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कोटा13 मिनट पहले
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एशियन गेम्स से नाम हटने के बाद दिव्यांशी चौधरी।
जापान में 19 सितंबर से शुरू हो रहे एशियन गेम्स के लिए भारतीय वुशु टीम की घोषणा 23 जून को कर दी गई थी। हालांकि, खेल मंत्रालय ने 11 सितंबर को एक अपडेट जारी किया जिसमें पहले से घोषित टीम की मेंबर दिव्यांशी चौधरी को बाहर कर नाओरेम रोशिबीना देवी को शामिल कर लिया गया है। इसके बाद दिव्यांशी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह रोते हुए कह रही हैं कि उन्हें गलत तरीके से टीम से बाहर कर दिया गया है।
राजस्थान के कोटा की रहने वाली दिव्यांशी ने करीब 9 मिनट के वीडियो में वुशु फेडरेशन पर कई सवाल उठाए हैं। वीडियो में दिव्यांशी रोती नजर आ रही हैं और माता-पिता से माफी मांगते हुए सुसाइड करने की बात भी कह रही हैं। दिव्यांशी ने कहा कि उन्हें एशियन गेम्स के लिए भारतीय जर्सी भी दे दी गई थी। लेकिन, आखिरी वक्त में उनका नाम काट दिया गया।
दिव्यांशी ने बताया की उन्हें एशियन गेम्स की जर्सी भी मिल गई थी। इसके बाद उनका नाम वुशू टीम से हटा दिया गया।
फेडरेशन कह रहा दिव्यांशी चोटिल हैं, दिव्यांशी ने खुद को फिट बताया
वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने इस बारे में पूछे जाने पर बताया कि दिव्यांशी चोटिल हैं। इसलिए उन्हें एशियन गेम्स में नहीं भेजा जा रहा है।
दिव्यांशी का कहना है कि एशियन गेम्स की तैयारी के लिए श्रीनगर में 10 दिन का कैंप हुआ था। इसी दौरान रोशीबीना के साथ मुकाबले में उनके कंधे में चोट लगी थी। चोट के कारण उन्होंने 4-5 दिन अभ्यास नहीं किया, लेकिन बाद में रिकवर होकर दोबारा खेला। इसके बाद वह इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भी गईं।
दिव्यांशी ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर को चोट दिखाई थी। डॉक्टर ने उन्हें टेपिंग के साथ खेलने की सलाह दी थी। वह यह भी कहती हैं कि उनकी MRI रिपोर्ट कोच और फेडरेशन के पास थी और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में उन्हें खेलने के लिए सक्षम बताया गया था।
नाओरेम रोशिबिना देवी ने एशियन गेम्स 2022 में सिल्वर मेडल जीता था। दिव्यांशी ने वूशु ट्रायल में उन्हीं को हराने की बात कही है।
पिता की रिपोर्ट अलग है, SAI की अपनी रिपोर्ट
जितेंद्र सिंह का कहना है दिव्यांशी जिस रिपोर्ट के आधार पर खुद को फिट बता रही हैं वह निजी डॉक्टर की है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की अलग मेडिकल रिपोर्ट है। इसके मुताबिक दिव्यांशी पूरी तरह फिट नहीं है। एशियन गेम्स में मेडल जीतना हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है, इसलिए अनफिट खिलाड़ी को नहीं भेजा सकता था।
‘मैं 18 साल की हूं, मुझे अपनी बात रखने का अधिकार है’
दिव्यांशी कहती हैं कि वह 18 साल की हो चुकी हैं और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है। उनका कहना है कि उनका नाम लेकर फैसला किया गया, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
वह कहती हैं कि उनका सपना भारत की जर्सी पहनकर एशियन गेम्स में खेलना और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना था।
10 साल की मेहनत, वजन 74 से 60 किलो किया
दिव्यांशी ने वीडियो में अपने संघर्ष का भी जिक्र किया है। वह बताती हैं कि उन्होंने करीब 10 साल इस सपने के लिए मेहनत की।
शुरुआती ट्रायल के दौरान उनका वजन करीब 74 किलो था। 60 किलो कैटेगरी में जगह बनाने के लिए उन्होंने लगभग 14 किलो वजन कम किया।
वह यह भी कहती हैं कि वह सामान्य परिवार से आती हैं और नहीं चाहतीं कि उनके माता-पिता उनके लिए हाईकोर्ट जाने में पैसे खर्च करें। उन्होंने लोगों से वीडियो देखने और शेयर करने की अपील की।
वीडियो के अंत में बोलीं- ‘मां-पापा माफ करना’
वीडियो के आखिरी हिस्से में दिव्यांशी की आवाज और भावुक हो जाती है। वह अपने माता-पिता से माफी मांगती हैं और कहती हैं कि उन्होंने कभी सुसाइड नहीं करना चाहा, लेकिन अब उन्हें ऐसा करना पड़ेगा।
इसके बाद वह अपने माता-पिता को याद करते हुए उन्हें प्यार करने की बात कहती हैं। आखिर में वह अपने खेल किट को दिखाती हैं, घर की छत की ओर कैमरा करती हैं और कहती हैं कि यह उनका आखिरी वीडियो है।
पिता बोले- चयन हुआ, किट मिली, सेरेमनी भी हुई
दिव्यांशी के पिता सुनील कुमार सुंडा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में हुए फाइनल चयन ट्रायल में उनकी बेटी पहले स्थान पर रही थी। उन्होंने फाइनल में चंडीगढ़ की खिलाड़ी को हराकर पहला स्थान हासिल किया।
पिता के मुताबिक इसके बाद दिव्यांशी करीब तीन महीने से SAI के भारतीय वुशू टीम कैंप में तैयारी कर रही थीं। उनका कहना है कि श्रीनगर कैंप में बेटी के कंधे में चोट लगी थी, लेकिन इसके बावजूद उसने चीन में इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेला और सिल्वर मेडल जीता।
सुनील कुमार का दावा है कि एशियन गेम्स के लिए बेटी का चयन हो चुका था। उसे किट मिली, सेरेमनी हुई और जापान के लिए अंतिम एंट्री भी कन्फर्म थी। इसके बाद अंदरूनी तौर पर बेटी का नाम हटाकर रोशीबीना देवी का नाम कर दिया गया।
ट्रायल सिलेक्शन में वूशु की नंबर-1 भारतीय खिलाड़ी को हराने के बाद दिव्यांशी का नाम एशियन गेम्स के लिए चुना गया था।
‘हर तीसरे दिन रोती थी बेटी’
पिता का कहना है कि चयन के बाद से ही उनकी बेटी इस मामले को लेकर परेशान थी। उनके मुताबिक वह खेल मंत्री, पीटी उषा और फेडरेशन से संपर्क कर रही थी।
उन्होंने बताया कि हर कुछ दिन में उसे रोशीबीना देवी के रवाना होने की जानकारी मिलती थी और इसके बाद वह रोने लगती थी। वीडियो सामने आने के बाद पिता ने बताया कि दिव्यांशी ने फोन बंद कर लिया था। वह उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कोच से बात की और तुरंत पटियाला के SAI कैंप जाने की तैयारी की। पिता ने कहा कि उन्हें चिंता थी कि बेटी के साथ कुछ गलत न हो जाए।
चोट जानबूझकर पहुंचाने के आरोप पर भी जवाब
दिव्यांशी और उनके पिता ने आरोप लगाया है कि श्रीनगर कैंप के दौरान रोशीबीना देवी ने जानबूझकर दिव्यांशी के कंधे में चोट पहुंचाई।
बाजवा ने इस आरोप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वुशु मार्शल आर्ट का खेल है और मुकाबले के दौरान चोट लग सकती है। उनके मुताबिक किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर चोट पहुंचाई, ऐसा कहना उचित नहीं है।
बाजवा ने यह भी कहा कि रोशीबीना देवी दो बार एशियन गेम्स की विजेता रह चुकी हैं और जिस खिलाड़ी का नाम लिया जा रहा है, उसका अपना अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
बाजवा ने उठाया 15 दिन की चोट पर सवाल
बाजवा ने कहा कि अगर दिव्यांशी करीब 15 दिन से चोटिल थीं तो उन्होंने शुरुआत में इसे बीमारी बताया। बाद में डॉक्टर की जांच में चोट की बात सामने आई।
उनके मुताबिक टीम के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि एशियन गेम्स में कौन खिलाड़ी पूरी तरह फिट होकर देश के लिए मेडल जीत सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर दोबारा मेडिकल जांच भी कराई जा सकती है।
जूनियर वर्ल्ड में ब्रॉन्ज, चीन में सिल्वर जीत चुकीं
दिव्यांशी 60 किलो वर्ग में सांदा खेलती हैं। वे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए मेडल जीत चुकी हैं। 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में उन्होंने 60 किलो वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
जून 2026 में चीन में हुए मेंबर वूशु टूर्नामेंट में भी उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। वह 2017 से कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में ट्रेनिंग कर रही हैं। राजस्थान के लिए उन्होंने अलग-अलग स्तरों पर 12 गोल्ड मेडल जीते हैं।
एशियन गेम्स 19 सितंबर से, वुशू के मुकाबले 20 से 24 सितंबर तक
20वें एशियन गेम्स का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक जापान के आइची-नागोया में होगा। वुशू के मुकाबले 20 से 24 सितंबर तक खेले जाएंगे। भारतीय वुशू टीम में कुल 7 खिलाड़ी हैं। 3 पुरुष और 4 महिला।
पुरुषों में सूरज सिंह मायांगलंबम, आर्यन और विक्रांत बलियान शामिल हैं, जबकि महिलाओं में न्येमान वांगसू, अपर्णा, रोशीबीना देवी और लैंगलेंटोम्बी देवी हंजाबम हैं।
2023 में भी 3 वुशू खिलाड़ी एशियन गेम्स से रह गए थे
2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में अरुणाचल प्रदेश के मेपुंग लामगू, न्येमान वांगसू और ओनिलु टेगा को चीन ने सामान्य वीजा नहीं दिया। तीनों खिलाड़ी भारतीय वुशू टीम का हिस्सा थे, लेकिन चीन में प्रवेश नहीं कर सके। भारत ने इसे भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताया और तत्कालीन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने चीन का दौरा भी रद्द कर दिया था।
