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23 जुलाई 2025 को मैनचेस्टर टेस्ट में इंग्लैंड के क्रिस वोक्स की यॉर्कर पंत के जूते पर लगी थी।
पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने IPL 2026 के बाद हैमस्ट्रिंग की चोट से उबरने के लिए बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में रिहैब किया था, लेकिन BCCI ने इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
यह दावा TOI ने CoE की सालाना रिपोर्ट के हवाले से किया है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच टीम इंडिया के 32 क्रिकेटर्स ने CoE में रिहैब किया है। इनमें BCCI के 20 सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले और 12 टार्गेटेड/इंडिया-A कैटेगरी खिलाड़ी हैं।
BCCI का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बेंगलुरु में स्थिति है। जहां खिलाड़ियों की रिहैब और ट्रेनिंग होती है। (फोटो BCCI)
पंत की चोट सबसे गंभीर थी, मांसपेशियों खिंचाव के मामले ज्यादा
खिलाड़ियों को हुई चोटों में इकलौता गंभीर मामला (इम्पैक्ट इंजरी) ऋषभ पंत का था। जुलाई 2025 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान उनके पैर की हड्डी टूट (फ्रैक्चर) गई थी।
वे रिकवरी के लिए CoE (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) पहुंचे थे। बाकी खिलाड़ियों को ज्यादातर मांसपेशियों में खिंचाव या तनाव (सॉफ्ट-टिश्यू इंजरी) जैसी समस्याएं ही हुई थीं।
23 जुलाई 2025 को मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट के दौरान चोटिल होने के बाद पंत को मैदान से बाहर जाना पड़ा था। बाद में उन्होंने अर्धशतक भी जड़ा था।
हार्दिक, राणा और रेड्डी ने 18 महीने में 4-4 महीने CoE में बिताए
हार्दिक पांड्या, हर्षित राणा और नीतिश कुमार रेड्डी ने पिछले 18 महीनों में कम से कम 4-4 महीने CoE में बिताए। रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों खिलाड़ी बार-बार चोटिल होने के कारण रिहैब के लिए पहुंचे। इनके अलावा जसप्रीत बुमराह, वाशिंगटन सुंदर और प्रसिद्ध कृष्णा भी बार-बार चोट से जूझने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं।
30 सितंबर तक भारतीय खिलाड़ियों की सूची में विराट कोहली, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव और हर्ष दुबे के नाम भी शामिल थे। हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि हर खिलाड़ी कितनी बार CoE पहुंचा।
हार्दिक ने इसी साल मार्च में टी-20 वर्ल्ड कप में आखिरी बार भारत के लिए खेला था।
IPL 2026 के बाद हर सीरीज में कम से कम दो खिलाड़ी चोटिल
IPL 2026 के बाद CoE में रिहैब कराने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी है। इसके बाद से हर सीरीज में कम से कम दो खिलाड़ियों के चोटिल होने की बात कही गई है।
CoE की स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन (SSM) टीम ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच महिला और पुरुष मिलाकर कुल 68 खिलाड़ियों की चोटों का इलाज और मैनेजमेंट किया।
2017 और 2021-22 में भी बढ़ी थीं चोटें, CoE का बजट ₹35 करोड़ बढ़ा
BCCI ने CoE के लिए 2026-27 का अनुमानित खर्च बढ़ाकर ₹127 करोड़ कर दिया है। जोकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹92 करोड़ था। बजट में करीब ₹35 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। CoE के खर्च में प्रशासनिक लागत, कोर्स और मैचों से जुड़े खर्च भी शामिल हैं।
2021-22 में कोविड-19 महामारी के दौरान बायो-बबल से बाहर आने के बाद सॉफ्ट-टिश्यू इंजरी के मामले बढ़े थे। उस समय दो से तीन महीने में स्थिति पर काबू पा लिया गया था।
2017 में स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच शंकर बासु के फिटनेस प्रोग्राम में बड़े बदलावों के बाद भी करीब तीन महीने तक कई खिलाड़ी चोटिल हुए थे।
मेडिकल प्रमुख का पद खाली, टीम इंडिया और CoE के बीच तालमेल की कमी
CoE में स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन (SSM) प्रमुख का पद मार्च 2025 में नितिन पटेल के इस्तीफे के बाद से खाली है। BCCI ने पिछले महीने इस पद के लिए विज्ञापन जारी किया था।
टीम इंडिया की SSM टीम और CoE की SSM टीम के बीच संवाद की कमी रही है। क्रिकेट हेड वीवीएस लक्ष्मण दोनों टीमों के बीच संवाद का माध्यम बने हुए हैं।
टीम इंडिया के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग (S&C) कोच एड्रियन ले रू ने जून 2025 में खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट में कुछ बदलावों का सुझाव दिया था।
CoE अपनी मौजूदा व्यवस्था से हटने को तैयार नहीं दिखा। CoE की SSM टीम के सदस्य चोटों की रोकथाम और मैनेजमेंट के तहत घरेलू टूर्नामेंटों में भी खिलाड़ियों की निगरानी करने पहुंचे थे।
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