केन रोसेंथल. द न्यूयॉर्क टाइम्स6 मिनट पहले
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शर्जर के अनुसार, ‘पियानो बजाना अंगुलियों के लिए वेटलिफ्टिंग जैसा है।’
स्पोर्ट्स मेडिकल साइंस की दुनिया में एक कहावत है- ‘जब डॉक्टर जवाब दे दें, तो समझो करियर खत्म।’ लेकिन 41 साल के मैक्स शर्जर ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। बेसबॉल के इतिहास के सबसे घातक पिचर में से एक शर्जर के लिए यह सीजन केवल वापसी का नहीं, बल्कि एक ‘चमत्कार’ का है। जिस अंगूठे के दर्द ने उन्हें संन्यास की कगार पर खड़ा कर दिया था, उसका इलाज किसी अस्पताल में नहीं, बल्कि पियानो के जरिए मिला।
दरअसल, शर्जर दो साल से दाएं हाथ के अंगूठे में सूजन और असहनीय दर्द से जूझ रहे थे। अमेरिका के टॉप सर्जन्स ने हाथ खड़े कर दिए थे। उनके पास इस दर्द का कोई सर्जिकल समाधान नहीं था। हालात इतने खराब हो गए थे कि पिछले सीजन शर्जर ने साथी खिलाड़ी क्रिस बासिट से कह दिया था कि अगर प्रैक्टिस के दौरान दर्द हुआ, तो वे खेल को अलविदा कह देंगे।
शर्जर की वापसी की कहानी टोरंटो के एक अपार्टमेंट से शुरू होती है। बच्चों को खेल-खेल में पियानो सिखाते वक्त उन्हें अहसास हुआ कि पियानो की भारी ‘कीज’ दबाते वक्त उनके अंगूठे में वह खिंचाव हो रहा है, जो कोई फिजियोथेरेपी नहीं दे पा रही थी। शर्जर ने कोई क्लासिकल संगीत नहीं सीखा था। उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर ‘डॉ. ड्रे’ और ‘एमिनेम’ के रैप गानों की धुनें सीखीं।
वे हर टूर पर अपना कीबोर्ड साथ ले जाने लगे। रात 11 बजे मैच खत्म होने के बाद वे होटल के कमरों में धीमी आवाज में घंटों पियानो बजाते, ताकि अंगुलियों के पोरों की मांसपेशियां मजबूत हो सकें। पियानो बजाने से उनके हाथ की मांसपेशियों में जो लचीलापन आया, उसने अंगूठे के जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को खत्म कर दिया।
इस ‘पियानो रिहैब’ का असर यह हुआ कि शर्जर ने वर्ल्ड सीरीज के सबसे अहम गेम में बेहतरीन शुरुआत की। 41 की उम्र में जहां खिलाड़ी कमेंट्री बॉक्स में होते हैं, वहां शर्जर को टोरंटो ब्लू जेस ने फिर 25 करोड़ रुपए में रिटेन किया है। साथी खिलाड़ी बासिट कहते हैं, ‘पूरी दुनिया में इतने महंगे इलाज मौजूद थे, लेकिन एक पियानो ने मैक्स का करियर बचा लिया। यह सिर्फ मैक्स जैसा पागलपन की हद तक जुनूनी खिलाड़ी ही सोच सकता था।’
पियानो की हार्ड कीज दबाने से सुधरती है पिचिंग ग्रिप
बेसबॉल पिचिंग में ‘फास्टबॉल’ फेंकने के लिए अंगूठे और तर्जनी के बीच जबरदस्त दबाव की जरूरत होती है। पियानो की कीज को दबाने के लिए अंगुलियों की जिस निपुणता की जरूरत होती है, वह सीधे तौर पर पिचिंग ग्रिप को सुधारती है। शर्जर के अनुसार, ‘पियानो बजाना अंगुलियों के लिए वेटलिफ्टिंग जैसा है।’
