16 मिनट पहले
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भारत के पहले वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कपिल देव ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के काम करने के तरीके को लेकर चल रही चर्चा पर अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में हेड कोच की भूमिका तकनीकी कोचिंग से ज्यादा खिलाड़ियों को संभालने और मैनेज करने की होती है।
साउथ अफ्रीका दौरे के बाद बढ़ी आलोचना साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारत की 0-2 से हार के बाद गौतम गंभीर की रणनीति, खिलाड़ियों के बार-बार रोटेशन और पार्ट-टाइम विकल्पों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच कोलकाता में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के ICC सेंटेनरी सेशन के दौरान कपिल देव ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की।

इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के ICC सेंटेनरी सेशन के दौरान कपिल देव ने अपने विचार रखे।
‘कोच’ शब्द का ढीला इस्तेमाल हो रहा है: कपिल देव कपिल देव ने कहा, ‘आज ‘कोच’ शब्द का बहुत ढीले तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। गौतम गंभीर वास्तव में कोच नहीं, बल्कि टीम के मैनेजर हो सकते हैं। मेरे लिए कोच वो होते हैं, जिन्होंने हमें स्कूल और कॉलेज में खेल सिखाया।’
तकनीकी कोचिंग की जरूरत पर सवाल कपिल देव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी कोचिंग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा,’अगर कोई खिलाड़ी पहले से लेग स्पिनर या विकेटकीपर है, तो हेड कोच उसे क्या सिखाएगा? गौतम गंभीर किसी लेग स्पिनर या विकेटकीपर को कैसे कोच कर सकते हैं?’
खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाना सबसे जरूरी कपिल देव के मुताबिक, हेड कोच या मैनेजमेंट की असली जिम्मेदारी खिलाड़ियों को संभालना और उनका आत्मविश्वास बढ़ाना है। उन्होंने कहा,’मैनेजमेंट ज्यादा जरूरी है। एक मैनेजर के तौर पर खिलाड़ियों को भरोसा देना होता है कि वे कर सकते हैं। युवा खिलाड़ी आपको देखते हैं और आपसे सीखते हैं।’

हेड कोच गौतम गंभीर कप्तान सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे के साथ।
खराब फॉर्म वाले खिलाड़ियों पर ज्यादा ध्यान अपने कप्तानी अनुभव को साझा करते हुए कपिल देव ने बताया कि वे हमेशा खराब फॉर्म से जूझ रहे खिलाड़ियों के साथ ज्यादा समय बिताते थे। उन्होंने कहा,’अगर कोई खिलाड़ी शतक लगाता है, तो उसके साथ डिनर करने की जरूरत नहीं होती। मैं उन खिलाड़ियों के साथ बैठना पसंद करता था, जो रन नहीं बना पा रहे होते थे।’
विश्वास दिलाना ही सबसे बड़ी भूमिका कपिल देव ने कहा कि किसी भी कप्तान या कोच की सबसे बड़ी भूमिका खिलाड़ियों में विश्वास पैदा करना है। काम बस इतना है कि टीम को भरोसा दिलाया जाए और कहा जाए,तुम और बेहतर कर सकते हो।
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