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Abhinav Bindra Statement | Athletes Must Question Coaches & System

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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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ओलिंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट शूटर अभिनव बिंद्रा ने एथलीट्स के खुलकर न बोल पाने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा- ‘समय के साथ खिलाड़ी अपने मन में भी सवाल करना बंद कर देते हैं।’

बिंद्रा ने एथलीट्स को सवाल पूछते रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अपने काम, कोच, तरीकों और सिस्टम पर सवाल उठाएं।

बिंद्रा ने कहा कि खिलाड़ियों का खुलकर बोलना जरूरी है। कुछ लोग इसे अनुशासनहीनता मान सकते हैं, लेकिन यह बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी हो सकता है। बिंद्रा ने शुक्रवार को सोशल प्लेटफॉर्म X पोस्ट में अपनी बात रखी।

4 पॉइंट्स में अभिनव बिंद्रा की बात

  • मैंने अपने खेल करियर में कोचों से सवाल किए और विचारों को चुनौती दी। ऐसा अनादर के कारण नहीं, बल्कि समझने, सीखने और बेहतर होने के लिए किया।
  • मैंने अपने पूरे खेल करियर में कोचों से सवाल किए, विचारों को चुनौती दी और जिज्ञासु बना रहा। ऐसा इसलिए नहीं था कि मेरे मन में सम्मान की कमी थी। मैं समझना, सीखना और बेहतर होना चाहता था।’
  • जब एथलीट्स को लगता है कि वे खुलकर नहीं बोल सकते, तो समय के साथ इससे कहीं ज्यादा गंभीर समस्या पैदा होती है। वे धीरे-धीरे अपने मन में भी सवाल करना बंद कर देते हैं। ऐसा होने पर खेलों में उत्कृष्टता के लिए जरूरी कुछ खो जाता है।
  • देश को ऐसे एथलीट्स चाहिए, जो अपने काम, कोच, उन्हें सुझाए गए तरीकों और उनके आसपास मौजूद व्यवस्थाओं पर सवाल करें। यह विरोध के लिए नहीं, बल्कि सच में सुधार की इच्छा से होना चाहिए।

अनुशासनहीनता और सीखने का फर्क

44 साल के बिंद्रा को भारत से निकले महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। वे ओलंपिक चैंपियन होने के साथ-साथ विश्व चैंपियनशिप के पूर्व गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं।

सक्रिय खेलों से विदा लेने के बाद बिंद्रा इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की एथलीट्स कमीशन के वाइस-चेयर बने। उन्होंने इस पद पर आठ साल काम किया। उनका कार्यकाल इस साल की शुरुआत में खत्म हुआ।

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