NEET Paper Leak | Nandan Nilekani Task Force Exam Reform Suggestion

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11 मिनट पहले

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NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा में सुधार के लिए बनाई गई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के प्रमुख और इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि ने मंगलवार यानी 13 अक्टूबर को पेपर लीक को रोकने का एक सुझाव दिया, जिसमें कहा गया है कि यदि केश्चन पेपर का एक बैंक बनाया जाए और एग्जाम वाले दिन ही लास्ट मोमेंट पर केश्चन पेपर तैयार किया जाए।

25 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के बड़े विरोध-प्रदर्शन के बाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद, पीएम नरेंद्र मोदी ने 6 सदस्यों वाली एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाई गई है।

जब पेपर बनता है, तो बिकने के लिए तैयार हो जाता है

नीलेकणी के मुताबिक, ‘जब आप एक पेपर बनाते हैं, तो वह बिकने के लिए तैयार हो जाता है, यानी पेपर लीक की समस्या सिर्फ सुरक्षा की नहीं, सिस्टम की है। इसलिए इसका तरीका ये है कि क्वेश्चन पेपर का एक बहुत बड़ा बैंक हो और उस दिन के लिए क्वेश्चन पेपर आखिरी समय में बनाया जाए। नीलेकणी ने AI एग्जाम पेपर सेट कर सकता है क्या तो इसका जवाब भी हां में दिया।

इससे क्वेश्चन पेपर बाहर नहीं जाएगा और इसके लिए कोई पैसे का लालच भी नहीं होगा। नीलेकणी ने नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में बातचीत के दौरान ये बात कही।

नीलेकणी की अगुवाई वाली टास्क फोर्स का सुझाव पुरानी कमेटियों की 101 सिफारिशों से बिल्कुल अलग है। हालांकि नीलेकणी ने रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि पीएम उनके फैसले को लागू करने के लिए बहुत उत्सुक हैं।

NEET-UG पेपर लीक कमेटी के प्रमुख के 7 सुझाव

नीलेकणी ने कहा- अगर पेपर लीक की समस्या को सिस्टम के नजरिए से देखा जाए और इसकी जड़ तक जाया जाए, तो यह एक ऐसी समस्या है जिसे हल किया जा सकता है।

क्या इन सिफारिशों को लागू करना आसान होगा

नीलेकणी ने कहा कि पेपर को एक दिन पहले ही तैयार किया जाए। हालांकि इसमें एक अलग तरह का खतरा शामिल हो जाएगा।

जब पेपर फिजिकल होता है तो उसकी खरीद फरोख्त के चांस बढ़ जाते हैं लेकिन जब पेपर डिजिटल होगा तो तो लीक का खतरा प्रिंटिंग प्रेस से हटकर सर्वर और नेटवर्क पर आ जाएगा। साथ ही हैकिंग, डेटा चोरी और इंटरनल थ्रेट जैसे नए जोखिम खड़े हो जाएंगे।

इसके साथ ही केश्चन पेपर की क्वालिटी पर भी असर होगा। क्योंकि लाखों केश्चन पेपर का बैंक बनाना आसान नहीं होगा। इसमें हर केश्चन क्वालिटी, केश्चन डिफिकल्टी और निष्पक्षता सुनिश्चित करना एक बड़ा काम है।

साथ ही NTA का स्ट्रक्चर मजबूत करना भी एक बड़ी समस्या है, बिना स्थायी स्टाफ, बिना फुल-टाइम डायरेक्टर के इसे लागू करना मुश्किल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी NTA NEET पेपर लीक मे यही कहा है, ‘पूरी व्यवस्था में स्थायित्व सबसे जरूरी पक्ष है।’

बता दें कि 13 सितंबर तक टास्क फोर्स ने स्टूडेंट्स, पेरेंट्स ,टीचर्स, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और कुछ ऑर्गेनाइजेशन से सुझाव मांगे थे जिसकी पहली रिपोर्ट 28 अक्टूबर को आने वाली है।

2024 में बनी 101 सिफारिशों का क्या हुआ?

2024 के NEET पेपर लीक के बाद ISRO के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई थी। 7 सदस्यीय राधाकृष्णन समिति ने एग्जाम में सुधार, डेटा सिक्योरिटी और NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के स्ट्रक्चर पर काम हो। इसके लिए 101 सिफारिशें प्रस्तावित की गई थीं।

इन सिफारिशों में क्वेश्चन पेपर मैनेजमेंट, कैंडिडेट्स रजिस्ट्रेशन, पेमेंट मोड, कंप्युटर बेस्ड एग्जाम शामिल है।

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