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करीब 18 महीने पहले राजस्थान रॉयल्स में संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी की कहानी शुरू हुई थी। तब संजू टीम के कप्तान थे और 14 साल के वैभव ने उनके चोटिल होने के बाद IPL में कदम रखा था। वैभव ने तीसरे ही मैच में सेंचुरी जड़ दी। उनकी बल्लेबाजी इतनी शानदार रही कि सैमसन की वापसी के बाद भी वैभव ने ओपनिंग की और सैमसन खुद नंबर-3 पर उतर गए। तब यह रिश्ता कप्तान और युवा खिलाड़ी का था। अब दोनों की कहानी टीम इंडिया की ओपनिंग स्लॉट तक पहुंच चुकी है। 15 साल के वैभव ने IPL 2026 में ऑरेंज कैप जीती, सैमसन 2026 टी-20 वर्ल्ड कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे। दोनों के पास टीम को मैच जिताने की अपनी-अपनी वजह है। फर्क सिर्फ इतना है कि फिलहाल प्लेइंग-11 में एक ही जगह दोनों के लिए खुली है। अफगानिस्तान के खिलाफ पहले दो टी-20 में भारत ने सैमसन और अभिषेक शर्मा से ओपनिंग कराई, जबकि जिम्बाब्वे के खिलाफ पिछली सीरीज में प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे वैभव को बाहर बैठना पड़ा। दूसरे टी-20 में सैमसन ने 22 गेंद पर 57 रन की पारी खेलकर अपनी दावेदारी का जवाब बल्ले से दिया। कहानी शुरू हुई थी सैमसन की चोट से IPL 2025 में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान सैमसन चोट के कारण लंबे समय के लिए बाहर हुए। उस समय 14 साल के वैभव को टीम में मौका मिला। युवा बल्लेबाज ने मौके को तुरंत भुनाया। IPL के अपने तीसरे मैच में ही सेंचुरी लगा दी। इसके बाद राजस्थान के लिए सवाल यह नहीं रहा कि वैभव को टीम में रखा जाए या नहीं, बल्कि यह था कि उसे बल्लेबाजी में कहां उतारा जाए। सैमसन की वापसी के बाद भी वैभव ओपन करते रहे। सैमसन ने अपनी ओपनिंग पोजिशन वापस लेने के बजाय नंबर-3 पर बल्लेबाजी की। यही वह मोड़ था जहां दोनों के बीच क्रिकेट का रिश्ता सिर्फ सीनियर-जूनियर नहीं रहा। सैमसन ने एक तरह से वैभव को जगह बनाने का मौका दिया और वैभव ने अपने प्रदर्शन से उस भरोसे को सही साबित किया। फिर वैभव ने IPL में ऐसा खेला कि टीम इंडिया का दरवाजा खुल गया IPL 2026 वैभव के करियर का बड़ा मोड़ रहा। सिर्फ 15 साल की उम्र में उन्होंने 776 रन बनाए। उनका औसत 48.5 और स्ट्राइक रेट 237.3 रहा। इस प्रदर्शन के साथ वे टूर्नामेंट के ऑरेंज कैप विजेता बने। इसके बाद उन्हें भारतीय टी-20 सेटअप में तेजी से शामिल किया गया। सैमसन टी-20 वर्ल्ड कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट दूसरी तरफ सैमसन के लिए 2026 भी बेहद अहम रहा। टी-20 वर्ल्ड कप में उन्होंने शुरुआत में टीम से बाहर रहने के बाद वापसी की और टूर्नामेंट के निर्णायक मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया। सेमीफाइनल में उन्होंने नाबाद 97 और फाइनल में 89 रन बनाए। भारत ने खिताब जीता और सैमसन प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने। इंग्लैंड सीरीज ने पहली बार दोनों को आमने-सामने ला दिया टी-20 वर्ल्ड कप के बाद सैमसन की अगली कुछ पारियां उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं। आयरलैंड के खिलाफ उनके स्कोर 5 और 0 रहे, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ भी शुरुआत में वे नहीं चल पाए। इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने वैभव को मौका दिया। वैभव ने इंग्लैंड में अपने शुरुआती तीन टी-20 इंटरनेशनल में 14, 13 और 15 रन बनाए। यानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत उनके लिए भी आसान नहीं रही। लेकिन टीम ने उन्हें तुरंत खारिज नहीं किया। सैमसन अंतिम टी-20 के लिए वापस आए और 27 गेंदों पर 14 रन की पारी खेली। इसके बाद सैमसन को जिम्बाब्वे दौरे से आराम दिया गया और वैभव को लगातार मौके मिले। जिम्बाब्वे में वैभव प्लेयर ऑफ द सीरीज सैमसन की गैरमौजूदगी में वैभव ने जिम्बाब्वे सीरीज में अपनी अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजी का बेहतर रूप दिखाया। उन्होंने तीन पारियों में 151 रन बनाए और दो अर्धशतक लगाए। इसी प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। अब अफगानिस्तान सीरीज में जब भारत की टीम चुनी गई तो सवाल सामने था- वैभव को लगातार मौका दिया जाए या सैमसन को वापस लाया जाए। पहले टी-20 में टीम मैनेजमेंट ने सैमसन को चुना। पहले मैच में सैमसन सिर्फ 10 रन पर आउट अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी-20 में सैमसन को ओपनिंग की जिम्मेदारी मिली। लेकिन वे 8 गेंद पर 10 रन बनाकर आउट हो गए। दूसरी तरफ अभिषेक शर्मा ने 32 गेंद पर 82 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को जीत दिला दी। इससे वैभव को लेकर चर्चा और तेज हो गई। क्या अगले मैच में उन्हें वापस लाया जाएगा। लेकिन दूसरे टी-20 में भी सैमसन और अभिषेक ही ओपनिंग करने उतरे। इस बार सैमसन ने जवाब देने में ज्यादा समय नहीं लगाया। 22 गेंद, 57 रन बनाए। उन्होंने तेज शुरुआत की और भारत ने 160 रन का टारगेट महज 14.5 ओवर में हासिल कर लिया। भारत ने तीन मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वैभव की दावेदारी खत्म हो गई। बल्कि अब कहानी और दिलचस्प हो गई है। सैमसन खुद मानते हैं कि मुकाबला है, लेकिन टीम के अंदर नहीं। सैमसन का जवाब था कि बाहर से देखने वालों को यह प्रतिस्पर्धा लग सकती है, लेकिन टीम के अंदर खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं। प्राथमिकता भारत को मैच जिताना है। उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ी इस सोच के साथ नहीं रह सकता कि उसे मौका क्यों नहीं मिला और दूसरे खिलाड़ी को क्यों दिया गया। यह बयान उस रिश्ते को समझने के लिए अहम है जो सैमसन और वैभव के बीच पिछले 18 महीनों में बना है। आलोचना का असर होता है- सैमसन सैमसन ने चयन को लेकर होने वाले बाहरी शोर पर भी खुलकर बात की। उन्होंने मजाक में कहा कि वे कभी-कभी Wi-Fi बंद कर देते हैं ताकि बाहर की बातें न देखें। लेकिन कभी-कभी Wi-Fi फिर चालू हो जाता है और खिलाड़ियों के बारे में की जा रही टिप्पणियां सामने आ जाती हैं। सैमसन ने साफ कहा कि आलोचना का असर होता है। खिलाड़ी मशीन या रोबोट नहीं हैं। शुरुआत में उन्हें भी बुरा लगता था, लेकिन समय और अनुभव के साथ उन्होंने यह सीख लिया कि उस शोर को अपने खेल पर हावी नहीं होने देना है। सैमसन को वैभव के आने पर शिकायत नहीं सैमसन ने वैभव को लेकर भी काफी स्पष्ट बात कही। उनका कहना था कि जब 15 साल का खिलाड़ी 700-800 रन बना रहा हो और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा हो, तो उसका टीम में आना स्वाभाविक है।
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