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The doctor won several medals in arm wrestling. | राजस्थान के डॉक्टर ने 50 की उम्र में उठाया 442Kg: बोले- स्टेरॉयड नहीं, देसी घी-दूध की बॉडी है; आर्म्स रेसलिंग में भी कई मेडल जीते – Bharatpur News

50 साल की उम्र में राजस्थान के एक डॉक्टर ने कमाल कर दिया। उन्होंने इस उम्र में 442 किलो की पावर लिफ्टिंग कर इतिहास रचा है।

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नवंबर में श्रीलंका में हुए वर्ल्ड पावर लिफ्टिंग के टूर्नामेंट में उन्होंने चाहने वालों को चौंका दिया। तीन अलग-अलग कैटेगरी में 3 गोल्ड मेडल जीते।

अभी तक डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल लेवल पर दर्जनों अवॉर्ड और मेडल जीत चुके डॉ. दीपक सिंह भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल (RBM) गवर्नमेंट हॉस्पिटल में टीबी वार्ड के विभागाध्यक्ष (एचओडी) हैं।

दिनभर मरीजों से घिरे रहते हैं। परिवार में पत्नी के अलावा 2 बच्चे हैं। सरकारी नौकरी और फैमिली के सभी दायित्व को पूरा करते हुए टाइम मैनेज किया और हर शौक को जिंदा रखा।

डॉ. दीपक का कहना है कि यह सक्सेस देसी खाने से हासिल की है। देसी घी और दूध से बनी बॉडी है, जिसमें सबकुछ वेज है। नॉनवेज बिल्कुल भी नहीं।

डिस्ट्रिक्ट से लेकर इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में जीते हुए मेडल्स के साथ डॉ. दीपक सिंह।

आर्मी में जाना सपना था, सिलेक्शन मेडिकल कॉलेज में हुआ डॉक्टर दीपक सिंह बताते हैं- मेरे पिता महेंद्र सिंह भी बच्चों के डॉक्टर रहे हैं। मां सुमन कुमारी गृहिणी हैं।

मेरा सपना था कि आर्मी में जाऊं। इसलिए शुरुआती पढ़ाई में NCC लिया था। साल 1995 में मेरा सिलेक्शन उदयपुर मेडिकल कॉलेज में हो गया। उसके बाद आर्मी में जाना सिर्फ सपना ही बनकर रह गया।

मेडिकल कॉलेज में सिलेक्शन के बाद गेम्स खेलना शुरू किया। सभी तरह के गेम्स में हिस्सा लिया और अलग पहचान बनने लगी।

डॉ. दीपक का कहना है कि धीरे- धीरे की गई वेट लिफ्टिंग की एक्सरसाइज से बॉडी बैलेंस्ड और फिट रहती है।

साल 2019 में पहली बार टूर्नामेंट में हिस्सा लिया दीपक बताते हैं- कॉलेज में पढ़ाई के दौरान धीरे-धीरे बॉडी बनाने का शौक लगा। इसके लिए जिम जॉइन किया। रेगुलर जिम करते हुए आर्म्स रेसलिंग करने लगा।

साल 2019 में पहली बार भरतपुर में हुए एक टूर्नामेंट में भाग लिया। इसमें डिस्ट्रिक्ट और स्टेट में गोल्ड मेडल जीता, जबकि नेशनल में ब्रॉन्ज मेडल मिला।

इससे हौसला बढ़ा और खेल जारी रखा। सरकारी नौकरी लग चुकी थी, लेकिन खेल और एक्सरसाइज नहीं छोड़ी। नौकरी के साथ खेलों में भी हिस्सा लेता रहा।

तस्वीर श्रीलंका में हुए इंटरनेशनल टूर्नामेंट की है। इसमें डॉ. दीपक ने कुल 442 किलोग्राम के साथ तीन कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीते थे।

4 साल का ब्रेक लेकर फिर वापसी की दीपक के अनुसार- साल 2019 में वर्ल्ड चैम्पियनशिप में जाने का मौका मिला, लेकिन कोरोना की वजह से जा नहीं पाए। साल 2020 में फिर से महाराष्ट्र के अमरावती में वर्ल्ड चैम्पियनशिप में जाने का मौका मिला। इसमें हिस्सा लिया और सिल्वर मेडल जीता।

साल 2020 के बाद गवर्नमेंट और फैमिली दोनों की जिम्मेदारी बढ़ गई। इसके कारण 4 साल के लिए खेल से ब्रेक लिया।

फिर वापसी करने का फैसला किया। साल 2024 में रायपुर (छत्तीसगढ़) में नेशनल टूर्नामेंट हुआ। उसमें गोल्ड मेडल जीता।

दीपक का कहना है- मैं चाहता था कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में एक बार जरूर हिस्सा लूं। इसलिए इस साल नवंबर में श्रीलंका में पावर लिफ्टिंग टूर्नामेंट में खेला, जहां अलग-अलग कैटेगरी में तीन गोल्ड मेडल हासिल कर देश का नाम रोशन किया।

श्रीलंका में भारत की ओर से 120 किलोग्राम भार वर्ग में उतरते हुए डॉ. दीपक सिंह ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए बेंच प्रेस में 122 किलोग्राम, स्क्वाट में 150 किलोग्राम और डेडलिफ्ट में 170 किलोग्राम वजन उठाया।

कुल 442 किलोग्राम भार के साथ उन्होंने तीन कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीते।

श्रीलंका में इंटरनेशनल टूर्नामेंट के दौरान डॉ. दीपक सिंह।

पिता को देखकर बेटा भी बना आर्म्स रेसलर डॉक्टर दीपक सिंह ने बताया- मेरी शादी साल 2006 में डॉक्टर वत्सना कसाना से हुई। वह भी गवर्नमेंट अधिकारी है। वर्तमान में वे एमएस गवर्नमेंट होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल हैं।

साल 2019 में मिसेज एशिया पेसिफिक और साल 2023 में इंडिया एलीट रह चुकी हैं। वह कई विज्ञापन भी कर चुकी हैं।

वत्सना गाजियाबाद की रहने वाली हैं। दीपक और वत्सना के 2 बच्चे हैं। इनमें बड़ा बेटा आदित्य NEET की तैयारी कर रहा है। साथ ही आर्म्स रेसलिंग और बॉडी बिल्डिंग भी करता है। बेटी 10वीं क्लास में पढ़ती है और ताईक्वांडो में ब्लैक बेल्ट है।

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