जिम में वेट उठाकर चेस्ट की एक्सरसाइज करते अमनदीप।
पंजाब के लुधियाना के रहने वाले अमनदीप सिंह पैरा गेम्स में एक उभरता सितारा हैं। एक सड़क हादसे में अपने दोनों पैर गंवाने के बाद भी अमनदीप नेशनल स्तर पर पैरा गेम्स में फाइनल तक अपनी जगह बना चुके हैं। अमनदीप के थाई के नीचे पैर नहीं है, मगर अपने हौसले और
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अमनदीप सिंह के 4 साल की उम्र में एक सड़क दुर्घटना में अपने दोनों पैर कट गए थे। बिना किसी कोचिंग के अमनदीप सिंह नेशनल तक का सफर कर चुके हैं। गेम्स के साथ अमनदीप जिम में भी खूब पसीना बहाते हैं।
दैनिक भास्कर एप से बातचीत में अमनदीप ने बताया कि शॉटपुट और वेटलिफ्टिंग के लिए जिम को काफी टाइम देते हैं। जिम में 140 किलोग्राम तक वेट उठाते हैं। जिम में एक्सरसाइज करने में भी अमन इतने परफेक्ट हो गए हैं कि जिम में नए लोगों को विभिन्न टेक्निकल जानकारी देते रहते हैं।

प्लास्टिक की बाल्टी में बैठकर एक्सरसाइज करते हुए अमनदीप सिंह।
जिम में आया तो लोग देखते थे ये क्या करेगा अमनदीप सिंह ने बताया कि वह गेम्स से बेहद प्यार करते हैं। करीब 2 साल पहले उन्होंने जिम ज्वाइन किया था। तब लोग कहते थे कि ये क्या जिम करेगा। कैसे एक्सरसाइज करेगा? अमनदीप ने कहा कि शुरुआत में तो कुछ परेशानी आई, लेकिन धीरे-धीरे ये चीजें रूटीन में शामिल हो गई। जिम स्टेशन पर खुद को एडजस्ट करना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए उन्होंने प्लास्टिक की बाल्टी तक का सहारा लिया।
अमनदीप ने हार्ड प्रैक्टिस के बाद बैंच प्रेस लगाने में भी महारत हासिल कर ली। अब वे आम लोगों से ज्यादा बैंच प्रेस लगाते हैं। कुछ दिन पहले उन्हें इंजरी भी हुई। अब उसका इलाज करवा रहे हैं। अमनदीप ने कहा कि उनका टारगेट पैरालिंपिक में इंडिया के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।

अमनदीप सिंह ने कहा- पैरालिंपिक में इंडिया के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहते हैं।
अब पढ़िए एक्सीडेंट से लेकर गेम्स तक की कहानी…
- 1999 में दोनों पैर खो कट गए: अमनदीप सिंह का जन्म 1996 में गुरदासपुर में हुआ। 1999 में 4 साल की उम्र में एक ट्रक ने उनके दोनों पैरों कुचल दिए। इस दुर्घटना में अमन की जान तो बच गई, लेकिन डॉक्टरों को दोनों पैर काटने पड़ें।
- ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की: अमनदीप ने एक्सीडेंट के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की। संघर्ष को बारे में उन्होंने कहा कि पैर ना होने पर उन्हें कहीं नौकरी भी नहीं मिली। इसके बाद 2016 में मौसी के पास लुधियाना आ गए। मौसी ने सपोर्ट किया और खुद के शोरूम काम दे दिया।
- मां की कैंसर से मौत हो गई: अमनदीप सिंह ने बताया कि 2020 में उनकी मां की कैंसर से मौत हो गई। मां की मौत के बाद मैं कुछ दिनों तक डिप्रेशन में चला गया। फिर गेम्स के माध्यम से डिप्रेशन दूर हुई।
- टीवी देखकर पैरालिंपिक का सपना देखा: अमनदीप ने आगे बताया कि टीवी पर पैरालिंपिक गेम्स देखकर मन में गेम्स खेलने का आइडिया आया था। इसके बाद 2020 में शूटिंग की प्रेक्टिस शुरू की। शूटिंग में मूमेंट ज्यादा होने के कारण इसमें उन्हें काफी परेशानी हुई। इसके बाद 2022 में शॉटपुट खेलना शुरू किया।
- नेशनल स्तर पर टॉप 5 में बनाई जगह: अमनदीप ने बताया कि उन्होंने 2023 पैरा नेशनल गेम्स हिस्सा लिया। इसमें टॉप 5 में जगह बनाई। इसके बाद 2024 में खेलो इंडिया मूवमेंट में हिस्सा लिया और फाइनल तक पहुंचे। शॉटपुट में अब इंटरनेशनल लेवल पर पदक जीतने के लिए प्रेक्टिस कर रहा हूं।

जिम में गेम्स के लिए वर्कआउट करते अमनदीप सिंह।
वेट लिफ्टिंग और शॉटपुट के लिए कर रहे जिम अमनदीप सिंह कहते हैं कि शॉटपुट के लिए भुजाओं का मजबूत होना जरूरी हे। भुजाएं मजबूत करने के लिए ही उन्होंने जिम करना शुरू किया। अभी मौसी की मोबाइल शॉप में काम करते हैं। दुकान के काम से समय निकालकर प्रेक्टिस भी करते हैं। बहनों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रहे अमनदीप ने बताया कि उसकी दो बहनें हैं। उनकी पढ़ाई और शादी का जिम्मा भी उन्हें ही उठाना है। एक बहन नर्सिंग की पढ़ाई की है, दूसरी अभी अभी ग्रेजुएशन कर रही है। उनकी पढ़ाई के बाद शादी का जिम्मा भी उन्हीं के ऊपर है।