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Manisha Bhanwala Wins Gold | Womens World Wrestling Astana Final

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2 मिनट पहले

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मनीषा भानवाला वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप जीतने के बाद सेलिब्रेट करतीं हुईं।  - Dainik Bhaskar

मनीषा भानवाला वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप जीतने के बाद सेलिब्रेट करतीं हुईं।

मनीषा भानवाला विमेंस वर्ल्ड रेसलिंग जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उन्होंने शुक्रवार को कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 से हराकर गोल्ड जीत लिया।

29 साल की मनीषा वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में यह उपलब्धि हासिल की। वे एक समय 1-5 से पिछड़ रही थीं। लेकिन आखिरी तीन मिनट में सात पॉइंट हासिल कर 8-6 से जीत दर्ज कर ली।

39 साल बाद मिला पहला गोल्ड

  • महिला कुश्ती की पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप 1987 में हुई थी। 2012 में गीता फोगाट और बबीता फोगाट ने ब्रॉन्ज जीता। 2018 में पूजा ढांडा और 2019 में विनेश फोगाट ने भी ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
  • 2021 में अंशु मलिक ने पहली बार किसी भारतीय महिला पहलवान के तौर पर वर्ल्ड चैंपियनशिप का फाइनल खेला। उन्होंने सिल्वर जीता।
  • इस बार भी भारत को एक साथ दो गोल्ड जीतने के मौके मिले थे। 50 किलोग्राम में नीलम सिरोही और 76 किलोग्राम में काजल ढोचक फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन दोनों को सिल्वर से संतोष करना पड़ा।
  • इससे पहले सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए गोल्ड जीतने वाले एकमात्र पहलवान सुशील कुमार थे। उन्होंने 2010 में यह उपलब्धि हासिल की थी।

फिटनेस सुधारने के लिए गई थीं कैंप, कुश्ती ही करियर बन गई

मनीषा का जन्म हरियाणा में हुआ। 2013 में उनके पिता ने उन्हें फिटनेस सुधारने के लिए कुश्ती के ट्रेनिंग कैंप में भेजा। शुरुआत में मकसद शरीर को फिट बनाना था, लेकिन अभ्यास के दौरान मनीषा को समझ आया कि वह इस खेल में अच्छा कर सकती हैं।

धीरे-धीरे कुश्ती उनके लिए फिटनेस से आगे बढ़कर करियर बन गई। उनकी तैयारी में रोहतक का छोटूराम अखाड़ा और कोच मंदीप सिंह अहम रहे हैं। जापानी कोच कोसेई अकाइशी से तकनीकी पहलुओं पर काम करने का मौका भी मिला।

एशियन गेम्स में हार के बाद बदला वजन वर्ग

मनीषा के लिए 2026 का साल आसान नहीं रहा। एशियन गेम्स में उन्होंने 57 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया था। क्वार्टर फाइनल में उन्हें जापान की अकारी फुजिनामी से 0-3 से हार का सामना करना पड़ा। वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए उन्होंने 59 किलोग्राम वर्ग चुना। इससे पहले वह 62 किलोग्राम में भी खेल चुकी थीं।

फाइनल तक का सफर भी रहा दमदार

59 किलोग्राम वर्ग में मनीषा ने फाइनल तक पहुंचने के लिए लगातार तीन मुकाबले जीते। कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को उन्होंने पिनफॉल से हराया। क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखू को 6-0 से मात दी। इसके बाद सेमीफाइनल में मेजबान कजाकिस्तान की अल्टिन शागायेवा को 10-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई।

सेमीफाइनल में मनीषा ने पहले 10 पॉइंट की बढ़त बनाई और फिर विरोधी पहलवान को मैट पर चित कर दिया। कुश्ती में इसे पिनफॉल या फॉल कहते हैं। इस स्थिति में विरोधी पहलवान के दोनों कंधे मैट पर टिक जाते हैं और रेफरी मुकाबला रोक देता है। यानी पूरा समय खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ता।

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