सोनीपत23 मिनट पहलेलेखक: राम सिंहमार
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जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले कुशल दलाल वीडियो काॅल पर बातचीत करते हुए।
जापान में चल रहे एशियन गेम्स में बुधवार का दिन भारतीय आर्चरी (तीरंदाजी) के इतिहास में सुनहरा पल रहा है। चार में 3 गोल्ड आर्चरी में आए। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले 21 वर्षीैय कुशल दलाल का नाम भी चमका, जिसने कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड पर अचूक निशाना लगाया।
एशियन गेम्स के इस ‘गोल्डन बॉय’ की यह कामयाबी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। कभी गांव के शुद्ध दूध-घी के चक्कर में इतना ओवरवेट हो गया था कि घरवालों को उसकी सेहत की फिक्र सताने लगी थी। फिटनेस सुधारने के लिए पिता ने पहलवान बनाने अखाड़े भेजा, तो मां को लगा पढ़ाई छूट जाएगी। फिर बॉक्सिंग में हाथ आजमाने रोहतक पहुंचे, तो नन्हे कुशल ने मासूमियत से कहा-
मां, मुझसे किसी को पंच नहीं मारा जाएगा, मैं किसी को चोट नहीं पहुंचा सकता।
दूसरों को नुकसान न पहुंचाने वाले इसी कोमल स्वभाव के लड़के ने जब तीरंदाजी जॉइन की तो निशाना सीधे एशियन गेम्स के गोल्ड पर लगा। एक रोचक बात यह भी कि कुशल की फैमिली काफी बड़ी है। परिवार में उसके 17 दादा और 25 चाचा है। कुशल इस सफलता में उनकी मां गीता ने अहम भूमिका निभाई। इस प्रेरणादायक सफर की पढ़िए दैनिक भास्कर की पूरी रिपोर्ट…
बुधवचार को आर्चरी में फाइनल जीतने के बाद कुशल अपने साथियों के साथ सेलिब्रेट करते हुए।
सोनीपत से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचने की कहानी…
- वजन बढ़ने के कारण रनिंग करने मैदान तक पहुंचा: गांव सिवानका निवासी मां गीता दलाल ने बताया कि जब बेटा कुशल आठवीं कक्षा में पढ़ रहा था, उस समय गांव में घी-दूध और अच्छा खान-पान मिलने के कारण उसका वजन काफी बढ़ गया था। वह अपनी कक्षा में सबसे ज्यादा हेल्दी नजर आता था। परिवार को उसकी सेहत की चिंता हुई तो माता-पिता उसे रोजाना मैदान पर एक्सरसाइज और रनिंग कराने ले जाने लगे। कुछ दिन बाद विचार आया कि जब रोज प्रैक्टिस कर ही रहा है तो किसी खेल से जोड़ना चाहिए।
- पहलवान बनाने के लिए दिल्ली अखाड़े में दाखिला लिए: कुशल के पिता संदीप दलाल को पहलवानी काफी पसंद थी। उन्होंने बेटे को पहलवान बनाने का फैसला किया और दिल्ली के एक अखाड़े में उसका दाखिला करा दिया। कुछ समय बाद मां गीता को लगा कि कुश्ती के कारण बेटे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कुशल को वहां से वापस बुला लिया। परिवार चाहता था कि ऐसा खेल मिले, जिसमें उसका करियर भी बने और पढ़ाई भी जारी रह सके।
- चोट न पहुंचाने की बात कही तो बॉक्सिंग का विचार छोड़ा: इसके बाद परिवार ने रोहतक में बॉक्सिंग में दाखिले का विचार किया। फॉर्म लेने के दौरान कुशल ने वहां बच्चों को बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करते देखा। उसने मां से कहा कि वह किसी बच्चे को पंच नहीं मार सकता और किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। बेटे की बात सुनकर मां ने भी बॉक्सिंग का विचार छोड़ दिया। इसके बाद परिवार को किसी जानकार ने कुशल को आर्चरी में भेजने की सलाह दी।
तीरंदाज कुशल दलाल ने एशियन गेम्स 2026 में कंपाउंड टीम इवेंट में साहिल जाधव और गणेश मणिरत्नम के साथ मिलकर भारत को गोल्ड मेडल दिलाया
- 2017 में तीरंदाजी शुरू, मां गांव छोड़ रोहतक पहुंची : आर्चरी ऐसा खेल था, जिसमें पढ़ाई के साथ खेल को आगे बढ़ाया जा सकता था। परिवार ने फैसला लिया और 2017 में कुशल अपनी मां के साथ रोहतक के सेक्टर-1 में रहने लगा। यहां राजीव गांधी स्टेडियम में रोजाना प्रैक्टिस शुरू हुई। शाम 3 से 6 बजे तक आर्चरी की ट्रेनिंग होती थी और इसके बाद 6 से 7:30 बजे तक फिजिकल वर्कआउट करता था।
- किसान पिता ने 3.50 लाख का धनुष-तीर खरीदा: कुशल के लिए आर्चरी आसान खेल नहीं था। इसके उपकरण काफी महंगे थे, लेकिन बेटे के लक्ष्य को देखते हुए किसान पिता संदीप दलाल ने पीछे कदम नहीं खींचे। उन्होंने करीब 3.50 लाख रुपए के धनुष और तीर खरीदे। परिवार की आर्थिक स्थिति के बावजूद बेटे की प्रैक्टिस और जरूरतों को प्राथमिकता दी गई।
- बेटे की प्रैक्टिस के दौरान मां भी पढ़ती रहीं, अकाउंटेंट बनीं: कुशल की मां गीता भी उस समय सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थीं। बेटे की प्रैक्टिस के दौरान वह ग्राउंड में बैठकर प्रतियोगी परीक्षा की किताबें पढ़ती थीं। बेटा जितने घंटे अभ्यास करता, मां भी उतने समय अपनी पढ़ाई करती थीं। गीता ने लगातार मेहनत जारी रखी और आज वह मार्केट कमेटी खरखौदा में अकाउंटेंट के पद पर सरकारी नौकरी कर रही हैं। वे बतातीं है कि बेटे के खेल में बाधा न आए, इसके लिए शादी समारोह भी छोड़ देती थीं।
कुशल जब ट्रेनिंग करता था, उसकी मां ग्राउंड में बैठकर ही प्रतियोगी परीक्षा की किताबें पढ़ती थीं। इसी मेहनत के दम वह अकाउंटेंट बनीं।
2018 में पहला गोल्ड, यूथ वर्ल्ड में डबल धमाल
कुशल ने 2018 में अंडर-14 वर्ग में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में पहला गोल्ड मेडल जीता। मां के अनुसार, इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। खेलो इंडिया में चयन हुआ और हरियाणा की खेल नीति का भी उसे लाभ मिला। इसके बाद नेशनल स्कूल गेम्स में सिल्वर मेडल सहित अलग-अलग प्रतियोगिताओं में लगातार पदक हासिल करता रहा।
कुशल ने 2021 में पोलैंड में हुई यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल हासिल किए। वह अब तक सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर तीनों कैटेगरी में 15 से ज्यादा मेडल जीत चुका है। हर प्रतियोगिता के साथ उसका लक्ष्य भी बड़ा होता गया और अब एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड जीतकर उसने परिवार और सोनीपत का नाम रोशन किया है।
गांव सिवानका में परिवार ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की।
वीडियो कॉल पर कुशल ने बताईं जीत तक पहुंचने की ट्रिक..
- शुरुआत आसान, सेमीफाइनल में मिली टक्कर:एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद कुशल दलाल ने दैनिक भास्कर के साथ वीडियो कॉल पर बातचीत की। बताया कि कंपाउंड टीम इवेंट में कुल पांच मुकाबले हुए। पहले टॉप-16, फिर टॉप-8, क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और इसके बाद गोल्ड के लिए फाइनल मुकाबला खेला गया। शुरुआती मुकाबले आसान रहे, लेकिन सेमीफाइनल में कोरिया की टीम सामने थी, जिसे उसने इस खेल की मजबूत टीम बताया।
- फाइनल टफ था, दबाव में पलटा मैच: कुशल ने बताया कि फाइनल मुकाबला चीन के साथ था। शुरुआत में चीन की टीम के पास दो पॉइंट की बढ़त थी। इसके बाद भारतीय टीम ने दबाव के बावजूद वापसी की और एक पॉइंट की बढ़त हासिल कर ली। आखिरी तक मुकाबला काफी टफ रहा। टीम ने दबाव में बेहतर प्रदर्शन किया और आखिरकार भारत की झोली में गोल्ड मेडल डाल दिया।
- वर्ल्ड कप और चैंपियनशिप के ट्रायल पर नजर : एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद कुशल का अगला लक्ष्य घरेलू स्तर के नेशनल टूर्नामेंट, अगले साल होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप और वर्ल्ड कप के ट्रायल हैं। कुशल का कहना है कि वह अब इन प्रतियोगिताओं के लिए और मेहनत करेगा। उसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए लगातार पदक जीतना है।
कुशल की दादी ने पोते के मेडल जीतने पर भगवान का शुक्रिया अदा किया।
कुशल की फैमिली और हॉबी के बारे में जानिए…
- फोन की बैटरी खत्म होने से परिवार से नहीं हुई बात: कुशल ने बताया कि गोल्ड मेडल जीतने के तुरंत बाद वह परिवार से बात करना चाहता था, लेकिन उसके फोन की बैटरी खत्म हो गई थी। इस वजह से वह घर पर फोन नहीं कर सका। करीब तीन घंटे बाद जब फोन उपलब्ध हुआ तो सबसे पहले उसने अपने मां-पिता से बात की। उस समय परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं था।
- फोटो खींचना पसंद, नेचर और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी पंसद : कुशल खेल के अलावा नेचर और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के भी शौकीन हैं। उसने पिछले साल सोनी कंपनी का अल्फा 7C कैमरा खरीदा। जब भी प्रैक्टिस से फ्री होते है तो कैमरा लेकर फोटोग्राफी करते हैं। नेशनल गेम्स के ट्रायल या प्रतियोगिताओं के दौरान भी मौका मिलने पर वे फोटो खींचते हैं।
- कुशल के परिवार में 25 चाचा और 17 दादा : कुशल के पिता संदीप दलाल ने बताया कि उनका परिवार काफी बड़ा है। कुशल के दादा के 17 भाई हैं और परिवार में करीब 25 चाचा हैं। सभी के लिए बेटे की उपलब्धि गर्व और खुशी का पल है। उन्होंने कहा कि कुशल के घर लौटने पर परिवार की ओर से उसका भव्य स्वागत किया जाएगा।
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