2 मिनट पहले
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भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट अब पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। BCCI ने ब्रोंको टेस्ट का बेस टाइम 6 मिनट से घटाकर 5 मिनट 15 सेकंड से 5 मिनट 20 सेकंड कर दिया है। यानी अब खिलाड़ियों को 1200 मीटर की दौड़ इस तय समय के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही 2 किलोमीटर दौड़ (2K टेस्ट) के लिए 9 से 10 मिनट की समय सीमा तय की गई है। पहले फिटनेस के लिए यॉ-यॉ टेस्ट का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब उसकी जगह ब्रोंको टेस्ट को प्राथमिक फिटनेस टेस्ट बना दिया गया है।
बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने खिलाड़ियों में लगातार बढ़ती इंजरी और गिरते फिटनेस स्टैंडर्ड को देखते हुए यह बदलाव किया है। BCCI ने टीम मैनेजमेंट और मेडिकल टीम के बीच बेहतर तालमेल के लिए नए बेस पैरामीटर्स (न्यूनतम मापदंड) भी तय किए हैं।
ब्रोंको टेस्ट क्या है?
ब्रोंको टेस्ट रग्बी खेल से जुड़ा हुआ है। इसमें खिलाड़ी को एक सेट में 20 मीटर अप-डाउन (आना-जाना), फिर 40 मीटर अप-डाउन और फिर 60 मीटर अप-डाउन की स्प्रिंट लगानी होती है। इस तरह एक सेट में 240 मीटर की दौड़ लगानी होती है। पूरे टेस्ट में इस तरह के पांच सेट होते हैं। यानी एक टेस्ट में खिलाड़ी को कुल 1200 मीटर दौड़ना होता है। सभी पांच सेट 6 मिनट के अंदर पूरे करने होते हैं।
सीनियर खिलाड़ियों को राहत देने पर सवाल, हर्षित और नितीश को भी मिली थी क्लियरेंस
BCCI सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक साल में फिटनेस टेस्ट के मानकों का सख्ती से पालन नहीं किया गया। कुछ सीनियर खिलाड़ियों को पास कराने के लिए अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य दिए गए। वहीं टीम मैनेजमेंट की मांग पर CoE स्टाफ ने हर्षित राणा और नितीश कुमार रेड्डी को पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद क्लियरेंस दे दी थी।
इंग्लैंड दौरे के दौरान हर्षित राणा को वापस भेजा गया था। तब दावा किया गया था कि उनका वजन तय सीमा से अधिक है। टीम मैनेजमेंट के अनुसार उनका वजन 97 किलोग्राम था। अब CoE ने उनका वजन 96 किलोग्राम से कम रखने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल उनका वजन 94 किलोग्राम है और अगले हफ्ते तक उन्हें फिट घोषित किया जा सकता है।
बार-बार इंजरी पर फिजियो से जवाब-तलब
खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने और इंग्लैंड के अनुकूल मौसम में भी क्रैम्प्स की शिकायतों के बाद BCCI सेक्रेटरी देवजीत सैकिया और टीम मैनेजमेंट ने टीम के फिजियो कमलेश जैन से जवाब-तलब किया है।
उन्हें साफ कहा गया है कि किसी भी खिलाड़ी के कद या स्टार स्टेटस की परवाह किए बिना फिटनेस में कमी दिखे तो उसकी तुरंत जानकारी दें। मैनेजमेंट का मानना है कि कई खिलाड़ियों की मैदान पर मोबिलिटी घटी है और लंबे समय तक बल्लेबाजी के दौरान सीनियर बल्लेबाजों को रनिंग बिटवीन द विकेट्स में परेशानी हो रही है।
बुमराह श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर, सिराज नए टेस्ट देखकर चौंके
CoE और टीम मैनेजमेंट के बीच तालमेल की कमी भी सामने आई है। बुमराह को 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज के पहले मैच तक फिट करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन CoE ऐसा नहीं कर सका।
वहीं सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले खिलाड़ियों को नए फिटनेस पैरामीटर्स की जानकारी भी देर से मिली। मोहम्मद सिराज जब श्रीलंका दौरे से पहले CoE पहुंचे तो अचानक ब्रोंको और 2K टेस्ट कराए जाने से हैरान रह गए। अब गैर-टेस्ट खिलाड़ियों को भी इन्हीं नए मानकों के अनुसार तैयारी करने के लिए कहा गया है।
ओवर-ट्रेनिंग से बढ़ रहा बर्नआउट का खतरा
2023 वनडे वर्ल्ड कप, 2024 टी20 वर्ल्ड कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारत का इंजरी मैनेजमेंट काफी प्रभावी रहा था। उस समय खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना फिटनेस बनाए रखने पर जोर दिया जाता था। यॉ-यॉ टेस्ट भी छह महीने में एक बार या इंजरी से वापसी के समय ही कराया जाता था।
अब CoE में खिलाड़ियों से बार-बार यॉ-यॉ, ब्रोंको और 2K टेस्ट कराए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजरी प्रिवेंशन पर फोकस करने के बजाय जरूरत से ज्यादा वर्कलोड देने से खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक रूप से थक सकते हैं, जिससे चोट का खतरा भी बढ़ सकता है
