34

12.

असिस्टेंट प्रोफेसर ज्योग्राफी

74

13.

असिस्टेंट प्रोफेसर हिस्ट्री

56

14.

असिस्टेंट प्रोफेसर साइकोलॉजी

10

15.

असिस्टेंट प्रोफेसर लॉ

17

16.

असिस्टेंट प्रोफेसर जियोलॉजी

10

17.

असिस्टेंट प्रोफेसर यौगिक साइंस

3

18.

असिस्टेंट प्रोफेसर कॉमर्स

88

19.

असिस्टेंट प्रोफेसर पॉलिटिकल साइंस

73

20.

असिस्टेंट प्रोफेसर इकोनॉमिक्स

72

21.

असिस्टेंट प्रोफेसर सोशियोलॉजी

71

22.

असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिक्स

120

23.

असिस्टेंट प्रोफेसर केमिस्ट्री

116

24.

असिस्टेंट प्रोफेसर बॉटनी

125

25.

असिस्टेंट प्रोफेसर जूलॉजी

119

26.

असिस्टेंट प्रोफेसर मैथमेटिक्स

107

27.

असिस्टेंट प्रोफेसर कंप्यूटर साइंस

29

नॉन सीरियस कैंडिडेट्स की छंटनी करना उद्देश्य

एग्जाम एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाल के वर्षों में अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल परीक्षा देने वालों की संख्या घटाना नहीं, बल्कि गंभीर और अच्छी तैयारी करने वाले कैंडिडेट्स को छांटना है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बिना पर्याप्त तैयारी के केवल अनुमान के आधार पर प्रश्न हल करने वाले नॉन-सीरियस एस्पिरेंट्स अक्सर बड़े पैमाने पर गलत उत्तर देते हैं।

नेगेटिव मार्किंग लागू होने से ऐसे अभ्यर्थियों को नुकसान होता है, जिससे वे प्रारंभिक चरण (प्रीलिम्स) में ही बाहर हो जाते हैं। इससे मुख्य परीक्षा (मेन्स) तक पहुंचने वाले उम्मीदवारों की गुणवत्ता बेहतर होती है।

नेगेटिव मार्क्स से कटऑफ नीचे आती है

एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि नेगेटिव मार्किंग की वजह से कट-ऑफ सामान्य तौर पर नीचे आती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि परीक्षा आसान हो जाती है, बल्कि यह संकेत देता है कि केवल वही कैंडिडेट्स सफल होते हैं जिन्होंने विषयों को अच्छी तरह समझकर सटीक उत्तर दिए हैं।

अनुमान या तुक्केबाजी करने वाले उम्मीदवारों की तुलना में सीरियस स्टूडेंट्स को इससे फायदा होता है।

कुल मिलाकर, नेगेटिव मार्किंग का मकसद एग्जामिनेशन सिस्टम को अधिक गुणवत्ता-आधारित, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है, ताकि आगे की चयन प्रक्रिया में केवल वही उम्मीदवार पहुंचें जो वास्तव में प्रशासनिक या तकनीकी जिम्मेदारियों के लिए सक्षम हों।

भर्ती नोटिफिकेशन यहां से डाउनलोड कर सकते हैं

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