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पीढ़ियों से, फुटबॉल ने दुनिया भर में अपनी सादगी और जुनून के दम पर खुद को स्थापित किया है। यह हमेशा से महज 90 मिनट का एक सीधा-सादा खेल रहा है, जिसकी पहचान स्टेडियम में गूंजती दर्शकों की दहाड़ और अपनी टीम के प्रति गहरी वफादारी से रही है। फुटबॉल एक ऐसा खेल है, जो युद्धों को रोकने और राष्ट्रों को एकजुट करने की ताकत रखता है। लेकिन, इस बार का फीफा वर्ल्ड कप अमेरिकी ‘मनोरंजन पूंजीवाद’ के साये में आयोजित हो रहा है। इस वजह से यह खेल शायद अब तक के अपने सबसे बड़े और अभूतपूर्व सांस्कृतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका अब केवल फुटबॉल की मेजबानी नहीं कर रहा है। वह इसे पूरी तरह से एक नए हॉलीवुड पैकेज में ढालकर दुनिया के सामने पेश कर रहा है। वीआईपी फैन एक्सपीरियंस और कॉरपोरेट-थीम वाले फैन फेस्टिवल से लेकर मशहूर हस्तियों के हाफटाइम शो और हॉलीवुड-शैली की ब्रांडिंग तक, अमेरिका ने फुटबॉल को एक ‘लार्जर दैन लाइफ’ के एंटरटेनमेंट पैकेज में बदल दिया है। इससे यह दुनिया के सबसे प्रिय पारंपरिक खेल के बजाय अमेरिका के प्रतिष्ठित ‘सुपर बाउल’, ‘डिज्नीलैंड’ या किसी भव्य संगीत पुरस्कार समारोह जैसा अधिक दिखने लगा है। पहली बार मल्टी-सिटी काउंटडाउन कॉन्सर्ट आयोजित किया जा रहा है। केवल एक ओपनिंग समारोह के बजाय अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में सिंक किए गए तीन अलग-अलग समारोह होंगे। इसके अलावा कई जगहों पर मेगा-कॉन्सर्ट भी होंगे, जिनमें ग्लोबल स्टार्स परफॉर्म करेंगे। इन बदलावों ने वर्ल्ड कप जैसे पारंपरिक फुटबॉल टूर्नामेंट के अनुभव को पूरी तरह से एक ग्लोबल एंटरटेनमेंट इवेंट में बदल दिया है। हाफटाइम के दौरान कॉन्सर्ट; शकीरा, मैडोना और बीटीएस की परफॉर्मेंस – पारंपरिक रूप से फुटबॉल में 45 मिनट के बाद 15 मिनट का हाफटाइम ब्रेक खिलाड़ियों के रेस्ट और कोच की रणनीतियों के लिए होता है। लेकिन अमेरिका इसे एक मिनी-कॉन्सर्ट में बदल रहा है। – पहली बार फाइनल में अमेरिकी खेल सुपर बाउल की तर्ज पर एक भव्य हाफटाइम शो आयोजित किया जाएगा। इस शो को मशहूर बैंड कोल्डप्ले के क्रिस मार्टिन द्वारा क्यूरेट किया जा रहा है। इसमें शकीरा, मैडोना, बीटीएस जैसे ग्लोबल स्टार्स परफॉर्म करेंगे। – फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इस आयोजन को एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा है कि यह दुनिया के बड़े मंच पर संगीत और फुटबॉल को एकजुट करेगा। – यह हाफटाइम तमाशा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। यह अमेरिका में हाल ही में आयोजित फीफा क्लब वर्ल्ड कप के दौरान किए गए एक सफल प्रयोग के बाद हो रहा है। क्लब वर्ल्ड कप के हाफटाइम में जे बाल्विन, दोजा कैट, टेम्स और कोल्डप्ले जैसे कलाकारों ने परफॉर्म किया था। एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम- पर्दे के पीछे की कहानियां दिखाने के लिए ओटीटी से डील – एनएफएल के पूर्व कार्यकारी और स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड व बिजनेस ऑफ स्पोर्ट्स पॉडकास्ट के स्पोर्ट्स बिजनेस एनालिस्ट एंड्रयू ब्रांट का कहना है कि यह अब सिर्फ फुटबॉल नहीं रह गया है। यह एक मल्टीमीडिया एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम है। अमेरिका खेल को केवल स्टेडियम तक सीमित नहीं रख रहा है। इस इकोसिस्टम में कई चीजें शामिल हैं, जैसे कि पर्दे के पीछे की कहानियां दिखाने वाली ‘डॉक्यूमेंट्रीज’ (नेटफ्लिक्स या अमेजन प्राइम पर) के भारी भरकम सौदे। – मोबाइल ऐप्स, फैंटेसी फुटबॉल, जहां प्रशंसक हर मैच और हर गोल पर सट्टा या पॉइंट्स लगा सकते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया एंगेजमेंट, जिसमें केवल मैच का प्रसारण नहीं, बल्कि स्टेडियम के भीतर बैठे दर्शकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लाइव रिएक्शन के जरिए डिजिटल विज्ञापन रेवेन्यू कमाना। एक्सपो जैसे हुए फैन जोन, इनका मकसद जेब से पैसा खर्च करवाना फैन जोन में फैंस से ज्यादा ब्रांड प्रमोटर्स
– पारंपरिक रूप से, यूरोप और लैटिन अमेरिका में फीफा फैन जोन आम फैंस के लिए डिजाइन किए जाते थे। वहां प्रशंसक एक साथ ड्रम बजाते, बीयर पीते और अपनी टीम के गीत गाते थे। लेकिन कई प्रशंसकों और आलोचकों का तर्क है कि इस बार ये फैन जोन कॉरपोरेट मनोरंजन पार्क और ब्रांडेड एक्सपो जैसे होते जा रहे हैं। लग्जरी हॉस्पिटैलिटी लाउंज और स्पॉन्सर एक्टिवेशन टेंट हैं, जहां असली फैंस से ज्यादा ब्रांड प्रमोटर्स होते हैं।
– ‘इन्फ्लुएंसर जोन’, जहां केवल ज्यादा फॉलोअर्स वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स को प्रवेश मिलता है। – एआई-संचालित फैन एंगेजमेंट बूथ और एलईडी स्क्रीन उत्साह को खत्म कर मशीन-आधारित अनुभव देते हैं। कई जगह सिर्फ वीआईपी लोगों को वरीयता अर्जेंटीना के एक समर्थक ने कहा, ‘इन फैन जोन में फुटबॉल फैन की तरह महसूस नहीं होता। ये ब्रांडेड एक्सपो जैसे हैं। मेरे देश में, स्टेडियम का माहौल वहां के लोगों का होता है। वहां ड्रम, देशों के झंडे, उनके एंथम सुनाई देते हैं, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं। अमेरिका में तो ऐसा लग रहा है कि हर चीज पहले से तय की गई है। आपको कब खुश होना है, यह बताने के लिए स्पीकर से तेज संगीत बजाया जाता है। यदि आप बहुत देर तक खड़े रहते हैं तो सुरक्षाकर्मी आपको बैठने के लिए कहते हैं। बैठने की जगहें भी वीआईपी टिकट धारकों या क्रेडिट कार्ड ट्रायल वालों तक सीमित हैं। हर कोना आपकी जेब से डॉलर निकालने के लिए डिजाइन किया गया है।’ टिकट के प्रीमियम पैकेज, मांग के अनुसार बदलते दाम – व्यावसायीकरण फुटबॉल में हमेशा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका इसे एक नए स्तर पर ले जा रहा है। अमेरिका में स्ट्रीमिंग पार्टनरशिप व ‘डायनामिक टिकट प्राइसिंग’ (मांग के अनुसार टिकट के दाम खुद-ब-खुद बढ़ना) मॉडल का आक्रामक रूप से इस्तेमाल किया गया। – विश्लेषकों का कहना है कि वर्ल्ड कप को अब खेल प्रतियोगिता के बजाय ‘ग्लोबल एंटरटेनमेंट फ्रेंचाइजी’ की तरह देखा जा रहा है। मैसाचुसेट्स में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. विक्टर मैथेसन का कहना है, ‘यहां हर चीज टेलीविजन दर्शकों, प्रीमियम उपभोक्ताओं और विज्ञापनदाताओं के मुताबिक की जा रही है। फीफा को प्रसारण, प्रायोजन, हॉस्पिटैलिटी पैकेज, पर्यटन से अरबों डॉलर के राजस्व की उम्मीद है। अब टिकट केवल मैच देखने के लिए नहीं हैं। एक्सक्लूसिव व्यूइंग डेक, लग्जरी डाइनिंग, कलाकारों से मिलने का एक्सेस, प्राइवेट बार और फास्ट-ट्रैक एंट्री सिस्टम के नाम पर लाखों डॉलर के प्रीमियम पैकेज बेचे जा रहे हैं।’ कई सेलेब्रिटी को बनाया ब्रांड एंबेसडर, दूसरे खेलों के स्टार्स से कराया जा रहा है फुटबॉल का प्रचार – फुटबॉल का यह अमेरिकीकरण टूर्नामेंट की सेलिब्रिटी संस्कृति में सबसे अधिक दिखाई देता है। पारंपरिक वर्ल्ड कप आयोजनों के विपरीत, टूर्नामेंट को अब सेलिब्रिटी ब्रांड एंबेसडर और क्रॉसओवर एंटरटेनमेंट स्टार्स के माध्यम से प्रचारित किया जा रहा है। – दिग्गज बास्केटबॉलर लेब्रन जेम्स, शेक्विल ओ’नील, अमेरिकन फुटबॉल के स्टार टॉम ब्रेडी, सोशलाइट किम कार्दशियन और एक्टर ड्वेन जॉनसन (द रॉक) जैसी मशहूर हस्तियां फुटबॉल के प्रचार अभियानों से जुड़ी हैं। इनका उद्देश्य उन युवा दर्शकों और अमेरिकी लोगों को आकर्षित करना है जो फुटबॉल की पारंपरिक संस्कृति से अपरिचित हैं। – अमेरिका ने एनएफएल, एनबीए और एमएलबी द्वारा नियंत्रित बाजार में फुटबॉल को व्यावसायिक रूप से हावी बनाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। लेकिन अब, अमेरिकी आयोजक फुटबॉल को ही अमेरिका के अनुकूल बनाते हुए प्रतीत हो रहे हैं। – यूसी बर्कले में प्रख्यात समाजशास्त्री और प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. हैरी एडवर्ड्स ने कहा, ‘अमेरिकी खेल संस्कृति तमाशे के इर्द-गिर्द बनी है। खेल तो इसका केवल एक हिस्सा है। इवेंट अपने आप में मुख्य प्रोडक्ट है।’ हो रही आलोचना, लोग कह रहे- हमें तमाशे और पॉप सितारों की जरूरत नहीं, फीफा ने किया बचाव – वर्ल्ड कप फाइनल में हाफटाइम शो और वीआईपी कल्चर की यूरोप और लैटिन अमेरिका के पारंपरिक फैंस ने आलोचना की है। उनका तर्क है कि फुटबॉल की तीव्रता और रोमांच उसके 90 मिनट के खेल में है, न कि किसी कॉरपोरेट सेलिब्रिटी तमाशे से। कई फैन ग्रुप कह रहे हैं कि हमें फाइनल के बीच में आतिशबाजी और पॉप सितारों की जरूरत नहीं है। फुटबॉल में पहले से ही पर्याप्त ड्रामा है। – दूसरी ओर, आयोजकों और फीफा का तर्क है कि डिजिटल युग, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के इस दौर में हावी रहने के लिए फुटबॉल का विकसित होना आवश्यक है। नई पीढ़ी के फैंस संगीत, स्टोरीटेलिंग, मशहूर हस्तियों, डिजिटल जुड़ाव और फुटबॉल सबको एक ही पैकेज में एक साथ चाहते हैं।
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