Quitting chess, he won Rs 2.4 crore through poker, Jennifer Shahade, American women’s chess champion

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न्यूयॉर्क9 मिनट पहले

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चेस जगत में ‘मी-टू’ मूवमेंट की शुरुआत करने वाली अमेरिकी चैम्पियन जेनिफर शहाडे। - Dainik Bhaskar

चेस जगत में ‘मी-टू’ मूवमेंट की शुरुआत करने वाली अमेरिकी चैम्पियन जेनिफर शहाडे।

अमेरिकी महिला चेस चैम्पियन रहीं जेनिफर शहाडे ने हाल ही में एक बड़े पोकर टूर्नामेंट में करीब 2.4 करोड़ रुपए जीते हैं। हालांकि अब वे चेस से पूरी तरह दूरी बना चुकी हैं। दो बार की अमेरिकी महिला चेस चैम्पियन जेनिफर शहाडे ने फरवरी 2023 में एक ऐसा खुलासा किया था, जिसने शतरंज की शांत और गंभीर मानी जाने वाली दुनिया में भूचाल ला दिया।

उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘Time’s up’(अब समय समाप्त) लिखते हुए अमेरिकी चेस फेडरेशन के मशहूर ग्रैंडमास्टर और कोच एलेजांद्रो रामिरेज पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए। शहाडे ने बताया कि रामिरेज ने करीब एक दशक पहले उनका दो बार शारीरिक शोषण किया था। इस एक पोस्ट ने न सिर्फ शहाडे की जिंदगी बदल दी, बल्कि चेस की दुनिया में #MeToo मूवमेंट की नींव रख दी।

शहाडे की इस हिम्मत को देखकर शतरंज जगत की कई अन्य लड़कियां भी सामने आईं। जल्द ही आठ अन्य महिलाओं ने भी रामिरेज पर इसी तरह के आरोप लगाए, जिनमें से तीन तो घटना के वक्त नाबालिग थीं। इसके बाद ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने एक विस्तृत रिपोर्ट छापी, जिसके दबाव में आकर रामिरेज को अपना कोचिंग का पद और यूएस चेस फेडरेशन से इस्तीफा देना पड़ा।

फ्रांस में 100 महिला खिलाड़ियों ने लगाए आरोप

शहाडे की इस पहल का असर दुनिया भर में दिखा। फ्रांस में 100 से ज्यादा महिला खिलाड़ियों ने शोषण और लिंगभेद के खिलाफ ओपन लेटर लिखा। मैग्नस कार्लसन की बहन एलेन कार्लसन ने भी कहा कि शहाडे की पोस्ट के बाद वे अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा सकीं।

यूएस फेडरेशन ने नोटिस भेजा, धमकाया

हालांकि शहाडे के लिए यह सच सामने लाना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि 2020 से 2022 के बीच उन्होंने यूएस फेडरेशन को रामिरेज के खिलाफ कई बार आगाह किया था, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर जलील किया गया। बाद में उन्हें फेडरेशन की तरफ से कानूनी नोटिस भी भेजा गया कि वे युवा खिलाड़ियों से संपर्क न करें। फेडरेशन के रवैये, धमकियों और अपनी साख पर उठते सवालों के कारण उन्होंने अंततः यूएस चेस छोड़ दिया।

चेस में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम

शतरंज में महिलाओं की भागीदारी हमेशा से कम रही है। अब भी क्लासिकल चेस खेलने वालों में सिर्फ 11% और ग्रैंडमास्टर्स में केवल 2% महिलाएं हैं। शहाडे मानती हैं कि महिलाओं को स्कूलों, समाज और यहां तक कि इंटरनेट के एल्गोरिदम द्वारा भी हतोत्साहित किया जाता है। जब वे सोशल मीडिया पर चेस के वीडियो डालती हैं, तो एल्गोरिदम उसे 95 से 99 प्रतिशत पुरुषों को ही दिखाता है, लड़कियों को नहीं।

अब पोकर और लेखन पर ही ध्यान

अब 45 वर्षीय शहाडे प्रतिस्पर्धी चेस से दूर हैं। वे पेशेवर पोकर और लेखन पर पूरा ध्यान दे रही हैं। उनकी नई किताब ‘थिंकिंग साइडवेज’ रिलीज हुई है, जिसमें चेस और पोकर से मिली सीख का जिक्र है। इसी सीख का इस्तेमाल कर उन्होंने लास वेगास के एक बड़े पोकर टूर्नामेंट में हाल ही में करीब 2.4 करोड़ रुपए जीते हैं।

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