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Former India Hockey Captain Rani Rampal Warns Young Athletes Against Doping | एथलीटों को महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान का मैसेज: रानी रामपाल बोलीं- डोपिंग से करियर होगा बर्बाद, ईमानदारी की जीत असली मेडल – Kurukshetra News

भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान रानी रामपाल द्वारा सोशल मीडिया पर डाली गई पाेस्ट।

भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान रानी रामपाल ने युवा एथलीटों को डोपिंग के खिलाफ सख्त मैसेज दिया है। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) इंडिया के पैनल कमेटी की मेंबर में रानी ने चेतावनी दी, कि डोपिंग सिर्फ करियर को बर्बाद करती है।

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उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स एक लंबी जर्नी है, जहां शॉर्टकट अपनाने की कोई जगह नहीं है। मेडल जीतने की सच्ची खुशी तभी होती है, जब वह ईमानदारी और फेयर प्ले से आए। हर हफ्ते NADA के पास ऐसे कई केस आते हैं, जहां अनजाने में या लालच में डोपिंग पकड़े जाने पर एथलीटों के करियर पर स्टॉप लग जाता है।

बगैर सोचे ना लें दवा- रानी रामपाल

रानी ने सोशल मीडिया पर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो डाली। उन्होंने कहा कि हमारे कई युवा एथलीट बिना सोचे-समझे दवाइयां या सप्लीमेंट्स ले लेते हैं, जो उनके पूरे खेल जीवन को खत्म कर देता है, इसलिए कोई भी ऐसी चीज को अपने मुंह में ना डाले, जो डोपिंग में आती हो।

छोटी गलती से भुगतना पड़ेगा बैन

उन्होंने कहा कि NADA भारत में न केवल टेस्टिंग करती है, बल्कि जागरूकता अभियान भी चला रही है। वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) का मूल मंत्र फेयर प्ले। हमारे युवा एथलीटों को यह समझना होगा कि एक बार का शॉर्टकट पूरे करियर को बर्बाद कर सकता है। मैंने खुद देखा है कि कैसे 70 साल के करियर वाले खिलाड़ी एक छोटी सी गलती से बैन हो जाते हैं।

डॉक्टर्स को हमेशा बताए स्पोर्ट्स पर्सन

रानी ने अपने मैसेज में कहा कि कई युवा खिलाड़ी अपने डॉक्टर्स के पास से बिना पूरी जानकारी दिए दवाइयां ले लेते हैं। “कई बार सर्दी-खांसी की साधारण सीरप या दवा भी डोपिंग लिस्ट में आ जाती है, इसलिए आप डॉक्टर्स को बताएं कि आप एक स्पोर्ट्स पर्सन हैं और नियमित टेस्टिंग से गुजरते हैं, तो वे आपको ऐसी दवाई ना दे, जो आपके करियर को खतरे में डालेगी।

अपने परिवार के साथ रानी रामपाल।

अपनी जिम्मेदारी को समझे

सलाह देते हुए कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने मुंह में क्या डाल रहे हैं, यह जानें। हर दवाई लेने से पहले सोचें – क्यों ले रहे हैं। कई एथलीट बैन होने के बाद कहते हैं कि हमें पता नहीं था, लेकिन यह काम नहीं आएगा। स्पोर्ट्स में सफलता शॉर्टकट से नहीं, मेहनत और अनुशासन से आती है।

जागरूक अभियान चला रही NADA

रानी ने कहा कि NADA सिर्फ टेस्टिंग पर फोकस नहीं कर रही है, बल्कि वर्कशॉप्स और अवेयरनेस कैंपेन भी चला रही है। हमारा लक्ष्य है कि हर युवा खिलाड़ी डोपिंग के खतरे को समझे और फेयर प्ले को अपनाए। खेल एक लंबा सफर है, जिसमें उतार-चढ़ाव तो आते ही हैं, लेकिन ईमानदारी से जीतने वाली खुशी कुछ और होती है।

क्या है डोप और डोपिंग टेस्ट

रानी ने डोपिंग और डोप टेस्ट के बारे में खुलकर समझाया। उन्होंने कहा कि डोप टेस्ट का मतलब है कि आप कोई ऐसी दवाई या नशीला पदार्थ न लें, जो आपकी परफॉर्मेंस को बढ़ा दे। चाहे वह एंड्यूरेंस, स्पीड या स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले सप्लीमेंट्स हों। अगर WADA की सूची में हैं, तो वे प्रतिबंधित हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में जुटा देश

भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की तैयारियों में जुटा है और 2036 ओलिंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भी अपनी दावेदारी पेश कर चुका है। पिछले साल NADA ने 7,113 डोपिंग टेस्ट किए। इनमें 6,576 यूरिनल और 537 ब्लड सैंपल शामिल थे। इन जांचों में 260 सैंपल डोपिंग में पॉजिटिव पाए गए।

तांगा चलाते थे रानी के पिता रामपाल।(फाइल फोटो)

तांगा चालक की बिटिया की सफलता का सफर

पिता की मेहनत से हॉकी की शुरुआत रानी रामपाल के संघर्ष की कहानी उनके पिता रामपाल की मेहनत के साथ शुरू हुई थी। रानी के पिता रामपाल तांगा चलाया करते थे और अक्सर महिला हॉकी खिलाड़ियों को आते-जाते देखते थे। बस यहीं से पिता के दिल में बेटी को खिलाड़ी बनाने की चाह जाग उठी।

उन्होंने अपनी 6 वर्षीय बेटी को हॉकी मैदान में कोच बलदेव सिंह के पास छोड़ दिया, बस यहां से उनके हॉकी करियर की शुरुआत हुई।

14 की उम्र में किया इंटरनेशनल डेब्यू

रानी रामपाल 14 साल की उम्र में इंटरनेशनल लेवल पर डेब्यू करने वाली सबसे छोटी उम्र की खिलाड़ी हैं। जब वह 15 साल की थी, 2010 में वह विश्व महिला कप की सबसे छोटी खिलाड़ी थी। उन्होंने क्वाड्रिलियन टूर्नामेंट में 7 गोल दागकर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे।

उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक गोल दागा था, जिसकी बदौलत भारत ने हॉकी जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक जीता था। पिछले महीने ही 2 नवंबर को रानी ने कुरुक्षेत्र के CA पंकज के साथ शादी की है।

रानी ने मात्र 14 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया था।

टोक्यो में चौथे स्थान पर रही टीम

रानी रामपाल की अगुआई में भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो 2020 ओलिंपिक में चौथे स्थान पर रही थी। ओलिंपिक में टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। रानी रामपाल को अर्जुन व भीम अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। फिलहाल रानी रामपाल गर्वमेंट हॉकी नर्सरी पटियाला में खिलाड़ियों को कोचिंग देती हैं।

नहीं हो पाई फिर टीम में वापसी

टोक्यो ओलिंपिक के बाद से रानी टीम से बाहर चल रही हैं। टोक्यो ओलिंपिक के बाद तत्कालीन कोच शोर्ड मारिने अपने पद से हट गए थे और उनकी जगह यानेक शॉप मैन ने जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसा माना जाता है कि यानेक और रानी के बीच रिश्तों सही नहीं थे। उस दौरान रानी रामपाल चोट से भी जूझ रही थीं।

इसी वजह से साल 2022 में गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों में 6 मुकाबलों में 18 गोल करने के बावजूद उनकी टीम इंडिया में वापसी नहीं हुई।

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