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झज्जर के रहने वाले ओलिंपियन पहलवान दीपक पूनिया कल, 3 फरवरी को विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं। आज झज्जर शहर के धनखड़ फार्म हाउस में लग्न टीके (तिलक) का कार्यक्रम रखा गया है। दीपक के पिता सुभाषा पूनिया ने बताया कि आज लंच का प्रोग्राम है, जिसमें 500 लीटर देसी घी से खाना तैयार किया जा रहा है। प्रोग्राम में नेताओं के अलावा पहलवान भी पहुंचेंगे। दीपक पूनिया सेना में सूबेदार हैं। वह अपने पिता के दोस्त की बेटी शिवानी के साथ सात फेरे लेंगे। दीपक और शिवानी की 28 सितंबर 2025 को सगाई हुई थी। इसमें सिर्फ परिवार और करीबी लोग ही शामिल हुए। शिवानी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रही हैं, उनका IAS अफसर बनने का सपना है। शिवानी के पिता प्रॉपर्टी डीलर, अखाड़े में हुई जान-पहचान दीपक के पिता सुभाष पूनिया ने बताया कि शिवानी के पिता अनूप सिंह प्रॉपर्टी का काम करते हैं। जब दीपक अखाड़े में प्रैक्टिस करने जाता था, वहीं अनूप सिंह से मुलाकात हुई। कई बार मुलाकातें हई और 2020 में दोस्ती हो गई। जब बेटे के लिए रिश्ते आने लगे तो मैंने अनूप से कहा कि अपना बेटा है, आपकी बेटी है, क्यों न दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल लें। अनूप ने तुरंत हां कर दी। शिवानी MA-बीएड, आगे भी तैयारी कर रही शिवानी ने रोहतक के जाट कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स से MA किया है। इसके अलावा उन्होंने बीएड की। अब एमएड की तैयारी है। साथ ही UPSC की भी तैयारी कर रही हैं। सुभाष का कहना है कि शिवानी हमारी बहू ही नहीं बेटी जैसी है, वो जितना चाहे पढ़े। शिवानी बोलीं- दोनों परिवारों की रजामंदी से हुआ रिश्ता
रिंग सेरेमनी के बाद एक इंटरव्यू में शिवानी ने बताया था कि मेरा खेलों से कोई नाता नहीं रहा है। मैं शुरू से ही पढ़ाई में ध्यान रखती आई हूं। अब मेरा लक्ष्य IAS अफसर बनने का है। इसके लिए सेल्फ स्टडी कर रही हूं। मेरे पापा दीपक के पिता के साथ 5-6 साल से साथ में काम कर रहे हैं। दोनों परिवारों की रजामंदी से यह रिश्ता हुआ। अब पहलवान दीपक पूनिया के बारे में जानिए…. केतली पहलवान के नाम से मशहूर दीपक पूनिया का जन्म 19 मई, 1999 को झज्जर जिले के छारा गांव में हुआ। बचपन से ही कुश्ती उनके खून में रही, क्योंकि उनके पिता सुभाष भी स्थानीय स्तर पर पहलवान रहे। दीपक को महज 5 साल की उम्र में अखाड़े में दाखिल कराया। इसी दौरान उन्हें गांव में “केतली पहलवान” का उपनाम मिला, क्योंकि उन्होंने एक बार दूध पीते-पीते पूरी केतली (बर्तन) ही खाली कर दी थी। बचपन के दंगल मुकाबलों से लेकर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम तक दीपक का सफर यादगार रहा। टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल से चूके टोक्यो ओलिंपिक 2021 में दीपक ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में मामूली अंतर से हारकर पांचवें स्थान पर रहे। यह हार उनके लिए भावनात्मक रही, क्योंकि कुछ ही महीने पहले उन्होंने अपनी मां को खो दिया था और वे पदक उन्हें समर्पित करना चाहते थे। मगर, इस हार ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। एक साल बाद 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड अधिकारी सूबेदार दीपक पूनिया फ्रीस्टाइल पहलवान हैं, वह भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) हैं, और 86 किलोग्राम भार वर्ग में खेलते हैं। उन्होंने 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था। 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड जीता। 2022 की एशियाई खेलों में भी सिल्वर मेडल जीता। शादी के लिए PWL को छोड़ा
पिता सुभाष पूनिया ने बताया कि दीपक को प्रो रेसलिंग लीग (PWL) में महाराष्ट्र की टीम में शामिल किया गया। दीपक पूनिया को ग्रेड ए के पहलवानों में शामिल किया गया और बेस प्राइस 12 लाख रुपए रखा गया था। हालांकि, अपनी शादी के कारण दीपक ने PWL नहीं खेला।
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