भारत सहित कई देशों में पारंपरिक रूप से पुरुष क्रिकेट का प्रभाव अधिक रहा है। इसके उलट चीन में एक नई व्यवस्था देखने को मिलती है। चीन में क्रिकेट को मुख्य रूप से महिलाओं का खेल माना जाता है और सारा ध्यान महिला टीम के विकास पर केंद्रित है। हाल ही में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘क्रिकेट रिसर्च नेटवर्क’ के सम्मेलन में चीन की इसी अनूठी खेल नीति पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन में चीन की शीआन जियाओतोंग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर मैक्स हे ने एक शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि चीन में खेलों का पूरा ढांचा ओलिंपिक मेडल की संख्या बढ़ाने पर आधारित है। 1988 के सोल ओलिंपिक में चीन को केवल पांच गोल्ड मिले थे। इसके बाद, चीनी खेल प्रशासन ने रणनीति में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने तय किया कि खेल महाशक्ति बनने और मेडल टेबल में शीर्ष पर रहने के लिए ‘महिला खेलों’ में निवेश करना सबसे प्रभावी तरीका है। इसके परिणाम भी सामने आए हैं। पिछले चार ओलिंपिक (लंदन, रियो, टोक्यो, पेरिस) में चीन ने कुल 143 गोल्ड जीते हैं। इनमें से 62.2% मेडल महिला एथलीटों ने ही दिलाए हैं। यही ‘ओलिंपिक रणनीति’ चीन में क्रिकेट पर भी लागू होती है। वहां के मीडिया में आधिकारिक तौर पर महिला क्रिकेट टीम को ही मुख्य टीम का दर्जा प्राप्त है। उनके पास टर्फ विकेट पर अभ्यास करने की सुविधा, अनुभवी कोच और विदेशी दौरों के अधिक मौके हैं। चीन पुरुष टीम के कोच मोहम्मद रमजान (पाक के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर) के अनुभव भी इसी बात की पुष्टि करते हैं। उनके अनुसार, पुरुष टीम को लंबे समय से इंटरनेशनल टी20 खेलने का मौका नहीं मिला है, जबकि महिला टीम नियमित रूप से टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही है। उन्हें अधिक मैच खेलने मिलते हैं। चीन की पुरुष टीम 2024 से कोई टी20 नहीं खेली है, जबकि महिला टीम 2025 में जापान दौरा कर चुकी है। एलए ओलिंपिक 2028 में क्रिकेट की वापसी हो रही है। हालांकि चीन की टीम फिलहाल वहां क्वालिफाई करने की स्थिति में नहीं है, लेकिन भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए चीन अपनी महिला क्रिकेट टीम को लगातार बढ़ावा दे रहा है। महिला टीम आईसीसी रैंकिंग में 45वें पर, पुरुष 91 पर चीन की पुरुष टीम के पास संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय अवसरों का अभाव है। सुविधाओं के इस अंतर का सीधा असर रैंकिंग पर भी दिखता है। वर्तमान आईसीसी टी20 रैंकिंग में चीन की महिला टीम 45वें स्थान पर है, जबकि पुरुष टीम 91वें स्थान पर संघर्ष कर रही है।
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