New Cadre Allocation Policy 2026 for IAS, IPS, IFoS Officers

38 मिनट पहले

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भारत सरकार ने UPSC कैडर अलॉटमेंट के लिए 2017 से चली आ रही ‘जोन सिस्टम’ की व्यवस्था को खत्म कर दिया है। इसकी जगह नई ‘कैडर एलोकेशन पॉलिसी 2026’ लागू कर दी गई है। इसके तहत अब ‘साइकिल सिस्टम’ के जरिए अफसरों के कैडर का बंटवारा होगा। ये पॉलिसी इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS), इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFoS) के लिए चयनित उम्‍मीदवारों पर लागू होगी।

जियोग्राफिकल ग्रुप्स को खत्‍म कर नए ग्रुप्‍स बनाए

UPSC ने अब तक सभी स्‍टेट और UTs के कुल 25 कैडर बनाए थे। इन्‍हें जियोग्राफिकली 5 जोन में बांटा गया था- नॉर्थ, वेस्ट, साउथ, सेंट्रल और ईस्ट। UPSC मेन्‍स क्लियर करने के बाद कैंडिडेट्स DAF II फॉर्म भरते थे जिसमें पहले जोन और फिर स्‍टेट प्रिफरेंस चुनने का मौका मिलता था। एक बार जिस स्‍टेट में ऑफिसर की नियुक्ति होती है, परमानेंट उसी स्टेट में काम करना होता है। इसे ही कैडर कहते हैं।

नई नीति में सभी 25 कैडरों को वर्णानुक्रम यानी अल्फाबेटिकल ऑर्डर (A, B, C….Z) में अरेंज कर 4 ग्रुप्स में डिवाइड किया गया है:

  • ग्रुप-I: AGMUT (दिल्ली/केंद्र शासित प्रदेश), आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़
  • ग्रुप-II: गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश
  • ग्रुप-III: महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु
  • ग्रुप-IV: तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल

पुराने सिस्टम में मान लीजिए अगर कैंडिडेट ने नॉर्थ जोन के हरियाणा कैडर को प्रेफरेंस दिया। ऐसे में प्रॉबेबिलिटी रहती थी कि कैंडिडेट को अगर हरियाणा नहीं भी मिलता था तो राजस्थान या उत्तर प्रदेश मिल जाता था। लेकिन नए सिस्टम में एक जोन के भीतर अल्फाबेटिकली अरेंज स्टेट होते हैं। इसका मतलब H- हरियाणा, J-झारखंड और K- केरल एक जोन में होंगे। ऐसे में नियुक्ति हरियाणा के अलावा झारखंड, कर्नाटक और केरल भी मिल सकता है।

हर साल अलग ग्रुप से शुरू होगा कैडर एलोकेशन

पुरानी व्‍यवस्‍था में ज्‍यादातर टॉपर कैंडिडेट्स एक ही जोन चुनते थे जिससे कुछ जोन्‍स को मेरिटोरियस ऑफिसर नहीं मिल पाते थे। नई व्‍यवस्‍था में रोटेशन लागू होगा। यानी हर साल अलग ग्रुप से कैडर एलोकेशन शुरू होगा।

मान लीजिए, इस साल ग्रुप 1 के राज्यों से अफसरों की भर्ती शुरू हुई, तो अगले साल ग्रुप 2 के राज्यों से शुरू होगी। इससे फायदा ये होगा कि हर साल एक ही राज्य को सारे मेरिटोरियस अफसर नहीं मिलेंगे। सभी राज्यों को बराबर का मौका मिलेगा।

  • साल 1: ग्रुप-I → ग्रुप-II → ग्रुप-III → ग्रुप-IV के क्रम में।
  • साल 2: ग्रुप-I नीचे चला जाएगा और शुरुआत ग्रुप-II से होगी (II → III → IV → I)।
  • यह सुनिश्चित करता है कि हर साल एक ही राज्य (जैसे- उत्तर प्रदेश) को टॉप रैंकर्स न मिलें।

कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी तय करती है वैकेंसी

हर सर्विस के लिए उससे रिलेटेड कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी होती है। ये अथॉरिटी ही निर्धारित करती है कि किसी स्टेट या कैडर में कितनी वैकेंसी होंगी।

  • IAS के लिये DoPT (डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग)
  • IPS के लिये MHA (मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स),
  • IFoS के लिये MoEF&CC (मिनिस्ट्री ऑफ इन्वायर्नमेंट, फॉरेस्ट एड क्लाइमेट चेंज)

नोट: IFS यानी इंडियन फॉरेन सर्विस अलग होता है, उसके लिए राज्य कैडर नहीं होता। इसे MEA यानी मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स संभालता है और ये पॉलिसी IFS के लिए लागू नहीं होती।

‘कैटेगरी’ और ‘टेरिटोरियल’ वाइज होती है वैकेंसी

IAS के लिए वैकेंसी को दो स्तर पर डिवाइड की जाती है:

  • कैटेगरी वाइज: अनरिजर्व्ड (UR, EWS), SC, ST और OBC।
  • क्षेत्रीय या टेरिटोरियल: इनसाइडर (होम स्टेट) और आउटसाइडर (अदर स्टेट)

इनसाइडर की सीट आउटसाइडर से फिल की जा सकती हैं

इसके अलावा, अगर किसी साल किसी कैडर में इनसाइडर वैकेंसी को भरने के लिए योग्य उम्मीदवार (जो उस राज्य का हो और जिसने वहां काम करने की इच्छा जताई हो) उपलब्ध नहीं होता है, तो वह पद आउटसाइडर वैकेंसी में बदल दिया जाएगा। यह बदला हुआ पद उसी एग्जाम ईयर में भर लिया जाएगा और इसे अगले साल के लिए आगे (Carry forward) नहीं बढ़ाया जाएगा।

31 जनवरी तक राज्यों को वैकेंसी डिटेल्स देनी होंगी

वैकेंसी का यह बंटवारा एक सख्त समय सीमा के भीतर होता है ताकि ट्रांसपेरेंसी बनी रहे:

  • 1 जनवरी तक राज्यों को ‘कैडर गैप’ के आधार पर रिक्त पदों की गणना करनी होगी।
  • 31 जनवरी तक राज्य सरकारों को अपनी रिक्तियों की मांग भेजनी होगी, जिसके आधार पर इनसाइडर और आउटसाइडर पदों का ब्रेक-अप तैयार किया जाएगा।

प्रिलिम्स क्लियर करने वालों के कैडर प्रेफरेंस भरना होता है

कैंडिडेट्स को प्रीलिम्स क्लियर करने के बाद और मेन्स परीक्षा में शामिल होने के पहले डिटेल्ड एप्लिकेशन फॉर्म यानी DAF सब्मिट करना होता है। उसी में कैंडिडेट्स को कैडर चुनने होते हैं।

नई पॉलिसी से 25 ऑफिसर को मिल सकता है मनचाहा कैडर

एक्सपर्ट बताते हैं कि हर साल 180 IAS और 200 के करीब IPS लिए जाते हैं। इस नई पॉलिसी से शुरुआत के 25 को उनकी मर्जी का कैडर मिल सकता है। बाकी लोगों को रैंडमली असाइन होगा।

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