कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले झंडू कुमार के लिए उनकी मां कमला देवी के शब्द सबसे बड़ी प्रेरणा बने। मुकाबले से कुछ देर पहले व्हाट्सऐप कॉल पर मां ने बेटे से कहा, ‘बेटा, जब वहां तक पहुंच ही गए हो, तो देश का तिरंगा फहरा
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मेडल जीतने के बाद झंडू ने सबसे पहले मां को फोन किया और कहा, ‘तोहनी के आर्शीवाद से जीत गई लो मइया।’(मां, आप सभी के आशीर्वाद से मैं मेडल जीत गया।)
झंडू के बड़े भाई कुंदन कुमार ने बताया कि चार भाइयों में झंडू सबसे छोटे हैं। एक भाई का निधन हो चुका है। मुकाबले से पहले शुक्रवार रात करीब 8 बजे झंडू ने घर पर फोन किया था। परिवार के सभी लोगों ने उन्हें “विजय भव” कहकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद उन्होंने मां से बात की। मां ने कहा, ‘जब वहां तक पहुंच गए हो, तो झंडा फहरा कर ही आना और पहला, दूसरा, तीसरा स्थान ले आना।’
मां कमला देवी ने भास्कर से कहा, ‘रात भर जगलीईओ और देखलियो बाबू ने देश का नाम रोशन कईलन।’ (रात भर जागकर उनका मुकाबला देखा। झंडू को देश का नाम रोशन करते देखा।)
उन्होंने बताया, ‘जीतने के बाद झंडू ने कहा- जीत गईलियो मइया। उससे पहले भी आर्शीवाद लेवे खातिर फोन कईले रहलन। तब हम कहनी कि झंडा फहराकर आना।’ नाम को लेकर उन्होंने बताया कि उनका नाम झन्नू रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे सभी लोग उन्हें झंडू कहने लगे।
कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज जीतने वाले झंडू कुमार के माता-पिता कमला देवी और रामानंद पासवान, साथ में बड़े भाई कुंदन कुमार। नालंदा में परिवार की सब्जी की दुकान पर
झंडू कुमार के मेडल जीतने के बाद उनके अकादमी के कोच और खिलाड़ियों ने नालंदा में माता-पिता कमला देवी और रामानंद पासवान, और बड़े भाई कुंदन कुमार को उनके सब्जी के दुकान पर जाकर बधाई दी।
रात 2 बजे तक जागकर देखा मुकाबला
कुंदन कुमार ने बताया कि पूरा परिवार रात 9 बजे तक खाना खा चुका था, ताकि सभी मिलकर झंडू का मुकाबला देख सकें। पहले झंडू ने बताया था कि उनका इवेंट रात 10 बजे होगा, लेकिन मुकाबला रात करीब 2 बजे शुरू हुआ।
उन्होंने पहली कोशिश में 180 किलो वजन उठाया तो पूरे परिवार के चेहरे पर मुस्कान आ गई। मां कमला देवी और पिता रामानंद पासवान खुशी से मुस्कुरा रहे थे। इसके बाद झंडू ने 196 किलो वजन उठाया तो घर में तालियां गूंज उठीं। मां-पिता ने पूछा कि क्या हुआ, सभी ताली क्यों बजा रहे हैं? तब परिवार वालों ने बताया कि झंडू ने पदक जीत लिया है।
सुबह बाजार पहुंचे तो लोगों ने दी बधाई
कुंदन बताते हैं कि सुबह जब वह सब्जी की दुकान जा रहे थे, तब रास्ते में मिलने वाले लोग रोक-रोककर बधाई दे रहे थे। जो लोग पहले उन्हें झंडू कहकर बुलाते थे, वही अब कह रहे थे, ‘झंडू जी की जीत पर बधाई।’ लगातार फोन भी आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि झंडू पहले मां-पिता के साथ सब्जी की दुकान पर हाथ बंटाते थे। बाद में उन्होंने जिम जाना शुरू किया और धीरे-धीरे पावरलिफ्टिंग में रुचि बढ़ती गई। परिवार ने कभी उन्हें रोका नहीं, बल्कि हर कदम पर पूरा साथ दिया।
पढ़ाई के साथ मां-पिता के काम में भी हाथ बंटाते थे
झंडू हरनौत के सबनौह डीह गांव के रहने वाले हैं। चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे हैं। वह दिव्यांग हैं। चार साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था, जिससे कमर के नीचे शरीर का एक हिस्सा प्रभावित हो गया।
परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। मां-पिता हरनौत बाजार में सड़क किनारे आलू-प्याज बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पूरा परिवार किराए के एक कमरे में रहता है। झंडू पढ़ाई के साथ मां-पिता के काम में भी हाथ बंटाते थे। इसके बावजूद वह खेल के लिए समय निकालते रहे।
बेटे का कॉमनवेल्थ तक पहुंचना ही हमारे लिए गर्व की बात : पिता
झंडू के पिता रामानंद पासवान कहते हैं, “बेटे का कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयन होना ही हमारे लिए गर्व और खुशी की बात थी। झंडू बचपन से ही बहुत होनहार रहा है। वह शारीरिक रूप से दिव्यांग जरूर है, लेकिन उसकी इच्छाशक्ति कभी कमजोर नहीं हुई। उसने हमेशा हौसला बनाए रखा। आज उसी मेहनत के दम पर विदेश तक पहुंच गया। एक पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है।”
झंडू के मां-पिता आलू-प्याज की दुकान लगाते हैं।
पैरालंपिक पदक विजेता से मिली ट्रेनिंग
एक साधारण परिवार के बेटे को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाने में कई लोगों का योगदान रहा। वर्ष 2019 से कुंदन कुमार पांडे मार्गदर्शक के रूप में लगातार उनके साथ जुड़े रहे। रॉकस्टार जिम के संचालक और ट्रेनर ने भी उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण दिया।
बाद में उनका चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, गांधीनगर (गुजरात) में हुआ। वहां उन्हें पैरालंपिक पदक विजेता राजेंद्र सिंह रहेलू से प्रशिक्षण लेने का अवसर मिला। बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव संदीप कुमार ने भी हर स्तर पर उनका सहयोग किया।
सब्जी विक्रेता का बेटा कॉमनवेल्थ तक पहुंचा, यह पूरे देश के लिए गर्व की बात : कोच
नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव और झंडू के कोच कुंदन कुमार पांडे कहते हैं, ‘ह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि नालंदा और हरनौत जैसे छोटे इलाके से निकला खिलाड़ी कॉमनवेल्थ जैसे प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचा है। एक सब्जी विक्रेता के बेटे का इस स्तर तक पहुंचना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह विश्व स्तर का ऐसा मंच है, जिसकी तुलना ओलंपिक से की जाती है।’ झंडू मेरे पास 2019 से ट्रेनिंग कर रहा है। वह 4 चाल के थे, तभी उन्हें पोलियो मा दिया था।
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ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने पहला मेडल जीत लिया है। बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुष हेवीवेट वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 190 किलोग्राम की बेस्ट लिफ्ट के साथ 130.9 अंक हासिल किए। पूरी खबर
