अंडर-19 वर्ल्ड कप में वैभव सूर्यवंशी ने अपने शानदार प्रदर्शन से बिहार के साथ पूरे देश का नाम रोशन किया है। इस खास उपलब्धि पर दैनिक भास्कर ने वैभव के कोच मनीष ओझा से बातचीत की। मनीष ने कहा कि वह कभी भी वैभव का लाइव मैच नहीं देखते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि वह आउट ना हो जाए। कोच ने बताया कि जब वैभव 8 साल की उम्र में उनके पास आए थे तो खेल के प्रति काफी जुनून था। क्रिकेट अकादमी में आने के लिए वह सुबह 4 बजे ही उठ जाते थे। वैभव लगातार 8 घंटे प्रैक्टिस करते रहते थे और थकते नहीं थे। वह एक दिन में 500 बॉल से प्रैक्टिस करते थे। वैभव के कोच ने बताया, ‘वैभव की हर बॉल में बाउंड्री करने की आदत पर जब मैंने टोका तो वैभव ने कहा कि जिस बॉल को छक्का मार सकता हूं, उसको सिंगल-डबल में क्यों बर्बाद करूं।’ पढ़िए वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा का पूरा इंटरव्यू…
सवाल: वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 फाइनल मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए शतक जड़ा और कई रिकॉर्ड्स भी बनाए हैं। कैसा लग रहा है? जवाब: हमारे लिए यह बहुत ही गर्व का पल है। एक कोच के लिए इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है कि उसके स्टूडेंट ने भारत के लिए वर्ल्ड कप जीता है। यह मेरे लिए उम्मीद और गौरव का क्षण है। सवाल: क्या आपने लाइव मैच देखा था जब वैभव बैटिंग कर रहे थे? जवाब: वैभव जब मैच खेलते हैं तो मैं मैच नहीं देखता हूं, क्योंकि मुझे काफी नर्वसनेस हो जाती है कि वो कहीं आउट ना हो जाए। मैं आसपास के लोगों से पूछता हूं कि वह मैच खेल रहे हैं या नहीं। जब तक वह 100 रन नहीं बना लेते हैं, तब तक मैं ना मैच देखता हूं और ना स्कोर पूछता हूं। रणजी में वैभव के डेब्यू मैच में भी जब मैं आया था तो मैं दो बॉल से ज्यादा नहीं देख पाया। उस वक्त मेरे दो स्टूडेंट वैभव सूर्यवंशी और सरमन निग्रोध बिहार के लिए ओपनिंग कर रहे थे। तब भी चाहत थी कि दोनों अच्छा प्रदर्शन करें तो वह उत्साह नर्वसनेस में बदल जाता है। इसलिए मैं वैभव का मैच 100 रन पूरा होने के बाद देखता हूं और फिर बाद में हाईलाइट देखता हूं। सवाल: वैभव कब आपके पास आए थे और उनकी जर्नी की शुरुआत कैसे हुई? जवाब: वैभव के पिताजी उसे 8 साल की उम्र में मेरे पास लाए थे। उसका घर समस्तीपुर में है, जो की पटना से करीब 80 किलोमीटर दूर है। इसलिए हमने डिसाइड किया कि वैभव अल्टरनेट डेज पर आकर प्रैक्टिस करेगा। वैभव सुबह 4 बजे ही प्रैक्टिस के लिए उठ जाता था और उनकी मां खाना बनाकर तैयार रखती थी। फिर वह 8 बजे तक मेरे पास पहुंचता था। उसके बाद में प्रैक्टिस शुरू करता था, जो की 4 बजे तक चलता था। वह जब तक थकता नहीं था तब तक हम लोग बैटिंग कराते थे, या यह कह सकते हैं कि मैं प्रैक्टिस कराते हुए थक जाता था मगर वैभव नहीं रूकता था। जब वैभव सुबह प्रैक्टिस के लिए पहुंचता था तो उसे सबसे पहले ट्रेनिंग मैं ही देता था। वैभव को बेसिक ड्रिल, हाथ से फेंक कर बाॅलिंग, रोबो आर्म से फेंककर बल्लेबाजी कराता था। जब मैं थक जाता था तो अकैडमी के अन्य कोच उसे प्रैक्टिस करते थे। जब वह थक जाते थे तो फिर बॉलर घंटों बाॅल डालते थे। सेशन खत्म होने के बाद भी जब हम वैभव से पूछते थे कि और बैटिंग करोगे, तो वह हमेशा हां ही बोलता था। 1 दिन में वैभव 500 से ज्यादा बाॅल से प्रैक्टिस करता था। सवाल: कौन सा ऐसा पल था जब आपको लगा कि वैभव अपने क्रिकेट करियर में बहुत आगे जाएंगे? जवाब: वैभव में एक अच्छी आदत यह है कि वह किसी भी चीजों को जल्दी सीखता है। वैभव को कोई भी टेक्निकल प्रोसेस डेमोंस्ट्रेट करके दिखाएं, तो वह बहुत जल्दी अडॉप्ट करता था। यह बातें वह न सिर्फ प्रैक्टिस में अडॉप्ट करता था बल्कि ओपन नेट सेशन, मैच स्टिमुलेशन में भी एग्जीक्यूट करता था। दूसरी बात यह है कि मैच खेलते वक्त उसका लेवल ऑफ कॉन्फिडेंस दिखता था। स्ट्रोक खेलते वक्त वह डोमिनेट करता था, तो ऐसा लगता था कि इस बच्चे में कुछ अलग है। टफ सिचुएशन में उसकी बैटिंग स्किल देखकर लगता था कि इसमें बहुत पोटेंशियल है और यह बड़ा प्लेयर है। सवाल: क्या वैभव ने कभी कहा कि वह किसके तरह बनना चाहते हैं? जवाब: वैभव ब्रायन लारा को अपना आइडल मानता है। उसकी बैक लिफ्ट भी उन्हीं की जैसी है। अगर आप किसी को आइडल मानते हैं तो उसके कई चीजों को ट्राई करते हैं। वैभव ब्रायन लारा को ही अपना रोल मॉडल मानता है। सवाल: जब आपकी आखिरी बातचीत वैभव से हुई थी, तो आपने उन्हें क्या टिप्स दी थी? जवाब: हाल ही में मैं रांची में आयोजित हुए विजय हजारे ट्रॉफी में गया था। तब वह पुल शॉट के कारण कई बार आउट हो जा रहा था, जिसे लेकर मैंने उसे टिप्स दी कि कैसे खेलना है। गेम के इंटेंट में सभी बाॅल को खेलने के चक्कर में बॉडी पोस्चर गड़बड़ हो जाता है। उसे मैंने नए तरीके से करने को लेकर टिप्स दी। सवाल: मैच खेलने के दौरान वैभव बाउंड्री काफी लगते हैं और सिंगल्स काम लेते हैं। इसे लेकर क्या कभी आपने कुछ सुझाव दिया है? जवाब: प्रैक्टिस सेशन के दौरान जब हम वैभव को 50 ओवर का टारगेट देते थे, तो खेलने के दौरान वह बड़े-बड़े स्ट्रोक्स मारता था। एक बार मैंने उससे कहा कि खेलते समय जो तुम चौके छक्के मारते हो वह सही नहीं है, क्योंकि अगर स्टेट के मैच में सेलेक्ट हो गए, तो वहां पर 4 डेज मैच होते हैं। यह संभव नहीं है कि तुम हर बॉल पर छक्का मार पाओ। इसलिए सिंगल डबल भी लिया करो। तब उसने कहा था कि जिस बॉल को छक्का मार सकता हूं, उसको सिंगल डबल क्यों लूं। वैभव शुरू से ही बॉलर को डोमिनेट करना चाहता है। सवाल: वैभव के प्रदर्शन से क्या लगता है कि उन्हें सीनियर में जल्द एंट्री मिलेगी? जवाब: जिस तरह से वैभव प्रदर्शन कर रहे हैं, बीसीसीआई को उन्हें कंसीडर करना चाहिए। उस बच्चे की यही खासियत है कि उसे जहां भी मौका मिला है, उसने अच्छा प्रदर्शन किया है। उसने अपने आक्रामकता को मेंटेन रखा है। अब बस उसे टीम इंडिया में ही प्रदर्शन करना बाकी रह गया है। मैं बीसीसीआई से रिक्वेस्ट करता हूं कि वैभव को टीम इंडिया में जल्द ब्रेक दिया जाए।
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