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Kerala Education Minister allows wearing of hijab in schools | केरल शिक्षामंत्री ने स्‍कूल में हिजाब पहनने की इजाजत दी: 3 दिन पहले पेरेंट्स-टीचर्स में हुआ विवाद; हाईकोर्ट ने दिया था पुलिस प्रोटेक्‍शन का निर्देश

13 मिनट पहले

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केरल के शिक्षामंत्री वी सिवानकुट्टी ने जारी हिजाब विवाद के बीच छात्रा को स्‍कूल में हिजाब पहनकर आने की इजाजत दे दी है। मंत्री ने मंगलवार को स्कूल को आदेश दिया कि वह छात्रा को उसके सिर ढकने वाले स्कार्फ यानी हिजाब पहनकर अपनी पढ़ाई जारी रखने की तुरंत अनुमति दे। उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल और मैनेजमेंट को यह भी निर्देश दिया कि छात्रा और उसके माता-पिता को हुई मानसिक पीड़ा का भी ध्‍यान रखा जाए।

बता दें कि पिछले सप्‍ताह केरल के पल्लुरुथी के सेंट रीटा पब्लिक स्कूल में 8वीं क्लास की स्टूडेंट को हिजाब पहनने से रोकने पर विवाद हो गया था। छात्रा के पेरेंट्स का कहना था कि हिजाब पहनना धार्मिक स्‍वतंत्रता का मामला है। इसके बाद स्‍कूल प्रशासन और पेरेंट्स के बीच विवाद हो गया।

प्रिंसिपल का आरोप था कि नाराज पेरेंट्स ने स्‍कूल का घेराव भी किया। इसके बाद स्‍कूल को 2 दिन के लिए बंद कर दिया गया। विवाद बढ़ने पर केरल हाईकोर्ट ने स्‍कूल प्रशासन और टीचर्स की सुरक्षा के लिए प‍ुलिस प्रोटेक्‍शन का निर्देश भी दिया था।

स्‍कूल में हिजाब पहनने से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, पिछले सप्‍ताह 8वीं क्लास की छात्रा स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनकर स्कूल पहुंची थी। जब स्कूल मैनेजमेंट ने उसे रोका तो स्टूडेंट के माता-पिता ने इसे धार्मिक अधिकार बताकर हंगामा कर दिया। विवाद बढ़ने पर स्‍कूल बंद कर दिया गया।

कई पेरेंट्स का कहना था कि स्‍कूल बंद करने के फैसले के चलते बच्‍चों की पढ़ाई की नुकसान हो रहा है। ऐसे में शिक्षामंत्री सिवानकुट्टी ने स्‍कूल को निर्देश दिया है कि छात्रा को हिजाब पहनकर स्‍कूल आने की इजाजत दी जाए। उन्‍होंने स्‍कूल प्रशासन से मामले की पूरी रिपोर्ट भी एक दिन के भीतर सौंपने को कहा है।

एजुकेशन डिपार्टमेंट ने कहा- मामले में स्‍कूल दोषी

एर्नाकुलम के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (DDE) ने मामले की रिपोर्ट शिक्षामंत्री को सौंपी। रिपोर्ट में बताया गया है कि मामले को संभालने में स्कूल प्रशासन ने गंभीर चूक की हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हिजाब पहनने की वजह से किसी छात्रा को कक्षा में जाने से रोकना अनुशासनहीनता है और यह शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम का उल्लंघन है।

DDE की जांच के अनुसार, स्कूल की कार्रवाई न केवल RTE अधिनियम के खिलाफ थी, बल्कि केरल की समावेशी शिक्षा नीति के भी खिलाफ थी।

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