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खिलाड़ी मशीन नहीं, फिट होने में समय लगता है:लक्ष्मण बोले- इंजरी प्लेयर्स के करियर का हिस्सा, किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते


पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने खिलाड़ियों के धीरे फिट होने में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) को दोषी मानने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि ‘क्रिकेटर मशीन नहीं है। ऐसा नहीं है कि हर बार वे जल्दी चोट से उबर जाएंगे।’ लक्ष्मण BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख हैं। उन्होंने रविवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि CoE और पुरुष-महिला दोनों टीमों के मैनेजमेंट के बीच शानदार तालमेल है। लक्ष्मण का बयान ऐसे टाइम पर आया है, जब देशभर में खिलाड़ियों के चोटिल होने पर सवाल उठ रहे हैं। लक्ष्मण ने कहा- CoE सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं लक्ष्मण ने कहा- ‘CoE सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं है। क्रिकेटरों को बेहतर बनाने में इसकी बड़ी भूमिका है। इसलिए चोट के लिए दोष शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, क्योंकि इससे किसी को बलि का बकरा बनाया जाता है।’ लक्ष्मण ने कहा कि फिटनेस के नियम कड़े हैं। साथ ही सभी खिलाड़ियों के शरीर का नेचर भी अलग है। इस वजह से कोई खिलाड़ी तय समयसीमा में पूरी तरह फिट नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि चोट का पता होने से लेकर खिलाड़ी के फिट होकर जाने तक उसकी मॉनिटरिंग होती है। इसी के आधार पर उसका वर्कलोड बढ़ाया जाता है। लक्ष्मण ने खिलाड़ी के इंजरी से फिट होने तक का प्रोसेस समझाया लक्ष्मण ने अपनी बात समझाने के लिए जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सिलेक्टर्स CoE से खिलाड़ी की फिटनेस की रिपोर्ट मांगता है। CoE यह रिपोर्ट सिलेक्शन कमिटी के प्रेसिडेंट को भेजता है। इसकी कॉपी दोनों टीमों के हेड कोच और BCCI को भी दी जाती है। लक्ष्मण ने कहा- ‘बुमराह और सुदर्शन के नाम के आगे हमेशा एक स्टार चिन्ह लगा होता है। इसका मतलब है- फिट रहने पर खेलेंगे। अगर खिलाड़ी की प्रोग्रेस धीमी होती है, तो सिलेक्शन कमिटी प्रेसिडेंट और हेड कोच को इन्फोर्मेशन दी जाती है। लक्ष्मण बोले- चोट चिंता की वजह नहीं है लक्ष्मण ने बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने पर कहा- ‘मुझे नहीं लगता कि यह चिंता का कारण है। जब कोई खिलाड़ी हाई लेवल पर खेलता है, तो उससे 100% से ज्यादा देने की उम्मीद होती है।’ उन्होंने कहा- खिलाड़ियों की चोट को देखने का बाहरी दुनिया का नजरिया बदलना चाहिए। CoE के फिटनेस स्टाफ एड्रियन, निक और कमलेश काम कर रहे हैं। सीरीज से 3-4 हफ्ते पहले सिलेक्शन मीटिंग होती है BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने सीरीज से पहले टीम का सिलेक्शन प्रोसेस समझाया। उन्होंने कहा कि टीम के रवाना होने से कम से कम 3 से 4 हफ्ते पहले मीटिंग होती है। इसलिए उस समय खिलाड़ी की सही स्थिति पता नहीं होती। इसी वजह से उसके नाम के आगे स्टार लगाया जाता है और स्क्वाड में रखा जाता है। ———————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… 5 हजार इंटरनेशनल मैचों वाला पहला फॉर्मेट बना वनडे:भारत सबसे ज्यादा खेला, ऑस्ट्रेलिया जीत में आगे; सचिन रनों के बादशाह, कोहली शतकों के किंग इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली बार किसी फॉर्मेट में 5 हजार मैच पूरे हो गए हैं। यह उपलब्धि हासिल हुई वनडे को। जिस स्कॉटलैंड में अभी कॉमनवेल्थ गेम्स हुए हैं वहीं 5000वां वनडे मैच भी खेला गया। शुक्रवार को स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच हुए इस मुकाबले को स्कॉटलैंड ने 9 रन से जीत लिया। पूरी खबर पढ़ें…

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