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12 मिनट पहले
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कर्नाटक के 5 मेडिकल कॉलेजों की कैंटीन्स छात्रों को एक्सपायरी डेट का खाना परोसे रहे थे। शनिवार को फूड सेफ्टी विभाग ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान कैंटीन में एक्सपायर्ड फूड आइटम्स के साथ-साथ गलत लेबलिंग वाले पैकेट भी मिले।
मामला सामने आने के बाद फूड सेफ्टी विभाग ने संबंधित कैंटीनों के खिलाफ कार्रवाई की। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है। न्यूज एजेंसी आईएनएस ने भी एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी साझा की है।
A total of 34 hostel canteens and kitchens at government and private medical colleges were inspected on August 27. Notices were issued to five facilities, while expired food items, including 7 kg rava and 8 litres of milk, were seized. Legal action is being initiated under food… pic.twitter.com/91RUR6gJlu— IANS (@ians_india) August 28, 2026

राज्य में सरकारी और प्राइवेट दोनों मिलाकर कुल 74 मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें लगभग 15 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 27 अगस्त को सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की 34 हॉस्टल कैंटीन और किचन की जांच की गई। इनमें से 5 जगहों को नोटिस दिया गया। जांच के दौरान 7 किलो रवा और 8 लीटर दूध समेत एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री जब्त की गई। फूड सेफ्टी कानून के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 27 अगस्त को सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के हॉस्टल में चल रही 34 कैंटीन और किचन की जांच की गई।
जांच में कमियां मिलने पर 5 कैंटीन और किचन को नोटिस जारी किया गया।
एक कैंटीन में खाद्य सामग्री की लेबलिंग से जुड़ी गड़बड़ी मिली। वहीं किचन में रखा 7 किलो एक्सपायर्ड रवा और 8 लीटर दूध मिला, जिसे जब्त कर लिया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इन गड़बड़ियों को लेकर फूड सेफ्टी कानून के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित कैंटीन संचालक को आगे की कार्रवाई के लिए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) के सामने पेश किया जाएगा। ADM इस मामले में सुनवाई करेंगे।
हॉस्टल-मेस और कैंटीन में फूड सेफ्टी के जरूरी नियम
- सबसे पहले FSSAI रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस जरूरी हॉस्टल के मेस या कैंटीन में अगर छात्रों के लिए खाना बना रहे हैं, तो FSSAI के नियमों का पालन करना होगा।
- कौन-सा लाइसेंस लगेगा, यह कारोबार के टर्नओवर पर निर्भर करता है। छोटे कारोबार के लिए रजिस्ट्रेशन और बड़े कारोबार के लिए अलग कैटेगर का लाइसेंस होता है।
- मेस और कैंटीन में खाना बनाने की जगह, बर्तन, फर्श और खाने की दूसरी जगहों की नियमित सफाई होनी चाहिए।
- खाना ऐसी जगह नहीं बनना चाहिए जहां गंदगी या दूषित चीजों से खाने के खराब होने का खतरा हो।
- किचन में कीड़े न आएं, इसके लिए उचित इंतजाम होना चाहिए। पानी की निकासी की भी सही व्यवस्था होनी चाहिए।
- बर्तन धोने के लिए साफ पानी की व्यवस्था हो और टूटे या दरार वाले बर्तनों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
- खाना खुले में नहीं पकाया जाना चाहिए। कच्चे सामान को सही तरीके से रखना जरूरी है।
- राशन और दूसरी खाद्य सामग्री को साफ जगह पर और जरूरत के मुताबिक बंद डिब्बों में रखान जरूरी।
- खाद्य सामग्री को सुरक्षित तापमान पर स्टोर करना जरूरी है।
- खाना बनाने में पीने योग्य यानी पोटेबल पानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। पानी को भी साफ और सुरक्षित तरीके से रखना जरूरी है।
- खाना बनाने वाले कर्मचारियों को साफ कपड़े या एप्रन पहनना चाहिए और जरूरत के मुताबिक सिर कने के लिए हेड कवर और दस्ताने इस्तेमाल करने चाहिए।
- खाना बनाने वाले कर्मचारियों की सेहत की समय-सयम पर जांच भी होनी चाहिए।
- कर्मचारियों को खाना बनाते समय खाना खाना, धूम्रपान करना, थूकना या नाक साफ करने जैसी गतिविधियां नहीं करनी चाहिए।
- खाना तैयार होने से लेकर उसे स्टोर करने और छात्रों तक पहुंचाने तक सुरक्षित तापमान बनाए रखने का ध्यान रखना चाहिए।
- खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और जहां जरूरी हो, पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त सप्लायर से सामान लेना चाहिए।
- नियमों में कर्मचारियों को फूड सेफ्टी और साफ-सफाई की ट्रेनिंग देने पर जोर दिया गया है, ताकि खाने से होने वाली बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।
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