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Judge furious over children crammed into school bus | स्कूल बस में ठूंस-ठूंस कर भरे बच्चे, जज भड़कीं: नियम में हर सीट पर 1 बच्चा, न मानने पर रद्द हो सकती है स्कूल की मान्यता

2 घंटे पहले

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बाड़मेर की एक मिनी स्कूल बस में ठूंस-ठूंस कर बच्चे भरे हुए थे। बस को मोडिफाई कर उसमें 22 बच्चों को बैठा रखा था। जिसे देखकर बाड़मेर की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव (जज) कृष्णा गुप्ता भड़क गईं। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

जज बोलीं- बसों के बारे में जानकारी रखें पेरेंट्स

जज कृष्णा गुप्ता ने कहा- मेरी पेरेंट्स से अपील है कि बच्चे कैसे स्कूल जा रहे हैं, स्कूल बस में बैठने के लिए सीट है या नहीं। उसकी कैपेसिटी क्या है। जब कल कोई हादसा होता है तो हम रोते हैं। हमारे साथ यह हो गया। थोड़ा जागरूक बनना चाहिए।100-200 रुपए की खातिर आपके बच्चों की स्थिति दयनीय हो रखी है।

CBSE के नियम, पानी तक बस में हो

  1. स्कूल बसों के बाहर और अंदर दोनों जगह ट्रांसपोर्ट मैनेजर का नाम व नंबर लिखा हो।
  2. बस ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस हो।
  3. हर बस में ड्राइवर से साथ एक कंडक्टर भी हो।
  4. हर स्कूल बस में बच्चों की सेफ्टी के लिए एक लेडी अटेंडेंट हो।
  5. स्कूल बस के अंदर पीने का पानी हो।

रूल्स फॉलो न करने पर स्कूल की मान्यता रद्द हो सकती है। भारत सरकार और CBSE ने जो नियम स्कूलों के लिए बनाए हैं, अगर कोई इन नियमों को नहीं मानता है तो उस स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा स्कूल पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर कोई स्कूल बार-बार नियमों को नजरअंदाज करता है, तो स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

स्कूल बसों के लिए बनाए गए नियमों के न मानने पर स्कूल बस सीज की जा सकती है। ड्राइवर और कंडक्टर पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही स्कूल मैनेजमेंट पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा स्कूल पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

अगर कोई स्कूल या ट्रांसपोर्ट मैनेजर सरकार या CBSE के इन नियमों को नहीं मानते हैं, तो आप केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में लेटर भेजकर या मेल के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं।

ऐसे कई मामले डेली आ रहे, जिम्मेदार अधिकारी इग्नोर कर रहे- एक्सपर्ट

दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की हेड अपराजिता गौतम बताती हैं कि, नियम तो बहुत आए हुए हैं लेकिन इनका पालन नहीं हो पाता। क्योंकि जो जिम्मेदार अधिकारी हैं वे इसे इग्नोर करते हैं। ऐसे केसेज पूरे भारत से आते रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इसपर नियम बनाए हैं।

उन्होंने आगे कहा, ‘नियम कहता है कि अगर छोटे बच्चे हैं तो दो सीट पर 3 बच्चे बैठ सकते हैं। बड़े बच्चे 2 ही बैठते हैं। लेकिन अक्सर इसका उलट ही देखने को मिलता है। जो नियम हैं उन्हें ऐसे ही तोड़ा जा रहा है और कोई ध्यान देता नहीं है। ये ट्रेफिक वाले की जिम्मेदारी है कि अगर उसके सामने से इस तरह की बस जा रही है। तो इसमें जो भी जिम्मेदार हैं उन सब पर कार्रवाई होनी चाहिए।’

स्टोरी- देव कुमार, दैनिक भास्कर फेलो

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