BPSC ने शुक्रवार को सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा रद्द कर दी है। एग्जाम में गड़बड़ी और कदाचार को लेकर 6 जिलों में 8 FIR दर्ज हुई थी। जिसके बाद आयोग ने इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया।
.
इसके साथ ही आयोग ने 32 अभ्यर्थियों को बैन भी कर दिया गया है, जो अब आयोग की किसी भी आगामी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इस परीक्षा के लिए 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भरा था।
सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई केंद्रों पर ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल करने की कोशिशों को नाकाम किया।
जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ असामाजिक तत्वों और अभ्यर्थियों ने मिलकर परीक्षा में गड़बड़ी फैलाने का षड्यंत्र रचा था। प्रशासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
एग्जाम में गड़बड़ी और कदाचार को लेकर 6 जिलों में 8 FIR दर्ज हुई थी। मामले में 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
कौन-कौन सी परीक्षाएं हुईं रद्द
सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (विज्ञापन संख्या 87/2025): 14 अप्रैल से 21 अप्रैल तक आयोजित सभी 9 पालियों की परीक्षा रद्द।
सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी (विज्ञापन संख्या 108/2025): 23 अप्रैल को आयोजित लिखित परीक्षा रद्द।
आयोग जल्द ही इन परीक्षाओं के आयोजन की नई तिथियों की घोषणा करेगा। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।
3 चरणों में हुई थी परीक्षा
शिक्षा विभाग के तहत आने वाले AEDO की वेकैंसी बिहार में पहली बार आई। परीक्षा कंडक्ट कराने की जिम्मेवारी BPSC को दी गई। फॉर्म भरने के लिए 100 रुपए की फी थी। कुल 935 पदों के लिए करीब 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भर दिया।
इस कारण BPSC ने तीन चरणों में परीक्षा ली। पहले चरण की परीक्षा 14-15 अप्रैल को हुई। दूसरे चरण की परीक्षा 17-18 अप्रैल को हुई। तीसरे चरण की परीक्षा 20-21 अप्रैल को हुई। इसके लिए सभी 38 जिलों में 746 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
पेपर लीक से समझौता नहीं
बता दें 3 चरणों में हुई इस परीक्षा की शुरुआत के ठीक एक दिन पहले मुंगेर DM को मिली एक सूचना ने मास्टर साहब के सारे मास्टर प्लान पर पानी फेर दिया। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में 6 जिलों में 8 FIR दर्ज की गई।
मामले में 36 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। सबसे अधिक 22 गिरफ्तारी मुंगेर से हुई है। 12 दिन बाद भी EOU को ‘मास्टर’ नहीं मिल पाया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान प्रश्न-पत्र लीक होने या सोशल मीडिया पर वायरल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। न ही किसी प्रश्न-पत्र की कोई सीरीज बाहर मिली है।
इसके बावजूद, सोशल मीडिया और समाचारों में आई खबरों और कुछ केंद्रों पर हुई गड़बड़ी की कोशिशों को देखते हुए आयोग ने यह कड़ा कदम उठाया है। आयोग का मानना है कि परीक्षा की गरिमा और ईमानदारी से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
पेपर लीक हुआ या नहीं, यह सवाल बरकरार है। जवाब SIT की जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा। पर मास्टर साहब के परीक्षा में धांधली के मास्टर प्लान को जानिए…।
मुंगेर के मुफ्फसिल थाना में दर्ज FIR नंबर 177/26 के मुताबिक, 13 अप्रैल की रात मुंगेर DM को जानकारी मिली थी कि सुजल कुमार नाम का एक व्यक्ति 14 अप्रैल को होने वाली AEDO परीक्षा में नकल करवाने की तैयारी कर रहा है।
BPSC ने बायोमेट्रिक अटेंडेंट्स बनाने के लिए जिस कंपनी को ठेका दिया है, उसके स्टाफ के साथ सेटिंग कर उनकी जगह अपने लड़कों की भर्ती कर रहा है।
इस सूचना के बाद मुंगेर पुलिस की एक टीम बनी। टीम ने छापेमारी कर आधी रात को करीब 12:30 बजे तेलिया तालाब मोड़ के पास से सुजल को पकड़ा। उसके पास से मोबाइल और एक बैग जब्त किया।
बैग में लैपटॉप, आईपैड, बायोमैट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर की दो लिस्ट थी। साथ में परीक्षा देने वाले 20 कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड और 1 से 100 तक सीरियल नंबर लिखा 19 पूर्जा था, जिस पर परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों का जवाब लिखा जाना था।
सवालों का जवाब देने के लिए बनाया वॉट्सएप ग्रुप
पुलिस ने 20 साल के सुजल के मोबाइल फोन को खंगाला और उससे पूछताछ की। तब पहली बार उसने ‘मास्टर’ का नाम लिया। सुजल ने पुलिस को बताया- ‘मास्टर’ ने ‘एम मुंगेर’ नाम से एक वॉट्सएप ग्रुप में उसके मोबाइल नंबर को जोड़ा था।
इसी ग्रुप में उन 20 कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड को भेजा गया था, जिसकी कॉपी पुलिस ने उसके जब्त बैग से बरामद की थी। इन सभी कैंडिडेट्स का परीक्षा केंद्र मुंगेर ही था।
सेटिंग के तहत परीक्षा के दौरान सभी कैंडिडेट्स को सारे सवालों का सही जवाब बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर उपलब्ध कराने वाले थे। ये पहला वॉट्सएप ग्रुप था। ‘मास्टर’ ने ‘मुंगेर सॉल्यूशन’ नाम से दूसरा वॉट्सएप ग्रुप भी बना रखा था।
इस ग्रुप में ‘मास्टर’ खुद सवालों का सही जवाब भेजने वाला था। जवाब मिलने के बाद हमारे लोग उसे कैंडिडेट तक पहुंचाते। इसके एवज में सुजल और उसके मददगार साथियों को पैसा मिलने वाला था।
नालंदा पुलिस ने एग्जाम के दौरान कैंडिडेट को गिरफ्तार किया। इनको आंसर लिखवाया जा रहा था।
क्वेश्चन पेपर की फोटो खींचने के लिए हायर किए अपने आदमी
‘मास्टर’ के इशारे पर सुजल ने कुछ खास लोगों को हायर किया था। उसमें एके राठौड़, रोहन कुमार उर्फ देवराज और अभिषेक पांडेय शामिल हैं। इन सबको बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर बनाकर परीक्षा केंद्र के अंदर भेजने की तैयारी थी। ‘मास्टर’ ने इन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे रखी थी।
असल में इन सभी लोगों को अपने कैंडिडेट्स के क्वेश्चन पेपर की फोटो खींच कर भेजनी थी। इसके लिए ‘मुंगेर सॉल्यूशन’ नाम से वॉट्सएप ग्रुप बनाया गया था। फिर यहां से सवालों का जवाब ‘मास्टर’ तैयार करता और उसे वापस बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर के माध्यम से कैंडिडेट्स तक पहुंचाता।
सासाराम में बहन भी थी कैंडिडेट
EOU के मुताबिक, ‘मास्टर’ की बहन भी AEDO परीक्षा की कैंडिडेट थी। सासाराम के शांति नगर नेकरा स्थित ABR फाउंडेशन पब्लिक स्कूल में उसका सेंटर था। पूजा कुमारी के नाम से एडमिट कार्ड बना हुआ था।
पूजा के लिए भी पूरी सेटिंग थी। बायोमेट्रिक ऑपरेटर को इसके क्वेश्चन पेपर की फोटो खींच कर भेजने की जिम्मेवारी दी गई थी। फिर ‘मास्टर’ सारे सवालों का जवाब खुद तैयार कर वापस भेजता।
‘मास्टर’ और राठौड़ क्लासेज के मालिक की तलाश
‘मास्टर’ कौन है? कहां का रहने वाला है? इस बारे में पुलिस को अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। पुलिस के पास सिर्फ वो मोबाइल नंबर है, जिससे इसने परीक्षा के लिए दो वॉट्सएप ग्रुप बनाए थे। पर परीक्षा में धांधली के इस खेल में ‘मास्टर’ अकेला नहीं है। इसका एक क्राइम पार्टनर भी है।
मुंगेर पुलिस की शुरुआती जांच में स्थानीय कोचिंग ‘राठौड़ क्लासेज’ के मालिक का भी नाम सामने आया है। मामला सामने आने के बाद से दोनों फरार हैं। इनके पकड़े जाने के बाद ही परीक्षा में सेटिंग का पूरा खेल सामने आ पाएगा।
मुंगेर में एक साथ 17 कैंडिडेट को गिरफ्तार किया गया। उनके लिए जयपुर की कंपनी के कर्मचारी ने खास व्यवस्था की थी।
BPSC के अफसरों ने जयपुर की कंपनी को दिया टेंडर
AEDO की परीक्षा में टेंडर के जरिए BPSC ने बायोमेट्रिक अटेंडेंस की जिम्मेदारी जयपुर की कंपनी साईं एडूकेयर प्राइवेट लिमिटेड को दी थी। मुंगेर से पकड़ा गया सुजल कुमार इसी कंपनी का स्टाफ था।
कंपनी को ठेका देने में BPSC के अफसरों ने खास रुचि दिखाई है। परीक्षा में बायोमेट्रिक का टेंडर लेने वाली कंपनी SEPL की भूमिका की जांच EOU कर रही है। कंपनी का बैकग्राउंड खंगाला जा रहा है।
EOU पता लगा रही है कि क्या पेपर लीक की कोशिश हुई थी? सुजल के अलावा इस कंपनी में काम करने वाला कोई और शख्स भी शामिल नहीं है? ‘मास्टर’ के कांटैक्ट में सुजल कैसे आया? इनके बीच कब से कनेक्शन है? नालंदा का बायोमेट्रिक ऑपरेटर के कांटैक्ट भी खंगाला जाएगा।
NTA की डिबार कंपनी को BPSC ने दिया टेंडर
परीक्षा का क्वेश्चन पेपर लीक हुआ या नहीं? यह सवाल बरकरार है। सवाल उठ रहा है कि आखिर BPSC ने ऐसी कंपनी को टेंडर दिया ही क्यों। सूत्रों के मुताबिक, BPSC ने अपनी एक इंटरनल जांच टीम बनाई है। SEPL को शो काज किया गया है।
दरअसल, नेशनल टेस्ट एजेंसी (NTA) ने इस कंपनी को एक साल के लिए अपनी हर परीक्षा के टेंडर से डिबार कर दिया था। एक परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत पर अक्टूबर 2025 में यह कार्रवाई हुई थी।
हर परीक्षा में BPSC टेंडर के जरिए 3 काम कराती है।
- पहला- परीक्षा केंद्र के अंदर मॉनिटरिंग के लिए CCTV लगाना।
- दूसरा- मोबाइल नेटवर्क ठप रखने के लिए जैमर लगाना।
- तीसरा- कैंडिडेट्स के बायोमेट्रिक अटेंडेंस का।
डील के बाद सुजल ने की थी हेराफेरी
FIR के मुताबिक, कंपनी को जो लिस्ट भेजी गई उसमें पहले से हायर किए गए बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर के नाम ऑरिजनल थे। मगर, दूसरी लिस्ट में बदल दिए गए। इसमें उन लोगों के नाम थे, जिन्हें धांधली कराने के लिए ‘मास्टर’ के इशारे पर हायर किया गया था। सुजल ने यह काम ‘मास्टर’ से हुए डील के बाद किया था।
बायोमेट्रिक ऑपरेटर का काम होता क्या है?
बायोमेट्रिक ऑपरेटर का काम परीक्षा के दौरान कैंडिडेट्स के अंगूठों के निशान को मिलाना और उनके चेहरे को मिलाना होता है। कम भीड़-भाड़ वाले परीक्षा में इन्हें कैंडिडेट्स के आंखों की रेटिना का भी मिलान करना होता है। इन सब के अलावा परीक्षा में दी जाने वाली OMR शीट के बार कोड को भी स्कैन करने की जिम्मेवारी होती है। इसके लिए इन्हें कंपनी की ओर से एक टैब दिया जाता है।
रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ
EOU की SIT के मुताबिक, परीक्षा में अनियमितता पाई गई है। पेपर लीक की कोशिश की गई है। दोषी कौन है? इस पॉइंट पर जांच और रिसर्च चल रही है। डिजिटल और साइंटिफिक तरीके से एविडेंस जुटाए जा रहे हैं।
कड़ी दर कड़ी जोड़कर माफिया की पूरी चेन तैयार की जा रही है। जांच एजेंसी ने माना है कि परीक्षा का सिस्टम ब्रीच हुआ है।
इस प्रकरण का मास्टर माइंड क्या फरार ‘मास्टर’ है? या फिर इसके ऊपर कोई और भी है? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए मुंगेर से गिरफ्तार कर जेल भेजे गए सुजल कुमार को EOU जल्द रिमांड पर लेगी। उससे पूछताछ करेगी।
संभावना है कि सुजल से पूछताछ में कई और ठोस क्लू मिल सकते हैं। इसके अलावा नालंदा से गिरफ्तार बायोमेट्रिक ऑपरेटर समेत कई और लोगों को भी पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जाएगा।
BPSC से यह भी पूछा-बरामद आंसर-की सही या गलत ?
ईओयू ने पटना, नालंदा, मुंगेर, वैशाली और बेगूसराय से बरामद आंसर-की BPSC को सौंप दी है। BPSC से पूछा गया है कि बरामद आंसर-की सही है या गलत ? इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि साई एडुकेयर के अलावा किस कंपनी को क्या-क्या जिम्मेवारी किस आधार पर दी गई थी?
वहीं किस परीक्षा केंद्र पर किसकी ड्यूटी लगी थी और कौन उपस्थित थे, इसकी लिस्ट भी BPSC से मांगी गई है। इधर एसके पुरी थाने की पुलिस ने भी BPSC से एएन कॉलेज में तैनात कर्मियों की लिस्ट और उनका मोबाइल नंबर मांगा है।
अभ्यर्थी ने कहा-बायोमेट्रिक कर्मियों ने दी थी आंसर-की
नालंदा जिले के सोहसराय थाने की पुलिस ने एईडीओ की परीक्षा के दौरान 17 अप्रैल को दो बायोमेट्रिक कर्मियों सोहसराय के चंदन और नूरसराय के राहुल को गिरफ्तार किया था। साथ ही कुम्हरार की रहने वाली अभ्यर्थी श्वेता कुमारी को भी गिरफ्तार किया गया था।
श्वेता की उत्तर पुस्तिका के अंदर से प्रश्नपत्र के ग्रुप सी और डी की आंसर-की मिली थी। ईओयू दोनों बायोमेट्रिक कर्मी चंदन, राहुल और अभ्यर्थी श्वेता को रिमांड है। पर लेकर पटना आ गई है। तीनों से पूछताछ हो रही है।
श्वेता ने बताया कि उसे चंदन और राहुल ने आंसर-की पहुंचाई थी। राहुल और चंदन के पास से बरामद दो फोन, ब्लूटूथ डिवाइस की फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है। श्वेता को चंदन और राहुल ने पांच पन्ने की आंसर-की उपलब्ध कराई थी।
वहीं सोमवार को ईओयू मुंगेर में गिरफ्तार बायोमेट्रिक कर्मी और अभ्यर्थी को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन देगी।
