IIT Medical Engineers Course | IIT Madras, Kharagpur, Kanpur Plan

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34 मिनट पहलेलेखक: सृष्टि तिवारी

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एक हॉस्पिटल में पेशेंट का CT स्कैन चल रहा है, और रिपोर्ट में कुछ हिस्सा ब्लर आया है। डॉक्टर को समझ नहीं आ रहा है कि क्या वो ब्‍लर हिस्‍सा मशीन की गड़बड़ी की वजह से है, वहीं मशीन टेक्‍नीशियन को नहीं पता कि क्‍या ये मरीज की किसी बीमारी का संकेत। ऐसे में एक ऐसे प्रोफेशनल की जरूरत है जो मेडिकल और टेक्नोलॉजी दोनों से जुड़ी समझ रखता हो।

IIT मद्रास, IIT खड़गपुर और IIT कानपुर इस मेडिकल एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए काम कर रहे हैं।IITs का कहना है कि इनका लक्ष्य ऐसे टेक्निकल एक्सपर्ट तैयार करना है, जो मशीनों और मरीज दोनों को समझ सकें।

सीधी बात ये है कि डॉक्टर शरीर के बारे में जानते हैं और इंजीनियर मशीनों के बारे में। किसी हॉस्पिटल में ऐसी किसी भी यूनिट में मौजूद किसी भी व्यक्ति को दोनों चीजों की ट्रेनिंग नहीं मिली होती है।

यही वजह है कि देश के 3 IITs मेडिकल कॉलेजेस बना रहे हैं।

IIT मद्रास ने डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी शुरू किया

IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामकोटि के मुताबिक, IIT मद्रास मेडिकल साइंसेज का नया स्कूल शुरू करने जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना है।

IIT मद्रास बीएस इन मेडिकल साइंस एंड इंजीनियरिंग प्रोग्राम भी शामिल है। मैथमेटिकल मॉडलिंग इन फिजीकोलॉजी, क्वांटिटेटिव ह्यूमन फिजियॉलॉजी, इन्ट्रोडक्शन टू क्लीनिकल न्यूरोसाइंस और मेडिकल इमेजस जैसे कोर्स ऑफर करता है। जिसमें मानव शरीर के अंगों और सिस्टम (जैसे नर्व सिस्टम, स्केटल मसल और हार्ट सिस्टम) के कार्यों को समझने से जुड़े कोर्स हैं।

डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामाकोटी ‘किसी भी टेक्नोलॉजी संस्थान को एक मेडिकल स्कूल जरूर शुरू करना चाहिए। वरना, एक देश के तौर पर हम मेडिकल मार्केट में टिक नहीं पाएंगे।‘किसी भी टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट को मेडिकल स्कूल जरूर शुरू करना चाहिए। नहीं तो, एक देश के तौर पर हम मेडिकल मार्केट में टिक नहीं पाएंगे।’

IIT खड़गपुर ने मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग शुरू की

IIT खड़गपुर मेडिकल बिल्डिंग की शुरुआत करने वाला देश का पहला IIT है। खड़गपुर में स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी 2001 में शुरू हुआ था और इसका MMST प्रोग्राम खास तौर पर उन लोगों को इंजीनियरिंग और फिजिकल साइंसेज सिखाने के लिए बनाया गया था, जो पहले से ही डॉक्टर हैं।

IIT खड़गपुर ने अपने ऑन-कैंपस हॉस्पिटल, डॉ. बी. सी. रॉय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी बनाया है। इसके तहत मेडिकल पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स के लिए मंजूरी हासिल की है।

इंस्टीट्यूट को क्लीनिकल ट्रेनिंग, और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए 20 सीटों के साथ पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) कोर्स शुरू करने के लिए NMC से मंजूरी मिल चुकी है। खड़गपुर मेडिकल में PG कोर्स शुरू करने वाला देश का पहला IIT भी है।

इसमें मेडिकल इमेजिंग, मॉलिक्यूलर इमेजिंग और इमेज एनालिसिस, बायोमटेरियल्स और इम्प्लांट्स, बायोफिजिक्स, कैंसर का शुरुआती पता लगाना, इम्यूनो-टेक्नोलॉजी, क्लिनिकल बायोमार्कर की खोज की रिसर्च और प्रिवेंटिव एंड प्रमोटिव हेल्थ सिस्टम शामिल हैं।

इस स्कूल ने 2007 से 2016 तक मेडिकल इमेजिंग एंड इंफॉर्मेटिक्स में M.Tech प्रोग्राम (2 साल) चलाया।

IIT कानपुर का गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी

IIT कानपुर गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी सबसे पहले हायर और सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल डिग्री शुरू करेगा। इससे एडवांस मेडिसिन, मेडिकल रिसर्च और इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी को एक साथ लाया जा सकेगा।

सच तो ये है कि IITs को डॉक्टरों की जरूरत नहीं है। वे तीनों असल में एक अलग तरह के एक्सपर्ट की तलाश में हैं जिन्हें ‘फिजिशियन-इंजीनियर’ कहा जाता है। IITs को डॉक्टर्स की जरूरत क्यों है

आज एक डॉक्टर मेडिकल इमेजिंग, AI बेस्ड सिस्टम, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, बायो-सेंसर, रोबोटिक्स के बीच काम करता है। ऐसे इक्विपमेंट को बनाने वाले इंजीनियर अब पेशेंट को सिर्फ एक ‘दूर बैठा यूजर’ नहीं मान सकते।

IIT खड़गपुर के डायरेक्टर, प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती का तर्क है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग इन दोनों पेशों को अलग रखने का तरीका अब कारगर नहीं रह गया है। ‘तीस साल पहले, मेडिकल के ज्यादातर काम टेक्नोलॉजी की मदद से किए जा सकते थे। लेकिन आज, टेक्निकल डायग्नोज और ट्रीटमेंट दोनों ही एक दूसरे से जुड़े हैं।

प्रोफेसर चक्रवर्ती के मुताबिक, ‘पुराना मॉडल था, जिसमें मेडिकल सेक्टर एक समस्या की पहचान करता है और इंजीनियरिंग सेक्टर उसके लिए एक मशीन बना देता है लेकिन अब ये नाकाफी साबित हो रहा है।

दो प्रोफेशनल, जो किसी गलत चीज को बेहतर बनाने में लगे हैं। ‘हाइब्रिड सोच का फायदा ये नहीं है कि ये दो एक्सपर्ट की जगह ले लेती है। बल्कि, इसका फायदा ये है कि यह किसी बीमारी को बेहतर बनाने की कोशिश शुरू होने से पहले ही सही समस्या की पहचान कर लेती है।’

इसके साथ ही मेड टेक में आत्मनिर्भरता जरूरी है। भारत आज भी वेनटिलेटर, स्कैनर, लाइफ सपोर्ट, पेस मेकर सिस्टम विदेशों से आयात करता है। जब भारत टेक मेडिकल में एडवांस बन जाएगा तब हमारी निर्भरता कम हो जाएगी।

IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामाकोटी के मुताबिक इंस्टीट्यूट मेडिकल साइंसेज का एक स्कूल भी खोलेगा। जो भविष्य में अंडरग्रेजुएट MBBS, पोस्टग्रेजुएट MD और डॉक्टोरल PhD की डिग्री देगा।

MIT हरबर्ड एक दूसरे की क्लास ले सकते हैं

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT)इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है। MIT अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्टेट के कैम्ब्रिज शहर में स्थित दुनिया की प्राइवेट रिसर्च यूनिवर्सिटी है।

  • MIT मेडिकल टेक्नोलॉजी पर काम करता है, लेकिन MIT खुद एक मेडिकल कॉलेज की तरह MBBS की डिग्री नहीं देता है।
  • इसमें नई मेडिकल मशीनें, AI के आधार पर बीमारी की पहचान, मेडिकल इमेजिंग और ट्रीटमेंट की नई टेक्नोलॉजी विकसित करना है।
  • MIT में MBBS डॉक्टर्स को बीमारियों, मरीजों की जांच, इलाज और अस्पताल में क्लिनिकल ट्रेनिंग देना शामिल हैं।

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ग्राफिक्स- विपुल शर्मा

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