MP High Court said- If the fees seem expensive then go to government school | एमपी हाईकोर्ट ने कहा-फीस महंगी लगे तो सरकारी स्‍कूल जाएं: प्राइवेट स्‍कूलों को राहत दी, कहा-खुद फीस तय करने का अधिकार

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53 मिनट पहले

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर प्रशासन के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें निजी स्कूलों को अधिक वसूली गई फीस लौटाने के निर्देश दिए गए थे।

हाईकोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि उनके पास फीस तय करने और अलग-अलग निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं है। यह स्कूल चलाने वाले मैनेजमेंट या सोसाइटी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

कोर्ट ने कहा- पेरेंट्स, स्‍कूल के बीच मतभेद पैदा हुए

कोर्ट ने आगे कहा कि जिस तरीके से लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने पूरे मामले को हैंडल किया, उससे स्कूल मैनेजमेंट और पेरेंट्स के बीच अनबन और मतभेद पैदा हो गए, जो स्टूडेंट्स की पढ़ाई और करियर के लिए अच्छा नहीं है। इस मामले को 2017 के एक्ट और 2020 के रूल्स के तहत सही तरीके से हैंडल किया जा सकता था।

हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल ने आदेश में कहा- ‘राज्य के अधिकारी ने बहुत ही खराब माहौल में काम किया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है।’

जबलपुर प्रशासन ने 12 से अधिक स्कूल को नोटिस भेजा

मामला 9 जुलाई 2024 की है, जबलपुर जिले में कुछ प्राईवेट और चर्च-प्रबंधित स्कूलों पर अधिक फीस वसूलने के आरोप लगे थे। इसे लेकर जबलपुर प्रशासन ने आदेश जारी कर स्कूलों को फीस लौटाने, फीस सरंचना तय करने के साथ-साथ यूनिफॅर्म, किताबों और स्कूल बैग के वजन पर निर्देश दिए थे।

अधिकांश स्कूल मिशनरी संस्थाओं की

दो दर्जन से ज्यादा प्राईवेट स्कूल संचालकों ने मनमानी फीस वसूली के आरोप में दर्ज केसों के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील दायर करने वाले अधिकांश स्कूल मिशनरी संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे थे।

अपील में स्कूलों ने उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें मध्य प्रदेश प्राइवेट स्कूल (फीस और उससे जुड़े मामलों का विनियमन) अधिनियम, 2017 के सेक्शन 11 और उससे जुड़े नियमों के आधार पर फीस वापस करने के निर्देश दिए गए थे।

आरोप साबित नहीं कर पाया प्रशासन

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा जिन अभिभावकों को निजी स्कूलों की फीस अधिक लगती है, वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला क्यों नहीं दिलाते।

मंगलवार को अपने आदेश में हाई कोर्ट ने साफ किया कि अधिकारी आरोपों को साबित करने में नाकाम रहे। ऐसे में, उनकी ओर से स्कूलों के प्रबंधन पर की गई कार्रवाई उचित नहीं है।

स्‍टोरी- किशन कुमार

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