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13 महीने बाद रिंग में लौट रहीं चैम्पियन लॉरेन प्राइस:कहा- पैसा कमाना, बॉक्सिंग में विरासत बनाना लक्ष्य; ओलिंपिक चैम्पियन शनिवार को स्टेफनी के खिलाफ उतरेंगी


आईबीएफ और डब्ल्यूबीसी वेल्टरवेट चैम्पियन वेल्स की लॉरेन प्राइस 13 महीनों के इंतजार के बाद बॉक्सिंग रिंग में वापसी कर रही हैं। टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली लॉरेन ने पिछले साल मार्च में नताशा जोनस को हराकर अपनी बादशाहत साबित की थी। लेकिन उसके बाद से उन्हें रिंग में उतरने का मौका नहीं मिला। अब शनिवार को वे प्यूर्टो रिको की अजेय बॉक्सर स्टेफनी पिनेइरो एक्विनो के खिलाफ अपने खिताब का बचाव करने उतरेंगी। इतने लंबे समय तक रिंग से दूर रहने के पीछे के कारणों पर लॉरेन ने बॉक्सिंग के अंदरूनी खेल और राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘बाहर के लोगों को यह आसानी से समझ नहीं आता। लेकिन अक्सर यह आपके प्रमोटर, पैसों और कॉन्ट्रैक्ट की उलझनों पर निर्भर करता है। जब आप चैम्पियन बन जाते हैं, तो सामने वाले बॉक्सर बहुत ज्यादा पैसों की मांग करते हैं, जिससे मैच तय होने में समय लगता है।’ लॉरेन का सफर उनके प्रमोटर ‘बॉक्सर’ की वित्तीय परेशानियों और कॉन्ट्रैक्ट के मुद्दों के कारण अटका हुआ था। इस दौरान उनके ट्रेनर रॉब मैक्रैकन ने उन्हें संभाला। लॉरेन का साफ कहना है कि वह बॉक्सिंग से जितना हो सके उतना पैसा कमाना चाहती हैं और अपने देश वेल्स में खास विरासत बनाना चाहती हैं। 31 वर्षीय लॉरेन की निजी जिंदगी में भी खुशियां दस्तक देने वाली हैं। 4 अप्रैल के इस मैच के बाद, वे 30 मई को बचपन की दोस्त कार्ला से शादी करेंगी। उन्होंने पिछले साल ही सगाई की थी। कार्ला बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ा अपना एक बिजनेस चलाती हैं और बॉक्सिंग की दुनिया से उनका कोई लेना-देना नहीं है। लॉरेन कहती हैं कि इससे उन्हें बहुत सुकून मिलता है क्योंकि घर लौटने पर हर वक्त सिर्फ बॉक्सिंग की बातें नहीं होतीं। लॉरेन की सफलता का सफर आसान नहीं रहा है। जब वह सिर्फ तीन दिन की थीं, तब शराब की लत के शिकार उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। उन्हें उनके दादा-दादी ने गोद लिया। लॉरेन कहती हैं, ‘मुझे अपने माता-पिता की याद नहीं आती। मैं बस अपने दादा-दादी की शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मुझे हमेशा प्यार दिया और सिखाया कि कोई भी सपना छोटा या अजीब नहीं होता।’

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