Cricket Rule Changes: Last Over Play Continues

मेलबर्न30 मिनट पहले

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टेस्ट में अभी दिन के आखिरी ओवर में गेंदबाजी करने वाली टीम विकेट ले लेती थी, तो बल्लेबाजी करने वाली टीम को तुरंत नया बल्लेबाज भेजने की जरूरत नहीं पड़ती थी और खेल वहीं रुक जाता है। - Dainik Bhaskar

टेस्ट में अभी दिन के आखिरी ओवर में गेंदबाजी करने वाली टीम विकेट ले लेती थी, तो बल्लेबाजी करने वाली टीम को तुरंत नया बल्लेबाज भेजने की जरूरत नहीं पड़ती थी और खेल वहीं रुक जाता है।

मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने क्रिकेट के नियमों में 73 बड़े बदलाव किए हैं। जिसमें टेस्ट मैच में अगर दिन की आखिरी ओवर के दौरान विकेट गिरता है तो पूरा ओवर खेलना अनिवार्य करना भी शामिल है। वहीं बाउंड्री पर लेने वाले कैच, विकेटकीपर की पोजीशन आदि कई नियमों में बदलाव सामने आए हैं। यह सभी नए नियम एक अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 2022 के बाद नियमों में यह सबसे बड़ा अपडेट है।

टेस्ट मैच में दिन का आखिरी ओवर का नियम बदला एमसीसी ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि टेस्ट मैचों में दिन का अंतिम ओवर अब हर हाल में पूरा कराया जाएगा। एमसीसी के अनुसार, ऐसा न होने से ‘खेल का रोमांच कम हो जाता है।’ एमसीसी ने कहा,’यह अनुचित माना गया कि अगर दिन के अंतिम ओवर में गेंदबाजी कर रही टीम विकेट लेती है, तो बल्लेबाजी टीम को नया बल्लेबाज भेजने की जरूरत नहीं पड़ती।’ वहीं यह भी बयान में कहा गया कि,’इससे समय की बचत भी नहीं होती, क्योंकि बची हुई गेंदें अगले दिन पूरी करनी ही पड़ती हैं। साथ ही इससे खेल का रोमांच कम हो जाता है। नया बल्लेबाज मुश्किल परिस्थितियों से बच जाता है। क्योंकि आमतौर पर उस समय गेंदबाजों के लिए हालात अनुकूल होते हैं। नए नियम के तहत अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो अंतिम पूरा किया जाएगा, भले ही उस दौरान विकेट गिर जाए।’

ओवरथ्रो और ‘डेड बॉल’ की नई परिभाषा MCC ने ओवरथ्रो और मिसफील्ड के बीच के अंतर को स्पष्ट कर दिया है। अब ओवरथ्रो सिर्फ तभी माना जाएगा, जब कोई फील्डर विकेट पर गेंद फेंकता है और वह गेंद आगे निकल जाती है। अगर फील्डर बाउंड्री के पास गेंद रोकने की कोशिश करता है और गेंद हाथ से फिसलकर निकल जाती है, तो उसे ओवरथ्रो नहीं, बल्कि मिसफील्ड कहा जाएगा। अब ‘डेड बॉल’ के लिए यह जरूरी नहीं है कि गेंद गेंदबाज या विकेटकीपर के हाथ में ही हो। अगर गेंद किसी भी फील्डर के पास आ गई हो या मैदान पर रुक गई हो और अंपायर को लगे कि अब बल्लेबाज रन नहीं ले सकता, तो वह गेंद को डेड बॉल घोषित कर सकता है।

नए नियमों के अनुसार अब अंपायर को यह तय करने की ज्यादा छूट होगी कि गेंद पूरी तरह से रुक चुकी है या नहीं।

नए नियमों के अनुसार अब अंपायर को यह तय करने की ज्यादा छूट होगी कि गेंद पूरी तरह से रुक चुकी है या नहीं।

हिट विकेट के नियम को और साफ किया गया

हिट विकेट में कन्फ्यूजन को दूर किया गया है। अब यह समझने में कोई दिक्कत नहीं रहेगी कि बल्लेबाज कब हिट विकेट आउट माना जाएगा और कब नहीं।

बैलेंस बिगड़ना अगर बल्लेबाज शॉट खेलने के बाद लड़खड़ाता है और संतुलन बनाते-बनाते खुद स्टंप्स पर गिर जाता है, तो वह आउट होगा। इससे फर्क नहीं पड़ेगा कि गेंद उस समय कितनी दूर जा चुकी है।

फील्डर से टक्कर अगर बल्लेबाज का किसी फील्डर से टकराव हो जाता है और उसी वजह से वह स्टंप्स पर गिरता है, तो उसे हिट विकेट आउट नहीं दिया जाएगा।

बल्ला छूटना अगर बल्लेबाज के हाथ से बल्ला छूटकर सीधे स्टंप्स पर लग जाता है, तो वह आउट माना जाएगा। लेकिन अगर बल्ला पहले विकेटकीपर या किसी फील्डर को छूता है और फिर स्टंप्स से टकराता है, तो बल्लेबाज नॉट आउट रहेगा।

एमसीसी ने साफ किया है कि अगर बल्लेबाज गेंद खेलने के बाद संतुलन बनाने की कोशिश में लड़खड़ाकर स्टंप्स पर गिर जाता है, तो उसे हिट विकेट आउट माना जाएगा, चाहे गेंद उस समय काफी दूर जा चुकी हो।

एमसीसी ने साफ किया है कि अगर बल्लेबाज गेंद खेलने के बाद संतुलन बनाने की कोशिश में लड़खड़ाकर स्टंप्स पर गिर जाता है, तो उसे हिट विकेट आउट माना जाएगा, चाहे गेंद उस समय काफी दूर जा चुकी हो।

बॉल और बैट के लिए तय हुए मानक एमसीसी ने मौजूदा और पूर्व महिला खिलाड़ियों से सलाह लेकर जूनियर और महिला क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली गेंदों के लिए नए नियम बनाए हैं। अब गेंदों को तीन साइज में बांटा गया है ।साइज-1, साइज-2 और साइज-3। साइज-1 वही गेंद है, जो अब तक पुरुष क्रिकेट में इस्तेमाल होती रही है, इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। बस अब तीनों साइज के लिए नियम और मानक एक जैसे तय कर दिए गए हैं, ताकि किसी तरह की उलझन न रहे।

साइज-1: यह वही पारंपरिक गेंद है, जो अब तक पुरुषों के सीनियर क्रिकेट में इस्तेमाल होती रही है। इस गेंद के वजन और आकार में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

साइज-2: यह गेंद महिला क्रिकेट और बड़े उम्र के जूनियर खिलाड़ियों के लिए तय की गई है। यह साइज-1 से थोड़ी हल्की और छोटी होती है, ताकि खिलाड़ियों को खेलने में आसानी हो।

साइज-3: यह गेंद छोटे उम्र के जूनियर खिलाड़ियों के लिए होती है। यह तीनों में सबसे हल्की और छोटी गेंद है, जिससे बच्चों को गेंद संभालने और खेल सीखने में मदद मिलती है।

एमसीसी का कहना यह है कि हर साइज की गेंद अपने तय वजन और आकार के अनुसार बनेगी, लेकिन गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा से जुड़े नियम तीनों के लिए एक जैसे होंगे।

लेमिनेटेड बैट को मंजूरी बैट की बढ़ती कीमतों को देखते हुए एमसीसी ने ओपन एज क्रिकेट में ‘लेमिनेटेड बैट’ (लकड़ी के टुकड़ों को जोड़कर बने बैट) को मंजूरी दे दी है। हालांकि, टॉप लेवल क्रिकेट में अभी भी पारंपरिक बैट ही चलेंगे।

एमसीसी ने क्लब स्तर के क्रिकेट में लैमिनेटेड बल्लों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

एमसीसी ने क्लब स्तर के क्रिकेट में लैमिनेटेड बल्लों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

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