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2 घंटे पहले
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फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे और पराग्वे की सांसद सेलेस्टे अमरिला के बीच फुटबॉल वर्ल्ड कप मैच के बाद शुरू हुआ सोशल मीडिया विवाद अब कानूनी कार्रवाई की चेतावनी तक पहुंच गया है। अमरिला ने एमबाप्पे के नाम खुला पत्र जारी कर उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनका विवाद फ्रांस या उसकी टीम से नहीं, बल्कि एमबाप्पे के व्यवहार से है। साथ ही माफी नहीं मिलने पर जेंडर वायलेंस के तहत कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
फ्रांस से नहीं, एमबाप्पे के घमंड से है दिक्कत’ यह विवाद तब शुरू हुआ जब फ्रांस ने वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में पराग्वे को 1-0 से हराकर बाहर कर दिया। मैच के बाद अमरिला ने सोशल मीडिया पर एमबाप्पे को लेकर आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणियां की थीं। जवाब में एमबाप्पे ने उन्हें ‘घृणास्पद महिला’ और ‘अपने पद के अयोग्य’ बताया। अब अमरिला ने अपने X अकाउंट पर खुला पत्र जारी कर कहा कि उनका विरोध सिर्फ एमबाप्पे के व्यवहार से है, फ्रांस से नहीं।
उन्होंने लिखा, ‘मैंने बचपन से बड़े होने तक तक फ्रेंच स्कूल में पढ़ाई की है। फ्रेंच भाषा बोलती हूं और फ्रांस से मेरा गहरा लगाव है। पिछले साल क्रिसमस भी परिवार के साथ फ्रांस में मनाया था। इसलिए मेरा विवाद फ्रांस से नहीं, बल्कि तुम्हारे घमंडी रवैये से है।’

मैच से पहले और बाद में भी पराग्वे का अपमान किया‘ अमरिला ने आरोप लगाया कि मैच से पहले एमबाप्पे के बयान और मैच के दौरान उनका रवैया पराग्वे के खिलाड़ियों के प्रति अपमानजनक था। उन्होंने कहा कि एमबाप्पे ने विरोधी खिलाड़ियों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और जीत के बाद भी खेल भावना नहीं दिखाई।
उनके मुताबिक, मैच खत्म होने के बाद एमबाप्पे ने पराग्वे के गोलकीपर से हाथ नहीं मिलाया और उसके सामने जाकर आक्रामक अंदाज में जीत का जश्न मनाया। उन्होंने इसे खेल भावना के खिलाफ बताया।
अपनी विवादित पोस्ट पर भी जताया अफसोस
अमरिला ने स्वीकार किया कि मैच के तुरंत बाद गुस्से में उन्होंने एमबाप्पे के खिलाफ नस्लीय और व्यक्तिगत टिप्पणियां की थीं। हालांकि बाद में उन्होंने वह पोस्ट डिलीट कर दी।
उन्होंने लिखा, “मुझे एहसास हुआ कि मैं भी वही नफरत दोहरा रही हूं, जिसका मैं खुद विरोध करती हूं। इसलिए मैंने वह पोस्ट हटा दी, क्योंकि वह अपमानजनक थी।”
माफी नहीं मांगी तो कोर्ट जाने की चेतावनी
एमबाप्पे की ओर से ‘घृणास्पद महिला’ और ‘अपने पद के अयोग्य’ कहे जाने पर अमरिला ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वह पराग्वे की जनता द्वारा चुनी गई सीनेटर हैं और उन्हें इस तरह अपमानित करने का किसी को अधिकार नहीं है।
पत्र के अंत में उन्होंने एमबाप्पे पर राजनीतिक और जेंडर आधारित हिंसा का आरोप लगाते हुए लिखा, “तुम सिर्फ इसलिए मेरा अपमान कर रहे हो क्योंकि मैं एक महिला हूं। अपने शब्द वापस लो और मुझसे माफी मांगो। अगर ऐसा नहीं किया तो मैं तुम्हारे खिलाफ जेंडर वायलेंस के तहत कानूनी कार्रवाई करूंगी।”
