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Nicola Olieslagers wins silver at the 2026 Commonwealth Games

न्यूयॉर्क27 मिनट पहले

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ग्लोबल स्टेज पर लगातार सातवीं बार पोडियम फिनिश करते हुए निकोला ने ग्लासगो में सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया।- प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar

ग्लोबल स्टेज पर लगातार सातवीं बार पोडियम फिनिश करते हुए निकोला ने ग्लासगो में सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया।- प्रतीकात्मक फोटो

ऑस्ट्रेलिया की निकोला ओलिस्लेगर्स अगर वर्ल्ड-क्लास हाई जंपर नहीं होतीं, तो शायद एक बेहतरीन वक्ता या विश्लेषक होतीं। किसी भी प्रतियोगिता के बाद जब वह मीडिया से बात करती हैं, तो अपनी परफॉर्मेंस का बेहद बारीकी से विश्लेषण करती हैं। उनका मानना है कि दबाव यह उजागर कर देता है कि आपके भीतर असल में क्या चल रहा है। तीन बार की वर्ल्ड चैम्पियन और दो बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट निकोला की सफलता का सबसे बड़ा राज एक छोटी-सी नोटबुक है।

जब भी निकोला कोई जंप लगाती हैं, तो अपनी डायरी निकालकर उसे 10 में से नंबर देती हैं। वह अपनी हर छलांग को नौ अलग-अलग तकनीकी पैमानों पर परखती हैं, जैसे बार की तरफ दौड़ने की रफ्तार, टेक-ऑफ के समय शरीर का झुकाव और जंपिंग टेक्निक। हर नंबर के नीचे वे अगली छलांग के लिए एक छोटा-सा निर्देश भी लिखती हैं। निकोला का मानना है कि डायरी में खराब स्कोर का सीधा मतलब है कि अभी और मेहनत करनी है। ज्यूरिख में डायमंड लीग फाइनल्स में जब उन्होंने 2.02 मीटर और 2.04 मीटर की ऊंचाई पार की, तो उन्होंने खुद को 10 में से 10 अंक दिए थे। वे कहती हैं कि उनके लिए एक परफेक्ट 10/10 वाली छलांग किसी पर्सनल रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा अहम है, क्योंकि इसका मतलब है कि उन्होंने अपनी टेक्निक को पूरी तरह से साध लिया है।

इसी रणनीति की बदौलत निकोला ने ज्यूरिख में 2.04 मीटर की छलांग लगाकर ओलिंपिक चैम्पियन यारोस्लावा महुचिख को भी मात दी थी। 6.1 फीट लंबी निकोला हाई जंप को पूरी तरह से तकनीकी खेल मानती हैं। हालांकि, 29 साल की यह एथलीट अपने अभ्यास के दौरान बहुत ज्यादा जंप नहीं करती हैं। वे साल के कुछ ही महीने जंपिंग का अभ्यास करती हैं। बाकी समय जिम में अपनी ताकत बढ़ाने और स्प्रिंटिंग पर ध्यान देती हैं। सप्ताह में सिर्फ एक दिन वह जंप की प्रैक्टिस करती हैं और उस सेशन में भी मुश्किल से 10 छलांगें ही लगाती हैं।

ग्लोबल स्टेज पर लगातार 7वां पोडियम फिनिश

ग्लोबल स्टेज पर लगातार सातवीं बार पोडियम फिनिश करते हुए निकोला ने ग्लासगो में सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। यहां उन्होंने 1.93 मीटर की छलांग लगाई और सिर्फ 3 सेंटीमीटर से गोल्ड जीतने से चूक गईं। यह मेडल खास है क्योंकि 2022 बर्मिंघम गेम्स में उन्हें पिंडली की चोट के कारण फाइनल से पहले नाम वापस लेना पड़ा था।

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