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भारतीय क्रिकेट में तब ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है, जब दो अलग-अलग भारतीय टीमें एक ही समय पर दो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेंगी। 19 सितंबर से जापान में होने वाले एशियन गेम्स (24 सितंबर – 3 अक्टूबर, क्रिकेट इवेंट) और 27 सितंबर से शुरू हो रही भारत-वेस्टइंडीज घरेलू सीरीज (वनडे+टी20) की तारीखें आपस में टकरा रही हैं। इससे पहले 17 सितंबर से अफगानिस्तान के खिलाफ भी टी20 सीरीज है। वर्कलोड और रिकवरी को ध्यान में रखते हुए बीसीसीआई 37 खिलाड़ियों का एक टैलेंट पूल तैयार कर रहा है। इसका मकसद लॉस एंजिलिस ओलिंपिक 2028 की तैयारी भी है। खास बात यह है कि दोनों आयोजनों में खेलने वाली टीमों के मैचों को इंटरनेशनल टी-20 का दर्जा मिलेगा, यानी मैदान पर दोनों ‘ए’ टीमें होंगी, ‘बी’ नहीं। भास्कर एक्सप्लेनर सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की नई कैटेगरी आ सकती है- ‘टी20 स्पेशलिस्ट’ खिलाड़ियों का बड़ा पूल क्यों बन रहा? चार वजहें हैं। पहली- 300 दिन के बिजी शेड्यूल में चोट या खराब फॉर्म से निपटने के लिए तुरंत बैकअप तैयार रखना। दूसरी- एशियन गेम्स में पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ दमदार टीम उतारना। तीसरी- शीर्ष खिलाड़ियों को आराम देकर चोटों का जोखिम कम करना। चौथी- आईपीएल के जरिए भारत के पास 25-30 ऐसे खिलाड़ी पहले से तैयार हैं जो तुरंत इंटरनेशनल मैच खेल सकते हैं। दो टीमों के मॉडल से क्या-क्या चुनौतियां हैं? दो चुनौतियां हैं। पहली- यह तय करना कि किस खिलाड़ी को वेस्ट इंडीज सीरीज में भेजा जाए और किसे एशियन गेम्स में। दूसरी- दोहरा लीडशिप ग्रुप यानी दो अलग टीमों के लिए दो अलग कप्तान और मुख्य कोच नियुक्त करने होंगे। इनके लिए ड्रेसिंग रूम का माहौल बनाए रखना होगा। ब्रॉडकास्टिंग, कैलेंडर पर क्या असर होगा? लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में क्रिकेट शामिल होने के बाद फुटबॉल की तर्ज पर सालाना शेड्यूल बनाना होगा। ब्रॉडकास्टर्स एक ही समय पर अलग-अलग चैनलों पर दोनों टीमों के मैच दिखाकर विज्ञापनों और व्यूअरशिप से ज्यादा कमाई कर सकेंगे। क्या इससे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव आएगा? हां, टैलेंट पूल बड़ा होने से अनुबंधित खिलाड़ियों की संख्या 40 से 45 के पार जा सकती है। अभी यह संख्या 30 है। इसके साथ ही, तेज गेंदबाजों के विशेष कॉन्ट्रैक्ट की तर्ज पर ‘टी20 स्पेशलिस्ट कॉन्ट्रैक्ट’ की नई कैटेगरी शुरू की जा सकती है। फ्लैशबैक 1998: जब पहली बार दो हिस्सों में बंटी टीम सितंबर 1998 में भारत ने कुआलालंपुर कॉमनवेल्थ गेम्स और टोरंटो सहारा कप के लिए दो अलग टीमें उतारी थीं। एक टीम कॉमनवेल्थ गेम्स (मलेशिया) में अजय जडेजा की कप्तानी में उतरी थी, जिसमें सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले और वीवीएस लक्ष्मण जैसे सितारे थे। ये टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई। दूसरी टीम सहारा कप (कनाडा) में मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में खेली थी, जिसमें सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज थे। टीम को पाकिस्तान ने 5 मैचों की वनडे सीरीज में 4-1 से हराया। संभावित 37 यशस्वी, वैभव समेत ये खिलाड़ी होंगे पूल में बीते 26 साल में भारतीय क्रिकेट के पास संसाधन और मैच-रेडी टैलेंट बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। फिलहाल बीसीसीआई के 37 खिलाड़ियों के नए टैलेंट पूल में ये खिलाड़ी हो सकते हैं… यशस्वी जायसवाल, अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, इशान किशन, केएल राहुल, सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), प्रभसिमरन सिंह, हार्दिक पंड्या, रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, नीतीश कुमार रेड्डी, प्रसिद्ध कृष्णा, वरुण चक्रवर्ती, अनुकूल रॉय, आयुष बदौनी, हर्ष दुबे, ध्रुव जुरेल, खलील अहमद, ऋतुराज गायकवाड़, रवि बिश्नोई, मयंक यादव, प्रिंस यादव, शाहबाज अहमद, सूर्यांश शेड़गे, मोहम्मद सिराज, शिवम दुबे, विप्रज निगम, हर्षित राणा, यश ठाकुर, वॉशिंगटन सुंदर।
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