नई दिल्ली6 मिनट पहले
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पूर्व भारतीय क्रिकेटर और दिग्गज कमेंटेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने BCCI के कमेंट्री पैनल से संन्यास का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि 23 साल के करियर में उन्हें टॉस और प्रेजेंटेशन जैसे अहम मौकों के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे वे निराश थे।
शिवरामकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा- ‘मैं BCCI के लिए कमेंट्री से संन्यास ले रहा हूं।’ पूर्व लेग स्पिनर ने लिखा कि नए कमेंटेटरों को मौके मिलते रहे, जबकि उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया।
शिवरामकृष्णन ने यह भी कहा कि उनके रिटायरमेंट के पीछे टीवी प्रोडक्शन से जुड़ी एक बड़ी कहानी है, जो जल्द सामने आएगी। एक यूजर द्वारा रंगभेद का मुद्दा उठाने पर उन्होंने इसे सही ठहराया, जिससे विवाद और गहरा गया है।
लिखा- मुझे टॉस और पुरस्कार वितरण में मौका नहीं मिला शिवरामकृष्णन ने कहा, ‘पिछले 23 वर्षों से मुझे टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह के लिए नहीं भेजा गया। जबकि नए लोग पिच रिपोर्ट, टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह के लिए भेजे जाते रहे। मुझे उस समय भी नहीं भेजा गया जब रवि शास्त्री कोचिंग कर रहे थे, तो इसका मतलब क्या हो सकता है।’
उन्होंने कहा, ‘BCCI के अधिकार रखने वाली कंपनी का क्या हाल होता है कोई भी इसका अंदाजा लगा सकता है। मेरा संन्यास लेना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन टीवी प्रोडक्शन की एक नई कहानी सामने आ रही है। जल्द ही आपके सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।’
यूजर के सवाल पर रंगभेद का खुलासा किया जब एक यूजर ने पूछा कि क्या उनकी त्वचा का रंग कोई मुद्दा है, तो शिवरामकृष्णन ने जवाब दिया, ‘आप सही हैं। रंगभेद।’ शिवरामकृष्णन को दो दशक से अधिक समय तक कमेंट्री बॉक्स के अंदर खुलकर अपने विचार व्यक्त करने के लिए जाना जाता रहा।
20 साल से ज्यादा का रहा कमेंट्री करियर
शिवरामकृष्णन 2000 से कमेंट्री कर रहे थे और अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते थे। वे ICC क्रिकेट कमेटी में खिलाड़ी प्रतिनिधि भी रह चुके हैं। 2 प्वॉइंट्स में क्रिकेट करियर…
- 1983 से 1986 तक भारत के लिए 9 टेस्ट और 16 वनडे खेले। 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ मैच में 12 विकेट लेकर सुर्खियों में आए।
- 1985 में ऑस्ट्रेलिया में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में अहम भूमिका निभाई। फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ गेंदबाजी से टीम को जीत दिलाने में योगदान।
कौन हैं शिवरामकृष्णन? 1980 के दशक की शुरुआत में 17 साल की उम्र में अपनी दमदार लेग-स्पिन गेंदों, गूगली और टॉप स्पिन से हलचल मचा दी थी। वे 1985 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित क्रिकेट वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने वाली भारतीय वनडे टीम का हिस्सा थे।
1997-98 में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम इंडिया टूर पर आई थी। तब सचिन तेंदुलकर ने शेन वॉर्न की चुनौती से निपटने के लिए शिवरामकृष्णन को बुलाया। शिवरामकृष्णन भले ही उनका क्रिकेट करियर लंबा नहीं चला लेकिन इसके बाद उन्होंने कमेंटेटर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
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