दिल्ली प्रीमियर लीग में एक खिलाड़ी के चयन पर को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि देव चौधरी को उनके क्रिकेट प्रदर्शन के बजाय सिफारिश और पिता के रसूख के दम पर टीम में जगह मिली। दिल्ली क्रिकेट से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि देव चौधरी न्यू दिल्ली टाइगर्स टीम के मालिक के दोस्त के बेटे हैं। इस टीम के कोच राजकुमार शर्मा हैं। जो विराट कोहली के बचपन के कोच रहे हैं। देव चौधरी के खेलने के तरीके पर सवाल उठे? देव ने न्यू दिल्ली टाइगर्स के लिए बतौर ओपनर 2 मैच खेले। वे साउथ दिल्ली सुपरस्टार्ज के खिलाफ खाता भी नहीं खोल सके। उन्होंने वेस्ट दिल्ली लायंस के खिलाफ 24 गेंदों पर 16 रन बनाए। खराब प्रदर्शन से ज्यादा चर्चा उनके बैट पकड़ने के तरीके पर हुई। वे पावरप्ले में स्पिनर की पांच गेंदों पर रन नहीं बना सके। देव की बैटिंग देख खिलाड़ी, कोच और अधिकारी आपस में पूछने लगे कि देव प्लेइंग-11 में कैसे पहुंचे। DDCA नियमों की समीक्षा करेगा देव चौधरी विवाद के बाद DDCA सचिव अशोक शर्मा ने कहा- ‘टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद नियम की समीक्षा की जाएगी।’ इस नियम के अनुसार टीमें नीलामी के बाद स्थानीय लीग के तीन खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर सकती हैं। बशर्ते उन खिलाड़ियों ने DDCA लीग में कम से कम पांच मैचों में हिस्सा लिया हो। विरोध के बावजूद एपेक्स काउंसिल में पास नियम हुआ? एपेक्स काउंसिल के चार सदस्यों- वकील श्याम शर्मा, वरिष्ठ सदस्य मनजीत सिंह, हरीश सिंगला और शिखा कुमार ने इस नियम का विरोध किया था। सदस्यों को डर था कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और ऐसे खिलाड़ियों को भी खेलने का मौका मिल सकता है, जो इसके योग्य नहीं हैं। हालांकि, कुछ प्रभावशाली अधिकारियों के कहने पर यह नियम पास कर दिया गया। प्रदीप सांगवान की सिफारिश पर स्पोर्टिंग से खेले देव देव को दिल्ली अंडर-19 के ट्रायल के लिए सैकड़ों अन्य खिलाड़ियों के साथ बुलाया गया था। वे DDCA लीग में स्पोर्टिंग क्लब से 2 खेले थे। क्लब से सूत्र ने बताया कि देव ने उनके क्लब के लिए कुछ लीग मैच खेले थे। देव की सिफारिश भारत के पूर्व अंडर-19 खिलाड़ी और दिल्ली के तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने की थी। क्लब अधिकारी ने उसके पिता को फोन कर कहा था कि अपने बेटे को मत भेजिए, वह पर्याप्त अच्छा नहीं है। देव चौधरी न्यू दिल्ली टाइगर्स में कैसे आए? न्यू दिल्ली टाइगर्स के कोच राजकुमार शर्मा हैं। बंटू सिंह टीम के सहायक कोच हैं। द्रोणाचार्य अवॉर्ड विजेता कोच राजकुमार विराट कोहली के बचपन के कोच भी हैं। PTI ने राजकुमार शर्मा से कई वॉट्सऐप संदेशों और फोन कॉल के जरिए जवाब मांगा, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। टीम के मालिक अजय कुमार को भी कई बार फोन और संदेश भेजे गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
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