दुबई1 घंटे पहले
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2023 वनडे वर्ल्ड कप में बांग्लादेश के खिलाफ श्रीलंका के एंजलो मैथ्यूज को देर से क्रीज आने पर टाइम आउट दे दिया गया था।
ICC ने गुरुवार को क्रिकेट के नए नियम जारी किए हैं। अब बैटिंग के दौरान अगर कोई बल्लेबाज जानबूझकर समय बर्बाद करता है तो फील्डिंग टीम को 5 पेनल्टी रन मिलेंगे। इसके अलावा पुरुष, महिला और जूनियर क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली गेंद के साइज और वजन की अलग-अलग सीमा तय की गई है।
ये सभी नए नियम 1 अक्टूबर 2026 या उसके बाद शुरू होने वाली इंटरनेशनल सीरीज पर लागू होंगे। जो सीरीज पहले से चल रही हैं, उनमें पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
1. समय पर तैयार नहीं हुए तो फील्डिंग टीम को 5 रन
अब बैटर के लिए अगली गेंद खेलने के लिए तय समय के भीतर तैयार रहना जरूरी होगा। अगर अंपायर को लगता है कि बैटर तय समय में अगली गेंद का सामना करने के लिए तैयार नहीं है, तो पहली गलती पर चेतावनी दी जाएगी। दूसरी गलती पर फाइनल वार्निंग मिलेगी।
इसके बाद भी अगर बैटर समय बर्बाद करता है, तो तीसरी और हर अगली गलती पर फील्डिंग टीम को 5 पेनल्टी रन दिए जाएंगे। बार-बार ऐसा करने पर कोड ऑफ कंडक्ट के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
2. टेस्ट में पिंक बॉल से ट्रायल
दिन के टेस्ट मैचों में पिंक बॉल के इस्तेमाल को मंजूरी दी है। इसका मुख्य मकसद खराब रोशनी के कारण टेस्ट मैच में होने वाले समय के नुकसान को कम करना है।
इसके लिए दोनों टीमों की टेस्ट शुरू होने से पहले सहमति जरूरी होगी। एक बार पिंक बॉल से खेलने का फैसला हो गया तो पूरे मैच में उसी गेंद का इस्तेमाल करना होगा। अभी केवल डे-नाइट टेस्ट मैचों में पिंक बॉल का इस्तेमाल किया जाता है।
इंटरनेशनल टेस्ट मैचों में पहली बार 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच डे-नाइट टेस्ट में गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया गया था।
3. महिला और पुरुष क्रिकेट में गेंद का साइज-वजन अलग
अब पुरुष, महिला और जूनियर क्रिकेट के लिए गेंद के साइज और वजन की अलग-अलग सीमा तय होगी। पुरुषों की गेंद का वजन 155.9 से 163 ग्राम और साइज 22.4 से 22.9 सेमी रहेगा। महिलाओं की गेंद का वजन 140 से 151 ग्राम और साइज 21 से 22.5 सेमी होगा। वहीं अंडर-13 क्रिकेट की गेंद का वजन 133 से 144 ग्राम और साइज 20.5 से 22 सेमी रहेगा।
4. मिसफील्ड अब हर बार ओवरथ्रो नहीं माना जाएगा
ओवरथ्रो को लेकर भी नियम साफ किया गया है। अगर फील्डर गेंद को स्टंप की ओर फेंककर रन रोकने या रन आउट करने की कोशिश करता है और गेंद आगे निकल जाती है, तो इसे ओवरथ्रो माना जाएगा।
लेकिन अगर फील्डर गेंद को सिर्फ रोकने या दूसरे फील्डर तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था और इस दौरान मिसफील्ड हो गई, तो उसे ओवरथ्रो नहीं माना जाएगा।
5. गेंद हाथ में होना जरूरी नहीं, अंपायर तय करेंगे कब ‘सेटल्ड’ हुई
अब गेंद को ‘फाइनली सेटल्ड’ मानने के लिए उसका गेंदबाज या विकेटकीपर के हाथ में होना जरूरी नहीं होगा। अंपायर यह तय कर सकेंगे कि गेंद कब पूरी तरह से सेटल हो चुकी है। यह बदलाव खास तौर पर मैच की आखिरी गेंद जैसे करीबी मौकों पर अहम हो सकता है।
6. आउट-स्टंपिंग के लिए पूरा कंट्रोल जरूरी
रन आउट या स्टंपिंग के मामलों में अब सिर्फ गेंद को हाथ या ग्लव से छू लेना पर्याप्त नहीं होगा। फील्डर के पास गेंद पर पूरा कंट्रोल होना जरूरी होगा।
उदाहरण के लिए, अगर फील्डर गेंद को सिर्फ छूता है और उसी दौरान स्टंप की गिल्लियां गिर जाती हैं, तो इसे गेंद पर पूरा कंट्रोल नहीं माना जाएगा।
7. आखिरी ओवर में विकेट गिरने से दिन का खेल खत्म नहीं होगा
टेस्ट क्रिकेट में अब दिन के आखिरी ओवर में विकेट गिरने से खेल अपने आप खत्म नहीं होगा। अगर आखिरी ओवर पूरा नहीं हुआ है और मौसम तथा मैदान की परिस्थितियां खेल जारी रखने के अनुकूल हैं, तो बची हुई गेंदें उसी दिन कराई जाएंगी। उन्हें अगले दिन के खेल में नहीं जोड़ा जाएगा।
पहले आखिरी ओवर में विकेट गिरने के बाद दिन का खेल खत्म कर दिया जाता था, भले ही उस ओवर की कुछ गेंदें बाकी हों। ICC ने बदलाव का कारण बताते हुए कहा है कि बाकी गेंदों को अगले दिन कराने से समय की बचत नहीं होती। नए नियम से फील्डिंग टीम को भी फायदा मिलेगा और मैच का रोमांच बना रहेगा।
टेस्ट में पहले दिन के आखिरी ओवर में विकेट गिरने पर मैच को रोक दिया जाता था। तस्वीर में इंग्लैंड और श्रीलंका के खिलाफ लॉर्ड्स में खेला गया मैच है।
8. टी-20 में इंटरवल 15 मिनट का होगा, ड्रिंक्स ब्रेक में कोच भी मैदान पर
टी-20 इंटरनेशनल में अब 15 मिनट का तय इंटरवल होगा। अगर मैच में समय का नुकसान हुआ है तो इसे घटाकर न्यूनतम 10 मिनट किया जा सकता है।
इसके अलावा वनडे और टी-20 में अब हेड कोच ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान मैदान पर आ सकते हैं। यानी कोच खिलाड़ियों से मैदान पर ही बात कर सकेंगे। यह व्यवस्था महिला क्रिकेट में पहले से ही लागू है।
वनडे में अभी सिर्फ सब्सिट्यूट खिलाड़ी ही ड्रिंक्स ब्रेक्स के दौरान मैदान पर जा पाते हैं।
9. लेग साइड वाइड बल्लेबाज के मूवमेंट के हिसाब से दी जाएगी
वनडे और टी-20 में लेग साइड वाइड बल्लेबाज के मूवमेंट के हिसाब से दी जाएगी। इस नियम का मकसद उन मौकों के लिए है, जब बैटर गेंद फेंके जाने से पहले या डिलीवरी के दौरान अपनी पोजिशन बदलता है।
अब वाइड तय करते समय डिलीवरी के वक्त बैटर के पैरों की स्थिति को आधार माना जाएगा। अगर गेंद फेंके जाने के बाद बैटर ऑफ साइड की ओर चला जाता है, तो बाद की उसकी मूवमेंट को वाइड तय करने का आधार नहीं बनाया जाएगा।
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