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Fatehabad’s Divyang Swimmer Surendra Dhaka to Swim Ram Setu in Sri Lanka | Haryana News | फतेहाबाद के दिव्यांग तैराक सुरेंद्र श्रीलंका में नापेंगे रामसेतु: 33 किमी लंबाई, दोनों पैरों से दिव्यांग, 14 देशों में कर चुके स्विमिंग – Fatehabad (Haryana) News

अरब सागर में स्विमिंग करते हुए फतेहाबाद के अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग तैराक सुरेंद्र ढाका।

हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव भूथन कलां के अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग तैराक सुरेंद्र ढाका अब सात समुद्रों को नापने की तैयारी में हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने अरब सागर से कर दी है। अगला लक्ष्य श्रीलंका में जाकर रामसेतु को तैर कर पार करना है। यह लंबाई करीब

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बता दें कि, दोनों पैरों से दिव्यांग सुरेंद्र ढाका पिछले 12 सालों से तैराकी कर रहे हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में जाकर अरब सागर में 36 किलोमीटर की चैनल स्विम 9 घंटे 40 मिनट में पार कर गोल्ड मेडल जीता है। यह स्विमिंग अरब सागर में धरमतर जेट्‌टी से गेटवे ऑफ इंडिया तक की गई। इसी से उत्साहित सुरेंद्र अब रामसेतु पार करना चाह रहे हैं।

14 देशों में कर चुके स्विमिंग

सुरेंद्र ढाका 14 देशों में स्विमिंग कर चुके हैं। इनमें जापान, उज्बेकिस्तान, जर्मनी, रूस और यूएई आदि शामिल हैं। वह नेशनल लेवल पर अब तक 25 से ज्यादा मेडल जीत चुके हैं। जापान व उज्बेकिस्तान में हुई एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। साल 2023 में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में चौथे नंबर पर रहे। 2014 में रुस में वर्ल्ड कप में तीसरा स्थान प्राप्त किया। दुबई में बोट रेस में भी मेडल जीते थे।

फतेहाबाद के गांव भूथन कलां के अंतरराष्ट्रीय तैराक सुरेंद्र ढाका।

जानिए सुरेंद्र ढाका का सफर

  • बचपन में ही पोलियो हो गया था- सुरेंद्र ढाका की उम्र 40 साल है। उनके पिता रामकुमार ढाका किसान हैं, जबकि मां धनकोरी देवी गृहिणी थी। सुरेंद्र चार भाई और एक बहन में सबसे छोटे हैं। मात्र 10 साल के हुए थे, तब मां का निधन हो गया था।
  • जोहड़ व नहरों में करते थे स्विमिंग- सुरेंद्र बताते हैं कि वह किशोरावस्था से ही भाईयों व दोस्तों के साथ जोहड़ व नहरों में स्विमिंग करते थे। 12वीं तक पढ़े हैं। पढ़ाई गांव भूथन कलां से ही की है।
  • साल 2014 में शुरू की बतौर खिलाड़ी स्विमिंग- सुरेंद्र के अनुसार, उन्होंने साल 2014 में खिलाड़ी के तौर पर स्विमिंग शुरू की थी। इसके बाद स्विमिंग का कोर्स किया। सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में भी स्विमिंग सीखी।
  • पहली बार करनाल में हुए गेम में लिया भाग- सुरेंद्र ढाका ने पहली बार करनाल में हुए गेम्स में भाग लिया था। वहां पेशेवर तैराकी प्रतियोगिता में प्रतिभागी रहे। इसके बाद नेशनल, इंटरनेशनल लेवल की चैंपियनशिप में भाग लेते रहे।
  • साल 2020 में ओलिंपिक में नहीं खेल पाए- सुरेंद्र बताते हैं कि वह पहले साल 2020 के ओलिंपिक में नहीं जा पाए थे, क्योंकि उस समय उनको ट्रैक्टर से चोट लग गई थी। अब साल 2028 में होने वाले ओलिंपिक में खेलने जाएंगे। इसके लिए तैयारियां चल रही है।
  • शादी नहीं की, तैराकी पर लगाया ध्यान- सुरेंद्र ढाका अविवाहित हैं। वह बताते हैं कि उन्होंने शादी व अन्य पारिवारिक बंधनों की बजाय तैराकी पर ध्यान लगाया। इसी क्षेत्र में और मुकाम हासिल करने पर फोकस किया।

जीता हुआ मेडल दिखाते दिव्यांग तैराक सुरेंद्र ढाका।

ये उपलब्धियां पा चुके

साल 2015 में मधुबन में हुई हरियाणा स्टेट पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में तीन गोल्ड जीते। इसके बाद साल 2016 में फरीदाबाद में हुई हरियाणा स्टेट पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में तीन गोल्ड, साल 2017 और साल 2018 में भी मधुबन में हुई हरियाणा स्टेट पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में तीन गोल्ड जीते।

गोवा में भी जीती पांच किमी की रेस

सुरेंद्र ढाका ने गोवा की कोलवा बीच पर हुई इंडियाज प्रीमियर ओपन वाटर स्विमिंग चैंपियनशिप के दौरान पांच किलोमीटर की तैराकी प्रतियोगिता जीती थी। इसके अतिरिक्त गुजरात के पोरबंदर में हुए दो किलोमीटर के स्विमेथिऑन को भी जीता।

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